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तेल की बढ़ी कीमतों के बीच निर्मला सीतारमण ने दिया '3F' का महामंत्र, कहा- देना होगा इनपर ध्यान

Fuel Price Hike: पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है. तेल और गैस की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है. इस महासंकट के बीच भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश को आर्थिक मोर्चे पर सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा मंत्र दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि मौजूदा वैश्विक हालातों को देखते हुए भारत को तीन 'F' पर सबसे ज्यादा फोकस करने की जरूरत है. वित्त मंत्री के मुताबिक यह तीन 'F' यानी फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेन करेंसी रिजर्व (विदेशी मुद्रा भंडार) हैं, जिन पर अगर कड़ी नजर नहीं रखी गई तो देश के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं. 

सिडबी के कार्यक्रम में दी चेतावनी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह बातें मुंबई में स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) की 37वीं सालगिरह के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता विवाद वैश्विक बाजारों में भूचाल ला रहा है, जिससे भारत में भी लागत लगातार बढ़ती जा रही है. वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. पिछले 11 दिनों के भीतर ही देश में पेट्रोल और डीजल के दाम 4 बार बढ़ाए जा चुके हैं, जिसके कारण महज 11 दिनों में पेट्रोल 7.38 रुपये तक महंगा हो चुका है.

प्रधानमंत्री की अपील का किया समर्थन

अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में की गई अपील का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यह अपील इस संकट के समय में बहुत मायने रखती है. देश के पास मौजूद फॉरेक्स रिजर्व हमारी सबसे बड़ी ताकत है और इसे बचाना बेहद जरूरी है. सीतारमण ने बताया कि तेल की बढ़ती कीमतें तो इस बड़े संकट का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा हैं. इसके अलावा उर्वरकों की कीमतें भी ऐसे स्तर पर पहुंच गई हैं जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी. वहीं दूसरी ओर सोने की बढ़ती कीमतें भी भारत के लिए नई और बड़ी चुनौतियां पैदा कर रही हैं.

होर्मुज संकट और रुपये की कमजोरी

दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से पेट्रोल और डीजल की बचत करने और सोना न खरीदने की अपील की थी ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर ज्यादा दबाव न पड़े. होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे संकट की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतें आसमान छू रही हैं. इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर भारतीय रुपये की सेहत पर पड़ रहा है. यही वजह है कि विदेशी बाजार के दबाव में हाल ही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 97 रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया था.

जियो-पॉलिटिक्स से आगे बढ़ा नुकसान

वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मध्य-पूर्व के संकट का असर सिर्फ राजनीति या जियो-पॉलिटिक्स तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह उससे कहीं आगे तक जाता है. उन्होंने कहा कि आम व्यापारियों और जनता के लिए इस संकट का सीधा मतलब होता है ईंधन की ज्यादा कीमत चुकाना, सामान की डिलीवरी में देरी होना, जहाजों का किराया महंगा होना और इनपुट कॉस्ट का बढ़ जाना. इसके साथ ही एक्सपोर्ट के ऑर्डर मिलने में भी अनिश्चितता बढ़ जाती है. उन्होंने लोगों को सोचने पर मजबूर किया कि जब यह सारी परेशानियां एक साथ सामने आ जाएं तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है.

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का दावा

इन तमाम वैश्विक चुनौतियों के बाद भी वित्त मंत्री ने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें देश की अर्थव्यवस्था के गिरने की बात कही जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है. कुछ लोग नकारात्मक बातें करके देश के माहौल को ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जैसे सबकुछ बिखर रहा हो. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना निशाना साधा और कहा कि हमारे समाज में एक ऐसा तबका है जो बहुत जल्दी अपने ही देश के लोगों की उपलब्धियों की बुराई करने लगता है. आम लोग जो भी अच्छा काम करते हैं, उसे भुलाकर एक गलत कहानी गढ़ दी जाती है. उन्होंने कहा कि भारत इस समय डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता और हमें अपने शब्दों से जनता में आत्मविश्वास जगाना होगा.

