भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की तैयारी में जुटा हुआ है और इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम सहयोग एक बार फिर चर्चा में आ गया। दरअसल दिल्ली में हुई एक बड़ी बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की। लेकिन सबसे ज्यादा जोर ऊर्जा और खासतौर पर यूरेनियम सप्लाई बढ़ाने पर रहा। विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ कहा कि भारत अब ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम साझेदारी को विस्तार देना चाहता है क्योंकि देश का न्यूक्लियर सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार मिली। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रींत्रियों की हालिया मुलाकात के बाद अलग-अलग मंत्रियों और विभागों के बीच लगातार बातचीत बढ़ी। व्यापार और निवेश को लेकर भी दोनों देश ईसीटीए और सीईसीए समझौतों पर आगे बढ़ रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र को लेकर जयशंकर ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहले से ऊर्जा व्यापार जारी है। लेकिन अब इसे यूरेनियम सप्लाई तक बढ़ाने पर गंभीरता से काम हो रहा है। उन्होंने कहा हम ऊर्जा व्यापार का विस्तार यूरेनियम सप्लाई तक करना चाहते हैं। भारत के न्यूक्लियर सेक्टर में सुधार हुए हैं और आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा का उत्पादन तेजी से बढ़ेगा। विदेश मंत्री जयशंकर ने यह भी बताया कि दोनों देशों की टीमें क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर लगातार चर्चा कर रही हैं। इसके अलावा रक्षा सहयोग भी तेजी से मजबूत हो रहा है। दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य अभ्यास और रक्षा आदान प्रदान हो रहे हैं। खासतौर पर समुद्री सुरक्षा सहयोग दोनों देशों की साझेदारी का अहम हिस्सा बन चुका है। जयशंकर ने कहा कि स्पेस और खेल के क्षेत्र में बातचीत आगे बढ़ रही है। दरअसल यूरेनियम के मामले में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे ताकतवर देश माना जाता है। वहां करीब 16.7 लाख टन यूरेनियम भंडार मौजूद हैं जो दुनिया के कुल भंडार का लगभग 28% है।
ऑस्ट्रेलिया के ओलंपिक डैम, रेंजर और बेव्ली जैसे इलाके यूरेनियम के बड़े केंद्र हैं। खास बात यह है कि इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया खुद बड़े स्तर पर परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम नहीं चलाता। वहीं भारत यूरेनियम भंडार के मामले में दुनिया के टॉप 10 देशों में शामिल नहीं है। भारत के पास करीब 1.7 लाख टन यूरेनियम भंडार है और वो दुनिया में 13वें स्थान पर आता है। देश में सबसे ज्यादा यूरेनियम झारखंड और आंध्र प्रदेश में पाया जाता है। ऐसे में भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है ताकि उसके परमाणु रिएक्टर्स को इधर मिलता रहे। वहीं भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2014 में सैन्य परमाणु समझौता हुआ था।
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संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह रगड़ा है। न्यूयॉर्क में यूएएससी की ओपन डिबेट के दौरान भारत ने पाकिस्तान को सीधे-सीधे आतंक की फैक्ट्री बताते हुए कहा कि अब उसे समझ लेना चाहिए कि सीमा पार आतंकवाद फैलाने की कीमत चुकानी पड़ेगी। भारत की तरफ से यूएन में स्थाई प्रतिनिधि पी हरीश ने पाकिस्तान पर जोरदार हमला बोला और साफ कहा कि दशकों से आतंकवाद, कट्टरपंथ और हिंसक उग्रवाद को पालनेसने का काम पाकिस्तान करते आया है। दरअसल बहस के दौरान पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ बेबुनियाद बातें उठाने की कोशिश की थी। लेकिन भारत ने उसी मंच से उसे करारा जवाब दिया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आज पाकिस्तान की तरफ से जो झूठे और बेवजह आरोप लगाए गए हैं उनका जवाब देना जरूरी। भारत अब पूरी दुनिया के सामने सच रखना चाहता है।
भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि आजादी के तुरंत बाद से ही उसने भारत के खिलाफ साजिशें शुरू कर दी थी। पी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के उन इलाकों पर नजर डाली जो कानूनी और पूरी तरह वैध तरीके से भारत का हिस्सा बने थे। इसके बाद पाकिस्तान ने कई युद्ध छेड़े। सीमा पर हमले किए और लगातार आतंकवाद को हथियार की तरह इस्तेमाल किया। भारत ने पाकिस्तान की उस पुरानी नीति का भी जिक्र किया जिसे ब्लीड इंडिया बाय ए थाउजेंड कट्स कहा जाता है। यानी भारत को हजारों चोट देकर कमजोर करने की रणनीति। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान का यह रवैया दिखाता है कि यूएन चार्टर और शांति की बातें करना सिर्फ उसका दिखावा है।
असलियत में पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है। भारत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि उसे अपनी सुरक्षा का पूरा अधिकार है और अगर पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद फैलाएगा तो उसके परिणाम भुगतने होंगे। भारत का साफ संदेश था कि अब आतंक फैलाकर बच निकलने का दौर खत्म हो चुका है। यूएन में भारत ने पाकिस्तान को सिर्फ आतंकवाद पर ही नहीं घेरा बल्कि धार्मिक कट्टरता और हिंसक उग्रवाद को बढ़ावा देने के भी आरोप लगाए। भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपनी स्थापना के समय से ही आतंक कट्टरपन और भारत विरोधी सोच को पालता आया है। दुनिया के सामने इसके सबूत मौजूद हैं और इस पर ज्यादा सफाई देने की जरूरत नहीं है। एक तरह से इस बार यूएन के मंच से भारत ने दुनिया को साफ संदेश दे दिया कि पाकिस्तान की आतंकी वाली रणनीति अब छिपी नहीं है। आतंकवाद को विदेश नीति का हिस्सा बनाने वाला पाकिस्तान लगातार बेनकाब हो रहा है।
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