जो टीम IPL 2026 में सबसे अधिक दिनों तक टेबल टॉपर रही, वही प्लेऑफ के लिए नहीं कर पाई क्वालीफाई
AMOUNT OF DAYS AS TABLE TOPPERS IN IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 की लीग स्टेज के मुकाबले खत्म हो चुके हैं. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स की टीमें प्लेऑफ में पहुंच चुकी हैं. अब 26 मई से प्लेऑफ के मुकाबले खेले जाएंगे, जिसमें पहला क्वालीफायर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाने वाला है. इस मुकाबले पर सभी की नजरें टिकी होंगी. मगर, क्या आपको मालूम है कि आईपीएल 2026 की लीग स्टेज पर जो टीम सबसे अधिक वक्त तक टेबल टॉपर रही, लेकिन वो टीम प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी...
22 दिन तक टेबल टॉपर रहने वाली टीम नहीं कर पाई प्लेऑफ में क्वालीफाई
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 की लीग स्टेज पर 70 मुकाबले खेले गए, जो 58 दिनों में हुए. सीजन की शुरुआत 28 मार्च को हुई थी और आखिरी लीग मैच 24 मई को खेला गया. ऐसे में 58 दिनों में से जिस टीम ने सबसे अधिक वक्त तक अंक तालिका पर राज किया, वो कोई और नहीं बल्कि श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली पंजाब किंग्स की टीम है. जी हां, पंजाब ने अंक तालिका में सबसे अधिक दिनों तक पहले स्थान पर राज किया. PBKS 22 दिनों तक टेबल टॉपर रही.
वहीं, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 18 दिन, रास्थान रॉयल्स 13 दिन, सनराइजर्स हैदराबाद 4 दिन और गुजरात टाइटंस एक दिन अंक तालिका में नंबर-1 पर रही. हालांकि, इन चारों टीमों ने प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई किया है.
शुरुआती 7 मैचों में एक मैच भी नहीं जीती PBKS
आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में हुई थी. फ्रेंचाइजी ने बैक टू बैक जीत दर्ज की थीं और शुरुआती 7 मैचों तक पंजाब को एक भी मैच में हार नहीं मिली थी. 7 में से टीम ने 6 मैच जीते थे और एक मैच बारिश में धुल गया था. मगर, फिर पंजाब किंग्स की गाड़ी जीत की पटरी से उतर गई और फिर टीम एक के बाद एक 6 मुकाबले हार गई. जी हां, पंजाब को 6 मैचों में लगातार हार का सामना करना पड़ा, जिसका नतीजा ये रहा कि पंजाब किंग्स की टीम प्लेऑफ की रेस से बाहर हो गई.
AMOUNT OF DAYS AS TABLE TOPPERS IN IPL 2026. [IPL Website]
— Johns. (@CricCrazyJohns) May 25, 2026
Punjab Kings - 22
Royal Challengers Bengaluru - 18
Rajasthan Royals - 13
Sunrisers Hyderabad - 4
Gujarat Titans - 1 pic.twitter.com/mM30y6mbnq
पंजाब किंग्स ने आखिरी लीग में दर्ज की जीत
पंजाब किंग्स की टीम लगातार 6 मैच हारने के बाद आखिरी लीग मैच लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ खेलने उतरी. इकाना स्टेडियम में खेले गए इस मैच में श्रेयस अय्यर की शतकीय पारी की बदौलत पंजाब ने 15 अंक के साथ मुकाबले को जीता और प्लेऑफ की दावेदारी पेश की थी.
मगर, फिर राजस्थान रॉयल्स ने आखिरी लीग मैच में जीत दर्ज की और 16 अंक के साथ प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर लिया. नतीजन, पंजाब की टीम टॉप-4 में नहीं पहुंच सकी और लीग स्टेज से ही बाहर हो गई. जबकि शुरुआत में इस टीम ने इतना शानदार खेल दिखाया था कि सभी को लग रहा था कि पंजाब किंग्स सबसे पहले प्लेऑफ में क्वालीफाई करेगी.
