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भारत की मिसाइल से साइप्रस मचाएगा धमाका, तुर्की की मीडिया में मची खलबली

क्या भारतीय मिसाइलें अब भूमध्य सागर यानी कि मेडिटेरियन सी की लहरों पर तैनात होने वाली हैं? क्या भारत का रक्षा उद्योग अब यूरोप के द्वार तक अपनी ढाक जमाने जा रहा है? यह सवाल  तुर्की का मीडिया चीख-चीख कर कर रहा है। जब से भारत और साइपरस ने अपनी दोस्ती को रणनीतिक साझेदारी में बदला है तब से अंकारा से लेकर इस्तांबुल तक बेचैनी साफ-साफ देखी जा सकती है। तुर्की की प्रमुख मीडिया वेबसाइट टीआर हैबर ने एक रिपोर्ट छापी है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। टीआर हैबर के मुताबिक भारत और साइपरस के बीच एक ऐसा समझौता हुआ है जिसके तहत भारतीय मिसाइलें और ड्रोन अब पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किए जा सकते हैं।  दरअसल हाल ही में साइपस गणराज के राष्ट्रपति निकोस भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी और साइपरस के राष्ट्रपति के बीच हुई शिखर वार्ता सामान्य कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी। दोनों देशों ने अपने दशकों पुराने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर अपग्रेड कर दिया। लेकिन सबसे बड़ी खबर रक्षा गलियारों से निकल कर सामने आई। 

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दोनों देशों ने साल 2026 से साल 2031 तक के लिए एक डिफेंस कोऑपरेशन रोड मैप पर हस्ताक्षर कर दिए। यह 5 साल की योजना दोनों देशों के बीच सैन्य और तकनीकी सहयोग की एक नई इबारत लिखने वाला है। अब तुर्की की मीडिया टीआर हैवर की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते का असल मतलब यह है कि भारतीय रक्षा तकनीक अब उस क्षेत्र में प्रवेश कर रही है जिसे तुर्की अपना प्रभाव क्षेत्र मानता है। रिपोर्ट में हेडलाइन दी गई है कि साइपरस और भारत के बीच समझौता भारतीय मिसाइलों और ड्रोन को पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किया जा रहा है। तुर्की की मीडिया का मानना है कि साइपस अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस या अन्य देशों के बजाय भारत की ओर देख रहा है। विशेष रूप से भारतीय ड्रोन तकनीक और मिसाइल प्रणालियों ने साइपरस का ध्यान खींचा है। अगर यह सच होता है तो यह रक्षा निर्यात के मामले में भारत की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या खरीदेगा साइपरस?  टीआर हैबर की रिपोर्ट के मुताबिक साइपरस भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा विकसित की गई अत्याधुनिक प्रणालियों में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है। इसमें दो चीजें सबसे प्रमुख है। पहला है मानव रहित हवाई वाहन। यानी भारत ने हाल ही में वर्षों में ड्रोन तकनीक में लंबी छलांग लगाई है। 

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निगरानी से लेकर सटीक हमले करने वाले ड्रोन तक। भारत अब एक ग्लोबल प्लेयर है। दूसरा है मिसाइल टेक्नोलॉजी। भारत की आकाश मिसाइल प्रणाली या ब्रह्मोस जैसी तकनीकों ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। टीआर हैबर का दावा है कि इन मिसाइलों की संभावित खरीद को लेकर बातचीत एजेंडे में शामिल है। अब तुर्की की चिंता का असली कारण क्या है? वो भी समझ लीजिए। देखिए तुर्की और साइपरस के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है। तुर्की ने उत्तरी साइपरस पर कब्जा जमा रखा है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में साइप्रस अगर भारत जैसे वैश्विक शक्ति के साथ रक्षा समझौता कर लेता है तो यह तुर्की के लिए एक बड़ा सामरिक झटका होगा और टीआर हैबर अपनी रिपोर्ट में संकेत देता है कि भारत का यह कदम ना केवल रक्षा के लिहाज से बल्कि भू राजनीति के लिहाज से भी तुर्की को चुनौती देने जैसा है। भारत अब खुलकर उन देशों के साथ हाथ मिला रहा है जिनका तुर्की के साथ तनाव है। खैर टीआर हैबर के हवाले से आई यह खबर बताती है कि भारत की विदेश नीति अब केवल रक्षात्मक नहीं रही है बल्कि वह सक्रिय रूप से अपने रक्षा उत्पादों के लिए नए बाजार और नए साझेदार तलाश कर रही है। 

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भारत की भयंकर परमाणु छलांग, यूरेनियम पर हुआ बड़ा खेल

भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की तैयारी में जुटा हुआ है और इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम सहयोग एक बार फिर चर्चा में आ गया। दरअसल दिल्ली में हुई एक बड़ी बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की। लेकिन सबसे ज्यादा जोर ऊर्जा और खासतौर पर यूरेनियम सप्लाई बढ़ाने पर रहा। विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ कहा कि भारत अब ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम साझेदारी को विस्तार देना चाहता है क्योंकि देश का न्यूक्लियर सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार मिली। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रींत्रियों की हालिया मुलाकात के बाद अलग-अलग मंत्रियों और विभागों के बीच लगातार बातचीत बढ़ी। व्यापार और निवेश को लेकर भी दोनों देश ईसीटीए और सीईसीए समझौतों पर आगे बढ़ रहे हैं। 

