गिग वर्कर्स एनपीएस में 99 रुपए के छोटे योगदान से शुरू कर सकते हैं निवेश, रिटायरमेंट फंड बनाने में मिलेगी मदद
जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और अर्बन कंपनी जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ काम करने वाले गिग वर्कर्स के लिए खुशखबरी है. अब वे भी केवल 99 रुपए के छोटे से योगदान से शुरुआत कर नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के जरिए रिटायरमेंट के लिए फंड बना पाएंगे. यह जानकारी बुधवार को पीएफआरडीए की ओर से दी गई.
99 रुपए से शुरू कर सकते हैं निवेश
एनपीएस का प्रबंधन करने वाली सरकारी एजेंसी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एनपीएस फ्रेमवर्क के लचीलेपन के बारे में बताया. रेगुलेटर ने कहा कि वर्कर्स 99 रुपए से योगदान शुरू कर सकते हैं और अपनी गति से निवेश जारी रख सकते हैं, क्योंकि इसमें योगदान की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा तय नहीं है.
पोस्ट में आगे कहा गया कि आपका काम बेशक, आपकी अगली बुकिंग पर निर्भर करता है, लेकिन आपका रिटायरमेंट नहीं. साथ ही लिखा कि प्लेटफर्म वर्कर्स एनपीएस के तहत केवल 99 रुपए के योगदान से शुरुआत कर सकते हैं. इसमें अधिकतम या न्यूनतम योगदान की कोई सीमा नहीं है.
अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था एनपीएस ई-श्रमिक मॉडल
एनपीएस ई-श्रमिक (प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर) मॉडल को पीएफआरडीए ने 29 अक्टूबर, 2025 के एक सर्कुलर के जरिए शुरू किया था, ताकि गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को एनपीएस फ्रेमवर्क के दायरे में लाया जा सके. यह मॉडल उन लोगों के लिए है जो सर्विस कॉन्ट्रैक्ट के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स को सेवाएं देते हैं.
प्लेटफॉर्म और वर्कर मिलकर कर सकते हैं योगदान
इस फ्रेमवर्क के तहत, योगदान प्लेटफॉर्म और वर्कर मिलकर कर सकते हैं, सिर्फ वर्कर कर सकता है, या फिर वर्कर की ओर से पूरी तरह से प्लेटफॉर्म या एग्रीगेटर कर सकता है. हालांकि, पीएफआरडीए ने योगदान की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा तय नहीं की है, लेकिन वर्कर और प्लेटफॉर्म आपसी सहमति से हर योगदान के लिए न्यूनतम राशि तय कर सकते हैं.
एनपीएस कॉर्पोरेट मॉडल जैसा है फ्रेमवर्क
यह मॉडल मोटे तौर पर एनपीएस कॉर्पोरेट मॉडल जैसा ही है, लेकिन इसे खास तौर पर प्लेटफॉर्म वर्करों के लिए बनाया गया है. अहम बात यह है कि प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर्स को पीएफआरडीए के साथ अलग से रजिस्टर करने की जरूरत नहीं है. इसके बजाय, एनपीएस अकाउंट खोलने और उससे जुड़ी सेवाएं देने वाले 'पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस' (पीओपी) अपने वर्करों को एनरोल करने के लिए एग्रीगेटर्स के साथ समझौता कर सकते हैं.
दो चरणों में होगी ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया
ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है. पहले चरण में, वर्कर की केवासी जानकारी - जैसे नाम, पता, पेन, मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट की जानकारी - इकट्ठा की जाती है. केवाईसी को आधार-आधारित ई-केवाईसी या पीएफआरडीए द्वारा मंजूर किसी अन्य तरीके से पूरा किया जा सकता है.
वर्कर को मिलेगा निवेश विकल्प बदलने का अधिकार
वर्कर की सहमति मिलने के बाद, एक 'परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर' जेनरेट किया जाता है. शुरुआती चरण में, प्लेटफॉर्म वर्कर के लिए इन्वेस्टमेंट स्कीम और पेंशन फंड चुन सकता है. हालांकि, अकाउंट खुलने के बाद वर्कर के पास इन विकल्पों को बदलने का अधिकार होता है.
(DISCLAIMER: समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
रेलवन ऐप के 4.76 करोड़ डाउनलोड्स का आंकड़ा पार हुआ, प्रतिदिन औसतन 10 लाख टिकट बुकिंग का रिकॉर्ड बना
Railone App: आरक्षित और अनारक्षित टिकटों की डिजिटल खरीद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेलवे ने 1 जुलाई, 2025 को रेलवन रेलवन ऐप लॉन्च किया है. यह ऐप यात्रियों को मोबाइल फोन पर आरक्षित और अनारक्षित टिकट बुक करने की सुविधा देता है. यह ऐप भारतीय रेलवे की सभी सार्वजनिक सेवाओं जैसे आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट, ट्रेन पूछताछ, पीएनआर पूछताछ, रेल सहायता आदि को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है.
