Moradabad Murder Case: पहले करंट से तड़पाया… नहीं मरा तो दिया जहर, पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति को दी खौफनाक मौत
Moradabad Murder Case: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक युवक की कथित तौर पर उसकी पत्नी और उसके प्रेमी ने मिलकर हत्या कर दी. मृतक की पहचान पवन ठाकुर के रूप में हुई है. पवन की शादी साल 2020 में संभल की रहने वाली आंचल से हुई थी. दोनों की एक छोटी बेटी भी है. पुलिस जांच में बिजली का करंट और जहर देकर हत्या किए जाने की बात सामने आई है.
दो साल से चल रहा था प्रेम संबंध
जानकारी के मुताबिक, करीब दो साल पहले आंचल का अपने भतीजे अंकित के साथ प्रेम संबंध शुरू हुआ. इस बात की जानकारी पवन को भी हो गई थी. इसके बाद पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होने लगा. पवन ने कई बार पत्नी को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी. पवन को अपनी जान का खतरा भी महसूस होने लगा था. उसने अपनी बहनों से कहा था कि अगर उसकी मौत हो जाए तो उसे आत्महत्या न माना जाए.
बिजली का करंट और जहर देने का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया कि आंचल, उसकी बहन शिखा, प्रेमी अंकित और एक अन्य अजय ने मिलकर हत्या की साजिश रची. आरोप है कि पवन को चारपाई से बांधकर बिजली का करंट दिया गया. जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तो उसे जहर भी दिया गया. बाद में उसकी मौत हो गई.
पूछताछ में खुला पूरा मामला
अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. शव पर चोट और करंट के निशान मिले. पूछताछ में पत्नी आंचल ने हत्या की साजिश कबूल कर ली. फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.
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तेल की बढ़ी कीमतों के बीच निर्मला सीतारमण ने दिया '3F' का महामंत्र, कहा- देना होगा इनपर ध्यान
Fuel Price Hike: पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है. तेल और गैस की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है. इस महासंकट के बीच भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश को आर्थिक मोर्चे पर सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा मंत्र दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि मौजूदा वैश्विक हालातों को देखते हुए भारत को तीन 'F' पर सबसे ज्यादा फोकस करने की जरूरत है. वित्त मंत्री के मुताबिक यह तीन 'F' यानी फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेन करेंसी रिजर्व (विदेशी मुद्रा भंडार) हैं, जिन पर अगर कड़ी नजर नहीं रखी गई तो देश के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.
सिडबी के कार्यक्रम में दी चेतावनी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह बातें मुंबई में स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) की 37वीं सालगिरह के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता विवाद वैश्विक बाजारों में भूचाल ला रहा है, जिससे भारत में भी लागत लगातार बढ़ती जा रही है. वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. पिछले 11 दिनों के भीतर ही देश में पेट्रोल और डीजल के दाम 4 बार बढ़ाए जा चुके हैं, जिसके कारण महज 11 दिनों में पेट्रोल 7.38 रुपये तक महंगा हो चुका है.
प्रधानमंत्री की अपील का किया समर्थन
अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में की गई अपील का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यह अपील इस संकट के समय में बहुत मायने रखती है. देश के पास मौजूद फॉरेक्स रिजर्व हमारी सबसे बड़ी ताकत है और इसे बचाना बेहद जरूरी है. सीतारमण ने बताया कि तेल की बढ़ती कीमतें तो इस बड़े संकट का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा हैं. इसके अलावा उर्वरकों की कीमतें भी ऐसे स्तर पर पहुंच गई हैं जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी. वहीं दूसरी ओर सोने की बढ़ती कीमतें भी भारत के लिए नई और बड़ी चुनौतियां पैदा कर रही हैं.
होर्मुज संकट और रुपये की कमजोरी
दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से पेट्रोल और डीजल की बचत करने और सोना न खरीदने की अपील की थी ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर ज्यादा दबाव न पड़े. होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे संकट की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतें आसमान छू रही हैं. इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर भारतीय रुपये की सेहत पर पड़ रहा है. यही वजह है कि विदेशी बाजार के दबाव में हाल ही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 97 रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया था.
जियो-पॉलिटिक्स से आगे बढ़ा नुकसान
वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मध्य-पूर्व के संकट का असर सिर्फ राजनीति या जियो-पॉलिटिक्स तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह उससे कहीं आगे तक जाता है. उन्होंने कहा कि आम व्यापारियों और जनता के लिए इस संकट का सीधा मतलब होता है ईंधन की ज्यादा कीमत चुकाना, सामान की डिलीवरी में देरी होना, जहाजों का किराया महंगा होना और इनपुट कॉस्ट का बढ़ जाना. इसके साथ ही एक्सपोर्ट के ऑर्डर मिलने में भी अनिश्चितता बढ़ जाती है. उन्होंने लोगों को सोचने पर मजबूर किया कि जब यह सारी परेशानियां एक साथ सामने आ जाएं तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है.
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का दावा
इन तमाम वैश्विक चुनौतियों के बाद भी वित्त मंत्री ने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें देश की अर्थव्यवस्था के गिरने की बात कही जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है. कुछ लोग नकारात्मक बातें करके देश के माहौल को ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जैसे सबकुछ बिखर रहा हो. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना निशाना साधा और कहा कि हमारे समाज में एक ऐसा तबका है जो बहुत जल्दी अपने ही देश के लोगों की उपलब्धियों की बुराई करने लगता है. आम लोग जो भी अच्छा काम करते हैं, उसे भुलाकर एक गलत कहानी गढ़ दी जाती है. उन्होंने कहा कि भारत इस समय डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता और हमें अपने शब्दों से जनता में आत्मविश्वास जगाना होगा.
सरकार को हुआ बड़ा रेवेन्यू लॉस
ईंधन की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बचाव करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने जनता को बड़ी राहत देने के लिए पहले ही अपने रेवेन्यू का बहुत बड़ा नुकसान उठाया है. पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती की वजह से सरकार को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है, ताकि कीमतें आम जनता के नियंत्रण से बाहर न जाएं. इसके अलावा उन्होंने एमएसएमई सेक्टर पर पड़ रहे दबाव का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 8.1 लाख करोड़ रुपये के बकाया भुगतानों में देरी होने से उद्योगों के वर्किंग कैपिटल पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे विकास की रफ्तार धीमी होती है. उन्होंने सरकारी बैंकों को निर्देश दिया कि एमएसएमई का पूरा बकाया 45 दिनों के भीतर चुकाया जाए.
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