IPL 2026 की अपडेट प्वॉइंट्स टेबल
| रैंक | टीम | मैच | जीत | हार | NRR | अंक |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | RCB | 14 | 9 | 5 | +0.783 | 18 |
| 2 | GT | 14 | 9 | 5 | +0.695 | 18 |
| 3 | SRH | 14 | 9 | 5 | +0.524 | 18 |
| 4 | RR | 14 | 8 | 6 | +0.189 | 16 |
| 5 | PBKS | 14 | 7 | 6 | +0.309 | 15 |
| 6 | DC | 14 | 7 | 7 | -0.651 | 14 |
| 7 | KKR | 14 | 6 | 7 | -0.147 | 13 |
| 8 | CSK | 14 | 6 | 8 | -0.345 | 12 |
| 9 | MI | 14 | 4 | 10 | -0.584 | 8 |
| 10 | LSG | 14 | 4 | 10 | -0.751 | 8 |
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हाई-रिस्क डिलीवरी और नवजात शिशु केयर में भी सहारा बनी 'मुख्यमंत्री सेहत योजना', सैकड़ों बच्चों को मिला जीवनदान
Punjab News: पंजाब की भगवंत मान सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' ने राज्य के हजारों परिवारों का जीवन बदल दिया. इस योजना से लाखों लोगों को मुफ्त इलाज मिल चुका है. यही नहीं इस योजना ने हाई-रिस्क डिलीवरी और नवजात शिशु देखभाल में भी मदद दी है. इस योजना के तहत राज्य में 25 मई तक 5,300 से अधिक हाई-रिस्क सिजेरियन डिलीवरी और 2,000 से अधिक नवजात देखभाल मामलों में कैशलेस इलाज मिल चुका है.
बता दें कि भगवंत मान सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के माध्यम से हाई-रिस्क गर्भावस्था एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है. इस योजना के जरिए जटिल प्रसव और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का भी इलाज हो रहा है. जिससे इन परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से राहत मिली है.
भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5) पर आधारित एक महत्वपूर्म अध्ययन के मुताबिक, देश में लगभग हर दो में से एक गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती है. ये परिस्थितियां शिक्षा का अभाव, गरीबी, दो गर्भधारण के बीच कम अंतराल, पूर्व प्रसव जटिलताएं तथा पहले हुए सिजेरियन ऑपरेशन मां और शिशु दोनों के लिए रिस्क पैदा करते हैं. शोधकर्ताओं की मानें तो सामाजिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों की महिलाएं सबसे अधिक रिस्क का सामना करती हैं. ऐसे में पता चलता है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों को और मज़बूत करने की जरूरत है.
महिलाओं के लिए सहारा बना सेहत कार्ड
बता दें कि सेहत-कार्ड ऐसी महिाओं के लिए सहारा बन गया है जिन्हें प्रसव के दौरान लंबे समय तक प्रसव पीड़ा, स्वास्थ्य समस्याएं, भ्रूण की अस्वस्थ स्थिति या पूर्व सिजेरियन डिलीवरी की समस्याओं के कारण ऑपरेशन संबंधी चिकित्सा की आवश्यकता पड़ती है. इसके साथ ही राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 25 मई, 2026 तक इस योजना के तहत मातृत्व एवं नवजात देखभाल के कुल 7300 मामलों में इलाज मिल चुका है. जिन पर करीब 7.04 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इनमें 5,300 हाई-रिस्क सिजेरियन डिलीवरी के मामले भी शामिल हैं. जिन पर 6.37 करोड़ रुपये का खर्च आया है. यह आंकड़ा पंजाब में हाई-रिस्क गर्भावस्था और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं में योजना की बढ़ती भूमिका को भी दिखाता है.
पटियाला की दीपिका की भी हुई मुख्यमंत्री सेहत योजना से मदद
इस योजना से लाखों लोगों को इलाज मिल चुका है. पटियाला की रहने वाली 28 वर्षीय दीपिका भी उन महिलाओं में शामिल हैं जिन्हें गर्भावस्था के दौरान एनीमिया सहित कई जटिलताओं का सामना करना पड़ा. ऐसे में मुख्यमंत्री सेहत योजना उनके लिए भी जीवनदान बन गई. इस योजना के तहत सिजेरियन ऑपरेशन सेहत-कार्ड के तहत उनका इलाज पूरी तरह से कैशलेस हुआ. दीपिका के पति मनोज कहते हैं कि पूरा इलाज बिना किसी आर्थिक बोझ के पूरा हो गया. जो उनके लिए राहत की बात है.