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ऊर्जा क्षेत्र को लेकर जयशंकर ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहले से ऊर्जा व्यापार जारी है। लेकिन अब इसे यूरेनियम सप्लाई तक बढ़ाने पर गंभीरता से काम हो रहा है। उन्होंने कहा हम ऊर्जा व्यापार का विस्तार यूरेनियम सप्लाई तक करना चाहते हैं। भारत के न्यूक्लियर सेक्टर में सुधार हुए हैं और आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा का उत्पादन तेजी से बढ़ेगा। विदेश मंत्री जयशंकर ने यह भी बताया कि दोनों देशों की टीमें क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर लगातार चर्चा कर रही हैं। इसके अलावा रक्षा सहयोग भी तेजी से मजबूत हो रहा है। दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य अभ्यास और रक्षा आदान प्रदान हो रहे हैं। खासतौर पर समुद्री सुरक्षा सहयोग दोनों देशों की साझेदारी का अहम हिस्सा बन चुका है। जयशंकर ने कहा कि स्पेस और खेल के क्षेत्र में बातचीत आगे बढ़ रही है। दरअसल यूरेनियम के मामले में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे ताकतवर देश माना जाता है। वहां करीब 16.7 लाख टन यूरेनियम भंडार मौजूद हैं जो दुनिया के कुल भंडार का लगभग 28% है। 

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ऑस्ट्रेलिया के ओलंपिक डैम, रेंजर और बेव्ली जैसे इलाके यूरेनियम के बड़े केंद्र हैं। खास बात यह है कि इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया खुद बड़े स्तर पर परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम नहीं चलाता। वहीं भारत यूरेनियम भंडार के मामले में दुनिया के टॉप 10 देशों में शामिल नहीं है। भारत के पास करीब 1.7 लाख टन यूरेनियम भंडार है और वो दुनिया में 13वें स्थान पर आता है। देश में सबसे ज्यादा यूरेनियम झारखंड और आंध्र प्रदेश में पाया जाता है। ऐसे में भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है ताकि उसके परमाणु रिएक्टर्स को इधर मिलता रहे। वहीं भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2014 में सैन्य परमाणु समझौता हुआ था।

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  Sports

Suryavanshi से निपटने के लिए Pat Cummins का प्लान तैयार, बोले - 'SRH के पास है प्लान B-C'

सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस ने कहा है कि टीम बुधवार शाम को न्यू चंडीगढ़ में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के एलिमिनेटर मुकाबले के लिए तैयार होने के साथ-साथ अपनी गेंदबाजी योजनाओं को परिष्कृत करने और पिछली गलतियों से सीखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जियोस्टार से बात करते हुए कमिंस ने वैभव सूर्यवंशी जैसे 15 वर्षीय प्रतिभाशाली बल्लेबाजों को रोकने की चुनौती को स्वीकार किया, जिन्होंने इससे पहले जयपुर में लीग चरण के एक मैच में एसआरएच के खिलाफ शतक जड़ा था।
 

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कमिंस ने कहा कि एक गेंदबाज के रूप में संतुलन बनाए रखना हमेशा जरूरी होता है, यह समझना कि आप क्या अच्छा करते हैं और अपनी ताकत का इस्तेमाल कैसे करें। लेकिन जब हर टीम में एक या दो ऐसे खिलाड़ी होते हैं जो मैच का रुख बदल सकते हैं, तो आपको प्लान बी या प्लान सी पर थोड़ा ज्यादा समय देना पड़ता है। हम उसके लिए योजना बनाएंगे। हालांकि उसने पिछली बार हमारे खिलाफ शतक बनाया था, मुझे लगता है कि कई बार हमने वास्तव में उसके खिलाफ अच्छी गेंदबाजी की और उसे शांत रखा। कई बार वह खुलकर खेल पाया। इसलिए हम इससे सीखेंगे।

एसआरएच के कप्तान ने आगे कहा कि हमारा ध्यान बल्लेबाजों के लिए जटिल योजनाएँ बनाने के बजाय प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने पर है। उन्होंने कहा कि हम अपनी ताकत पर टिके रहने की कोशिश करेंगे और जहाँ जरूरत होगी वहाँ छोटे-मोटे बदलाव करेंगे। अहम मौकों पर बेहतर प्रदर्शन करना ही हमारा लक्ष्य है। कमिंस ने मध्य क्रम के बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन की इस सीजन में शानदार फॉर्म की भी तारीफ की और उन्हें एसआरएच के अभियान का निर्णायक कारक बताया।
 

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मौजूदा आईपीएल सीजन में क्लासेन 14 मैचों में 606 रन बनाकर तीसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 50.50 का मजबूत औसत बनाए रखा है और अब तक छह अर्धशतक लगा चुके हैं। कमिंस ने कहा कि वह बहुत ही शानदार खिलाड़ी हैं। हमेशा से ही बेहतरीन रहे हैं, और इस साल उन्होंने एक नया मुकाम हासिल किया है। चेन्नई में बेहद मुश्किल विकेट पर खेली गई उनकी कुछ पारियां, और यहां तक ​​कि आरसीबी के खिलाफ पिछला मैच भी, अविश्वसनीय रहा है। वह मैदान में उतरकर खेल की गति बदल सकते हैं। हमें बहुत खुशी है कि वह हमारे मध्य क्रम में हैं। हमारी सफलता में उनका बड़ा योगदान रहा है।
 
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Wed, 27 May 2026 17:01:50 +0530

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