वावरिंका ने इमोशनल होकर फ्रेंच ओपन को अलविदा कहा:पहले दौर में हारे; 19 साल के राफेल जोदार ने डेब्यू मैच में सुर्खियां बटोरी
स्विट्जरलैंड के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी स्टेन वावरिंका ने सोमवार को पहले दौर में हार के साथ फ्रेंच ओपन को भावुक विदाई दी। 41 साल के वावरिंका पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे इस सत्र के अंत में संन्यास ले लेंगे। उन्हें नीदरलैंड के जेस्पर डी जोंग ने 6-3, 3-6, 6-3, 6-4 से हराया। वहीं, 19 साल के स्पेनिश स्टार राफेल जोदार ने डेब्यू में सबका ध्यान खींचा। उन्होंने अलेक्जेंडर कोवाचेविच को 6-1, 6-0, 6-4 से हराया। जोदार ने पूरे मैच में सिर्फ पांच गेम गंवाए। फ्रेंच ओपन डेब्यू में इससे कम गेम नोवाक जोकोविच ने 2005 में गंवाए थे। विमेंस सिंगल्स में चार बार की चैंपियन और वर्ल्ड नंबर-3 इगा स्वियातेक ने पहले दौर में डेब्यू कर रहीं इमर्सन जोन्स को 6-1, 6-2 से हराया। उन्हें दाएं हाथ की उंगली के छाले के लिए ट्रेनर की मदद लेनी पड़ी। जेस्पर ने सम्मान में तालियां बजवाई, वावरिंका बोले- टेनिस छोड़ना आसान नहीं जोदार ने पिछले 19 में से 16 मैच जीते राफल जोदार ने पिछले 19 में से 16 मैच जीते हैं। वे एक साल पहले तक ATP रैंकिंग में 707वें स्थान पर थे। अब दुनिया के 29वें नंबर के खिलाड़ी हैं। उन्हें यहां 27वीं वरीयता मिली है। स्वियातेक की आसान जीत, नडाल के कोच से ट्रेनिंग ले रहीं महिला वर्ग में चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक ने इमर्सन जोन्स को 6-1, 6-2 से हराकर दूसरे दौर में जगह बनाई। हालांकि मैच के दौरान उन्हें दाहिने हाथ की उंगली में परेशानी के कारण मेडिकल सहायता लेनी पड़ी। हाल ही में स्वियातेक ने राफेल नडाल के साथ काम कर चुके फ्रांसिस्को रोइग को अपने जोड़ा है। उन्होंने कहा कि लगातार खिताब जीतने के बाद उम्मीदें बढ़ जाती हैं। इसलिए विनम्र रहना और हर मैच को नए सिरे से खेलना जरूरी होता है।
भारतीय शेयर बाजार को ताइवान ने पीछे छोड़ा:AI और चिप सेक्टर में तेजी से मार्केट कैप ₹415 लाख करोड़ पार, भारत की वैल्यू ₹413 लाख करोड़
ताइवान ने शेयर बाजार की वैल्यू (मार्केट कैप) के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में दुनिया की सबसे बड़ी चिपमेकर कंपनी 'ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी' (TSMC) के शेयरों में आई भारी तेजी ने ताइवान को यह बढ़त दिलाई है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सोमवार तक ताइवान का मार्केट कैप 4.95 ट्रिलियन डॉलर (करीब 415 लाख करोड़ रुपए) पहुंच गया, जबकि भारत की वैल्यू गिरकर 4.92 ट्रिलियन डॉलर (करीब 413 लाख करोड़ रुपए) रह गई है। अब दुनिया के टॉप-5 शेयर बाजारों में अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद ताइवान का नाम शामिल हो गया है। ताइवान की जीत के पीछे चिप कंपनी का हाथ ताइवान के शेयर बाजार की इस छलांग की सबसे बड़ी वजह TSMC कंपनी है। ताइवान के मुख्य इंडेक्स में इस अकेले कंपनी की 42% हिस्सेदारी है। इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में 49% की बढ़त दर्ज की गई है। पूरी दुनिया में AI तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर्स (चिप्स) की सप्लाई में इस कंपनी का दबदबा है, जिसका फायदा ताइवान के बाजार को मिल रहा है। नए नियमों ने ताइवान को दिया बूस्ट हाल ही में ताइवान के रेगुलेटर ने निवेश के नियमों में ढील दी है। अब घरेलू फंड किसी एक बड़ी कंपनी में अपनी नेट एसेट का 25% तक निवेश कर सकते हैं, पहले यह सीमा सिर्फ 10% थी। अभी सिर्फ TSMC ही इस मापदंड को पूरा करती है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक, इस बदलाव से ताइवान के बाजार में 6 अरब डॉलर (करीब 50 हजार करोड़ रुपए) का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। विदेशी निवेशकों ने भारत से ₹2 लाख करोड़ निकाले भारतीय शेयर बाजार के लिए यह साल चुनौतीपूर्ण रहा है। इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 24 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपए) निकाले हैं। इसकी मुख्य वजह भारतीय शेयरों की ऊंची वैल्यूएशन और रुपए की कमजोरी रही है। इसके उलट, निवेशक ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे उन बाजारों में पैसा लगा रहे हैं जो सीधे तौर पर AI हार्डवेयर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं। इन 3 कारणों से पिछड़ा भारतीय बाजार अर्थव्यवस्था के मामले में अब भी भारत काफी आगे शेयर बाजार की वैल्यू में भले ही ताइवान आगे निकल गया हो, लेकिन अर्थव्यवस्था के कुल आकार (GDP) में भारत का दबदबा बरकरार है। IMF के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी 4.15 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि ताइवान की GDP महज 977 बिलियन डॉलर है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। मार्केट कैप क्या होता है? किसी भी देश के शेयर बाजार की 'मार्केट कैपिटलाइजेशन' का मतलब वहां की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल कीमत होती है। अगर किसी देश का मार्केट कैप बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि वहां की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।
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