Explainer: जीभ निकालकर रणवीर सिंह ने की थी 'कांतारा' दैव्य की नकल, अब मंदिर में किया पश्चाताप, जानें पूरा विवाद
Ranveer Singh Kantara Trolling: रणवीर सिंह इन दिनों काफी चर्चा में हैं. एक तरफ जहां एक्टर अपनी फिल्म धुरंधर की सफलता की वजह से सुर्खियों में हैं तो वहीं, फिल्म 'डॉन 3' को लेकर वो विवादों में भी गिर गए हैं. इस बीच एक्टर श्री चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचे थे, जहां उन्होंने दर्शन किए और माथा टेका. जानकारी के लिए बता दें कि मंदिर जाना फिल्म 'कांतारा' के 'दैव्य' से जुड़ा है, जिसकी नकल करने की वजह से एक्टर पर एफआईआर दर्ज हुई थी. तो चलिए जानते हैं, इस पूरे विवाद के बारे में-
रणवीर सिंह ने किए चामुंडेश्वरी मंदिर के दर्शन
हाल ही में रणवीर सिंह मैसूरु के श्री चामुंडेश्वरी मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर ने किसी वीआईपी सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया था. वो एक आम श्रद्धालु की तरह लाइन में खड़े हुए और देवी चामुंडेश्वरी के दर्शन किए. गर्भगृह के प्रवेश तक एक्टर ने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था, जिसे अंदर जाने से पहले हटा दिया था. फिर एक्टर ने माथा टेककर पूजा की थी, जिसकी कई फोटोज वायरल हुई. बता दें कि, एक्टर ने मंदिर जाने का कदम कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया, जो उनके खिलाफ दर्ज 'कांतारा' फिल्म के दैव्य सीन की मिमिक्री केस में दिया गया था.
क्या था कांतारा से जुड़ा विवाद?
ये पूरा विवाद पिछले साल 30 नवंबर 2025 को गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में हुआ था. इस दौरान रणवीर सिंह ने स्टेज पर 'कांतारा' (Kantara) एक्टर ऋषभ शेट्टी (Rishabh Shetty) की एक्टिंग की तारीफ की थी. लेकिन तारीफ करते-करते रणवीर फिल्म के दैव्य सीन की नकल कर बैठे थे, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था. एक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. वहीं, कन्नड़ समुदाय के एक बड़े हिस्से ने कड़ी नाराजगी जताई थी और एक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी.
कोर्ट ने दिया था मंदिर जाने का आदेश
एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद रणवीर सिंह ने फरवरी 2026 में राहत के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया था. तब सुनवाई के दौरान, जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कहा था कि एक सुपरस्टार होने के नाते रणवीर के पास लोगों को प्रभावित करने की शक्ति है, इसलिए उन्हें अपने शब्दों में पूरी जिम्मेदारी बरतनी चाहिए. कोर्ट ने माना था कि एक्टर की टिप्पणी असंवेदनशील थी. इसके बाद अप्रैल में रणवीर ने कोर्ट में एक संशोधित हलफनामा दायर किया था और बिना किसी शर्त के माफी मांगी थी.माफीनामे को स्वीकार करते हुए, अदालत ने एक्टर को चामुंडेश्वरी मंदिर जाने और प्रार्थना करने का निर्देश दिया था.
रणवीर सिंह ने मांगी थी माफी
वहीं, विवाद में फंसने के बाद रणवीर सिंह ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर माफी भी मांगी थी. एक्टर ने लिखा था- 'मेरा इरादा सिर्फ ऋषभ शेट्टी की बेहतरीन एक्टिंग की सराहना करना था. एक एक्टर होने के नाते, मैं जानता हूं कि उस विशेष दृश्य को उस तरह से निभाने में कितनी मेहनत लगती है, जिसके लिए मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं. मैंने हमेशा अपने देश की हर संस्कृति, परंपरा और आस्था का गहरा सम्मान किया है. अगर मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो मैं तहे दिल से माफी मांगता हूं.'
कौन हैं ‘कांतारा’ में दिखाए दैव?
बता दें, फिल्म ‘कांतारा’ में पंजुरली देवता के बारे में दिखाया गया है. पंजुरली भगवान विष्णु के वराह अवतार को कहा जाता है, लेकिन दक्षिण कर्नाटक या टुलूनाडु इलाके की इस दंतकथा का कनेक्शन असल में भगवान शिव से है. कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में पंजुरली देवता को पूजा जाता है. माना जाता है कि पंजुरली देवता उनकी रक्षा करते हैं. इन इलाकों में दैव 'भूत कोला' नाम से एक त्योहार मनाया जाता है. इस दौरान जिन लोगों में दैव आते हैं वो पंजुरली देवता की वेशभूषा में नाचते हैं.
कौन हैं चावुंडी दैव?