इसी तरह दीक्षा सोनकर (31) ने अपने तीसरे बच्चे के जन्म के दौरान 'पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़' अस्पताल में समय पर मातृत्व एवं नवजात देखभाल प्राप्त की, जहां पूरा इलाज योजना के तहत कैशलेस किया गया. उनके पति विकास सोनकर का कहना है कि, "हमारी पहले से दो बेटियां हैं और हम चिंतित थे कि तीसरी डिलीवरी में कोई परेशानी न हो."
विकास कहते हैं कि, "जब भी मेडिकल इमरजेंसी आती है, तो हम जैसे परिवारों के लिए यह एक चिंता का विषय होता है." विकास दैनिक मज़दूरी करते हैं ऐसे में उनका कहना है कि इसलिए हमें ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़ते हैं; जो इस कठोर वास्तविकता को दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं का ख़र्च उठाने के लिए निम्न-आय वर्ग के श्रमिकों को किस प्रकार संघर्ष करना पड़ता है. उन्होंने कहा, "लेकिन, सेहत कार्ड के कारण इस बार पूरा इलाज बिना किसी चिंता के हो गया."
गंभीर रूप से बीमार नवजातों को मिला जीवनदान
बता दें कि मातृत्व सेवाओं के साथ-साथ यह योजना गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं के लिए स्पेशल ट्रीटमेंट भी उपलब्ध कराती है. राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत विभिन्न पैकेजों में कुल 2,094 नवजात शिशुओं का उपचार हो चुका है. बेसिक नियोनेटल केयर, जो उन शिशुओं को सहायता प्रदान करती है जिनका उपचार उनकी माताओं के साथ-साथ किया जाता है. जिसके तहत 881 नवजातों का इलाज हो चुका है. जिसपर 5.82 लाख रुपये खर्च हुए हैं.
वहीं अल्प अवधि के इंटेंसिव केयर यूनिट उपचार की जरूरत वाले 777 नवजात बच्चों को भी स्पेशल नियोनेटल केयर पैकेज के तहत इलाज किया गया है. जिस पर 28.27 लाख रुपये का खर्च आया है. जबकि इंटेंसिव नियोनेटल केयर पैकेज के अंतर्गत 207 नवजातों को कन्टीन्यूअस पॉज़िटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सपोर्ट, 24 घंटे से कम वेंटिलेशन तथा नवजात संक्रमण जैसी गंभीर स्थितियों के उपचार हेतु सहायता दी गई. जिस पर कुल 15.65 लाख रुपये खर्च किए गए हैं.
वेंटिलेटर से लेकर एडवांस्ड नियोनेटल केयर तक मिला लाभ
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1,200 से 1,499 ग्राम वजन वाले अथवा लंबे समय तक वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता वाले 116 अत्यंत संवेदनशील नवजातों को एडवांस्ड नियोनेटल केयर प्रदान की गई, जिस पर 9.30 लाख रुपये खर्च किए गए हैं. यही नहीं समयपूर्व जन्म, बहु-अंग जटिलताओं या गंभीर चिकित्सीय अस्थिरता से जूझ रहे 64 नवजात बच्चों को क्रिटिकल नियोनेटल केयर उपलब्ध कराया गाय है. जिस पर 7.88 लाख रुपये का खर्च आया है. इसके अलावा,18 नवजात बच्चों को दीर्घकालिक क्रॉनिक नियोनेटल केयर में मदद मिली है.
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इसके साथ ही दीर्घकालिक नवजात देखभाल के तहत 17 शिशुओं का इलाज हुआ है. जिस पर 56 हजार रुपये का खर्च आया है. ये नवजात बच्चे ब्रोंकोपल्मोनरी डिस्प्लेसिया और नेक्रोटाइजिंग एंटेरोकोलाइटिस जैसी गंभीर स्थितियों से जूझ रहे थे. बता दें कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक करीब 44.8 लाख रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं.
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