सरकार को हुआ बड़ा रेवेन्यू लॉस

ईंधन की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बचाव करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने जनता को बड़ी राहत देने के लिए पहले ही अपने रेवेन्यू का बहुत बड़ा नुकसान उठाया है. पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती की वजह से सरकार को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है, ताकि कीमतें आम जनता के नियंत्रण से बाहर न जाएं. इसके अलावा उन्होंने एमएसएमई सेक्टर पर पड़ रहे दबाव का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 8.1 लाख करोड़ रुपये के बकाया भुगतानों में देरी होने से उद्योगों के वर्किंग कैपिटल पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे विकास की रफ्तार धीमी होती है. उन्होंने सरकारी बैंकों को निर्देश दिया कि एमएसएमई का पूरा बकाया 45 दिनों के भीतर चुकाया जाए. 

यह भी पढ़ें: Petrol Diesel Prices Hike: पेट्रोल-डीजल ने 10 दिन में चौथी बार दिया झटका, जानें इस बार कितना बढ़ा रेट

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स्पेसवॉक पर निकले एस्ट्रोनॉट्स रस्सी से क्यों बंधे दिखते हैं? माइक्रोग्रैविटी का अनोखा खतरा

नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। स्पेसवॉक के दौरान एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन से एक मजबूत रस्सी (टेथर) से बंधे रहना क्यों जरूरी होता है? यह सवाल अक्सर कई लोगों के मन में होता है। क्या यह सिर्फ सुरक्षा के लिए है या अंतरिक्ष की विशेष परिस्थितियों के कारण? दरअसल, अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी (शून्य गुरुत्वाकर्षण जैसी स्थिति) के कारण चलना-फिरना और गति नियंत्रित करना पृथ्वी से बिल्कुल अलग है। यही वजह है कि एस्ट्रोनॉट्स बिना रस्सी के स्पेसवॉक पर नहीं निकलते।

पृथ्वी पर हम जमीन को पैरों से धकेलकर आगे बढ़ते हैं, लेकिन अंतरिक्ष में स्थिति पूरी तरह अलग है। वहां गुरुत्वाकर्षण खत्म नहीं होता, बल्कि स्पेसक्राफ्ट और उसमें मौजूद हर चीज पृथ्वी के चारों ओर एक साथ गिर रही होती है। इसी वजह से एस्ट्रोनॉट्स को भारहीनता का अनुभव होता है। वहां “ऊपर” और “नीचे” का कोई अहसास नहीं रहता। अंतरिक्ष में हिलने-डुलने के लिए आपको किसी सतह को धकेलना या खींचना पड़ता है। अगर आपके पास कोई सतह नहीं है जिससे बल या टॉर्क (घुमाव) पैदा कर सकें, तो आप अपनी गति पर नियंत्रण खो बैठते हैं। एक बार अगर आप घूमने लगे तो बिना किसी सहारे के रुकना बहुत मुश्किल हो जाता है।

न्यूटन के गति के नियम वहां पूर्ण रूप से लागू होते हैं। एस्ट्रोनॉट्स बताते हैं कि अगर स्पेसवॉक के दौरान हाथ या पैर से धक्का लग जाए और कोई सहारा न हो, तो सिर्फ 2 फीट की दूरी तय करना भी असंभव हो सकता है। आप एक जगह से दूसरी जगह नहीं पहुंच पाएंगे और अनियंत्रित रूप से घूमते रह सकते हैं। यही कारण है कि स्पेसवॉक के दौरान एस्ट्रोनॉट्स हमेशा स्पेस स्टेशन से एक मजबूत सुरक्षा रस्सी से बंधे रहते हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर उनके पास अतिरिक्त रस्सियां भी होती हैं। अगर मुख्य रस्सी किसी कारण से छूट भी जाए तो बैकअप रस्सी उन्हें बचाती है। यह टेथर सिर्फ उन्हें खो जाने से नहीं बचाती, बल्कि गति नियंत्रित करने में भी मदद करती है। अंतरिक्ष एजेंसियां इस बात पर बहुत जोर देती हैं कि स्पेसवॉक बेहद जोखिम भरा कार्य है। छोटी सी लापरवाही एस्ट्रोनॉट को अनियंत्रित स्थिति में डाल सकती है। इसलिए रस्सी से बंधकर रहना स्पेसवॉक का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा नियम है।

यह व्यवस्था एस्ट्रोनॉट्स को न सिर्फ सुरक्षित रखती है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ स्पेस स्टेशन के बाहर जटिल मरम्मत और प्रयोग करने की सुविधा भी देती है।

--आईएएएनएल

एमटी/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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