वहीं, 'कांतारा चैप्टर 1' (Kantara Chapter 1) में चावुंडी दैव्य के बारे में भी दिखाया गया है. इन्हीं की नकल करने की वजह से रणवीर सिंह विवादों में आए थे. दरअसल, 'भूत कोला' की दैवीय नृत्य परंपरा में चावुंडी का नाम बड़े ही आदर से लिया जाता है. हालांकि चावुंडी दैव सिर्फ कहानी या नृत्य परंपरा का पात्र नहीं है, बल्कि न्याय करने वाली जीवित शक्ति मानी जाती हैं. यही वजह है कि जब दैव-परंपरा को नृत्य के तौर पर देखा जाता है, तो स्थानीय समाज में असहजता पैदा होती है. पंजुरली देवता, चावुंडी दैव के अलावा, रक्षा करने वालों में दो गुलिगा और एक हुली दैव भी हैं. इन्हीं दैवों के बारे मे फिल्म में दिखाया गया है.
कई विवादों में घिर चुके हैं रणवीर
रणवीर सिंह की बात करे तो ऐसा पहली बार नहीं है जब वो विवादों पर फंसे हो. इससे पहले वे एआईबी, न्यूड फोटोशूट जैसे विवादों में आ चुके हैं. करीब 12 साल पहले ‘AIB नॉकआउट’ रोस्ट शो को लेकर भी विवादों में घिरे थे. उन्होंने शो में कई अश्लील शब्दों और डबल मीनिंग कमेंट्स किए. इसके बाद साल 2022 में रणवीर सिंह न्यूड फोटोशूट की वजह से ट्रोल हुई थे. इसे लेकर उनके खिलाफ कई पुलिस शिकायतें दर्ज हुई थीं. वहीं, हाल ही में डॉन 3 फिल्म की वजह से चर्चा में हैं और उन्हें FWICE ने बॉलीवुड से बैन किया है, क्योंकि एक्टर ने ऐन वक्त पर फिल्म करने से मना कर दिया था.
रणवीर सिंह का वर्कफ्रंट
रणवीर सिंह के वर्कफ्रंट की बात करे तो कुछ समय पहले ही एक्टर को फिल्म धुरंधर और धुरंधर 2 (Dhurandhar) देखा गया था. आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने कई बड़े-बड़े रिकॉर्ड तोड़ डाले थे. इस फिल्म ने रणवीर सिंह को बॉलीवुड में एक नई पहचान भी दिलाई. वहीं, अब रणवीर की अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के बारे में बात करे तो खबरें हैं कि एक्टर जय मेहता की एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'प्रलय' में नजर आने वाले हैं. इसके अलावा रणवीर अपनी पर्सनल लाइफ में भी बिजी चल रहे हैं, क्योंकि वो जल्द ही दूसरी बार पिता बनने वाले हैं.
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पश्चिम बंगाल: कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व अधीक्षक के खिलाफ जांच के आदेश
कोलकाता, 27 मई (आईएएनएस)। कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के अधीक्षक पद से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने अब डॉ. अंजन अधिकारी के खिलाफ लापरवाही के कई आरोपों को लेकर विभागीय जांच का आदेश दिया है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बुधवार सुबह बताया कि यह आदेश मंगलवार रात को जारी किया गया था। फिलहाल उनका तबादला हो चुका है और वे उत्तरी बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में स्थित रायगंज सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कार्यरत हैं। राज्य विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता संभालने के बाद नई सरकार द्वारा राज्य में किया गया यह पहला बड़ा तबादला था।
कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भारत का सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल है, जिसकी स्थापना 28 जनवरी, 1835 को लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने की थी।
स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश में कहा कि कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट-सह-वाइस प्रिंसिपल के तौर पर कार्य करते हुए डॉ. अंजन अधिकारी पर गंभीर लापरवाही, कर्तव्य में कोताही और प्रशासनिक चूक के आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद सरकार ने उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का फैसला किया।
विभागीय जांच का आदेश जारी होने के साथ ही कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व अधीक्षक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
सोमवार को राज्य सरकार ने डॉ. अधिकारी को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के अधीक्षक पद से हटा दिया और उनका तबादला रायगंज सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कर दिया। यह कार्रवाई उन आरोपों के बाद की गई, जिनमें कहा गया था कि अस्पताल प्रणाली के भीतर सक्रिय दलाल सिंडिकेट द्वारा मरीजों को परेशान किया जा रहा था।
पदभार संभालने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूरे राज्य के सरकारी अस्पतालों में रेफरल कल्चर (मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने की प्रथा) के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की थी।
15 मई को उन्होंने एसएसकेएम अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, 12 मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों और प्राचार्यों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि मरीजों की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अगर कम से कम कुछ बेड भी उपलब्ध हों, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए।
हालांकि, इस तरह की चेतावनी के बावजूद यह आरोप लगे कि मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा था। इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. अधिकारी को उनके पद से हटा दिया।
--आईएएनएस
पीएसके/एएस
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