इससे यात्री आरक्षण प्रणाली की सुविधा यात्रियों की उंगलियों पर आ जाती है. ऐप सिंगल-साइन-ऑन (एसएसओ) सुविधा के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को कई सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाता है, जिससे रेलवे के कई एप्लिकेशन डाउनलोड करने और कई पासवर्ड याद रखने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है.
राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली से मिलती है रियल टाइम जानकारी
वर्ष 2000 में शुरू की गई राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली (एनटीईएस) यात्रियों को लगभग वास्तविक समय में ट्रेनों की जानकारी प्रदान करती है, जिसमें आगमन/प्रस्थान की स्थिति और ट्रेन कार्यक्रम शामिल हैं. यह जानकारी पूछताछ काउंटरों, एनटीईएस वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन (एंड्रॉइड और आईओएस) और राष्ट्रव्यापी रेल पूछताछ संख्या 139 जैसे विभिन्न माध्यमों से उपलब्ध है. इसकी प्रमुख विशेषताओं में 'अपनी ट्रेन ढूंढें', 'लाइव स्टेशन', 'ट्रेन कार्यक्रम' और 'स्टेशनों के बीच ट्रेनें' शामिल हैं, जिससे यात्री आसानी से प्रामाणिक और विश्वसनीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
एनटीईएस मोबाइल एप्लिकेशन अक्टूबर 2014 (एंड्रॉइड) और अक्टूबर 2015 (आईओएस) में लॉन्च किया गया था, जिसने 1 अगसत, 2026 तक एंड्रॉइड पर 4.5 करोड़ से अधिक और आईओएस पर 16 लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज किए हैं. एनटीईएस वर्तमान में लगभग 80,000 उपयोगकर्ताओं को संभालता है और प्रतिदिन 6 करोड़ से अधिक पूछताछों का निषपादन करता है. यात्रियों द्वारा इसकी व्यापक रूप से सराहना की गई है.
पूछताछ काउंटरों पर कम हुई यात्रियों की निर्भरता
राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (एनटीईएस) की शुरुआत से यात्रियों को वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन और रेल पूछताछ संख्या 139 सहित कई डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से ट्रेनों के संचालन की सटीक और लगभग वास्तविक समय की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती है. इससे रेलवे पूछताछ काउंटरों पर जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो गई है. परिणामस्वरूप पूछताछ काउंटरों पर लगने वाली कतारें और प्रतीक्षा समय कम हो गया है.
ट्रेन रद्द होने पर ऑनलाइन टिकट का ऑटोमेटिक रिफंड
ट्रेन रद्द होने की स्थिति में ऑनलाइन ई-टिकटिंग सिस्टम एनजीईटी (नेक्स्ट जनरेशन ई-टिकटिंग) ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय के तुरंत बाद स्वतः ही रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर देता है और लागू रिफंड यात्री के बैंक खाते में जमा कर दिया जाता है. ट्रेन रद्द होने से संबंधित स्वचालित रिफंड की सुविधा फिलहाल केवल ऑनलाइन बुक किए गए ई-टिकटों के लिए उपलब्ध है और काउंटर टिकटों के लिए उपलब्ध नहीं है. ऐसे मामलों में काउंटर टिकटधारक यात्री को निकटतम पीआरएस काउंटर पर जाना होगा.
एक ही ऐप पर रेलवे की कई सुविधाएं
रेलवन भारतीय रेलवे का आधिकारिक ऐप है, जो आईआर की सभी सार्वजनिक सेवाओं के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है. यह एक ही मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आरक्षित, अनारक्षित और प्लेटफॉर्म टिकट बुकिंग, यात्रा योजना, ट्रेन की जानकारी, यात्री सहायता और संबद्ध रेलवे सेवाएं प्रदान करता है.
ऑनलाइन टिकट बुकिंग में लगातार बढ़ोतरी
वर्तमान में आरक्षित टिकटों में से लगभग 89 प्रतिशत ऑनलाइन बुक किए जाते हैं, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा लगभग 49 प्रतिशत था. काउंटर के अलावा अन्य माध्यमों से बुक किए गए अनारक्षित टिकटों की संख्या बढ़कर लगभग 39 प्रतिशत हो गई है. केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना और प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी.
यह भी पढ़ें: Indian Railways: रेलवे जल्द ही IRCTC वेबसाइट का बीटा वर्शन लॉन्च करेगा
(DISCLAIMER: समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
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