शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ती भागीदारी के बीच अब सेबी ने डेरिवेटिव कारोबार को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है। सेबी ने विकल्प कारोबार में स्ट्राइक प्राइस को लेकर एक नया और लचीला ढांचा लागू करने का सुझाव दिया है, जिससे तेज उतार-चढ़ाव वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों और कारोबारियों को राहत मिल सके।
मौजूद जानकारी के अनुसार सेबी ने सोमवार को जारी एक परामर्श पत्र में कहा कि एक्सचेंजों को कारोबार के दौरान ही नए स्ट्राइक प्राइस जोड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसका मकसद खासतौर पर तेजी से बढ़ रहे सूचकांक विकल्प कारोबार में हेजिंग को आसान बनाना और बाजार में रुकावट कम करना है।
बता दें कि स्ट्राइक प्राइस वह तय स्तर होता है जिस पर कोई कारोबारी विकल्प अनुबंध के तहत किसी शेयर या सूचकांक को खरीद या बेच सकता है। बाजार में सही और पर्याप्त स्ट्राइक प्राइस उपलब्ध होना विकल्प कारोबार के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक सभी एक्सचेंजों को विकल्प अनुबंधों के निर्माण और प्रबंधन के लिए स्पष्ट नियम बनाने होंगे। इसके तहत बाजार भाव के आसपास पर्याप्त इन-द-मनी और आउट-ऑफ-द-मनी स्ट्राइक प्राइस बनाए रखना जरूरी होगा। साथ ही रोजाना समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बाजार से बहुत दूर के और कम उपयोग वाले अनुबंधों को हटाया जा सके।
गौरतलब है कि कई बार बाजार में अचानक बड़ी तेजी या गिरावट आने पर उपलब्ध स्ट्राइक प्राइस कम पड़ जाते हैं। ऐसे में कारोबारियों को नई स्थिति के हिसाब से सौदे करने में दिक्कत होती है। सेबी का मानना है कि अगर कारोबारी घंटों के दौरान ही नए स्ट्राइक प्राइस जोड़े जाएं, तो बाजार में सुचारु कारोबार जारी रह सके।
सेबी ने यह भी साफ किया है कि इस व्यवस्था के लागू होने पर दलाल कंपनियों और निवेशकों को अपने सिस्टम में लाइव कारोबार के दौरान किसी तरह का बदलाव नहीं करना पड़ेगा। इससे कारोबार की निरंतरता बनी रहेगी और तकनीकी बाधाएं कम होंगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में डेरिवेटिव कारोबार खासकर सूचकांक विकल्प खंड में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में बाजार की जरूरतों के मुताबिक लचीले नियम लाना जरूरी हो गया था। माना जा रहा है कि इस कदम से छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को बेहतर कारोबार का माहौल मिल सके है।
सेबी ने इस प्रस्ताव पर आम लोगों और बाजार से जुड़े पक्षों से सुझाव भी मांगे हैं। आने वाले समय में सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम लागू किए जा सकते है।
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सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए शानदार रही। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के चलते सोमवार को निवेशकों का भरोसा मजबूत नजर आया। इसका असर यह हुआ कि बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों में एक प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार बीएसई का तीस शेयरों वाला सेंसेक्स 1073.61 अंक यानी 1.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,488.96 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 76,559.07 अंक का उच्च स्तर भी छुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 312.40 अंक यानी 1.32 प्रतिशत चढ़कर 24,031.70 अंक पर बंद हुआ है।
बाजार में तेजी का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट को माना जा रहा है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड करीब 5.52 प्रतिशत टूटकर 97.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलती है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में प्रगति की खबरों ने भी बाजार को मजबूती दी। बताया जा रहा है कि अमेरिका, ईरान के साथ होरमुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, हालांकि अमेरिका किसी खराब समझौते को स्वीकार नहीं करेगा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से वैश्विक निवेश माहौल बेहतर हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया से जुड़ी परिस्थितियां तेजी से बदलती रहती हैं, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत भी बनी हुई है।
सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एचडीएफसी बैंक, इटरनल, बजाज फिनसर्व और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर सबसे ज्यादा बढ़त में रहे। वहीं इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, सन फार्मा और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली है।
एशियाई बाजारों की बात करें तो जापान का निक्केई और चीन का शंघाई सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुआ। दक्षिण कोरिया और हांगकांग के बाजार अवकाश के कारण बंद रहे। वहीं यूरोपीय बाजारों में भी तेजी का माहौल देखने को मिला है।
बता दें कि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार से करीब 4440.47 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी और वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में तेजी बनी रही है।
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