पिछले कई दिनों से खबरें फैलाई जा रही हैं कि पीएम मोदी डोनल्ड ट्रंप से डरते हैं। ऐसा ही झूठा नैरेटिव इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ भी चलाया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप नेतन्याहू से भी नाराज है। एक मीटिंग में तो नेतन्याहू को धमका दिया। लेकिन अब अचानक कुछ ऐसा हुआ है जिसने पीएम मोदी और नेतन्याहू की ताकत दुनिया को दिखा दी है। झूठ ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रहता उसे कॉकरोच की तरह कुचल दिया जाता है। दरअसल अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडप कन्वेंशन सेंटर में एक कार्यक्रम चल रहा था। मंच पर अचानक अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर आए और उन्होंने कहा कि मेरे साथ फोन पर कोई है। उन्होंने फोन का स्पीकर ऑन किया। स्पीकर से डोनाल्ड ट्रंप की आवाज आई। आई लव द प्राइम मिनिस्टर मोदी ग्रेट। माय फ्रेंड। यह सब तो आप शायद सोशल मीडिया पर पहले भी पढ़ चुके होंगे। लेकिन आपको शायद यह पता नहीं होगा कि डोनाल्ड ट्रंप ने यहां फोन करने से पहले एक और फोन मिलाया था।
चीन में बेइज्जत होने के बाद ट्रंप को शायद पता चल चुका है कि भारत के बिना वह कुछ नहीं कर पाएंगे। इसीलिए भारत में फोन मिलाकर ट्रंप ने कहा कि मैं पीएम मोदी का बहुत बड़ा फैन हूं। भारत मुझ पर 100सदी भरोसा कर सकता है। भारत को जो चाहिए वो मिलेगा। पीएम मोदी को कॉल करने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल भी की थी। डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं को एक ही फोन कॉल पर ले लिया। ट्रंप ने इन सभी मुस्लिम देशों से कहा कि इजराइल के साथ शांति डील साइन करने के लिए तैयार हो जाओ। हमें इब्राहिम अकॉर्ड को आगे बढ़ाना है।
आपको बता दें कि 2020 में साइन हुए इब्राहिम अकॉर्ड के तहत संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मोरक्को पहले ही इजराइल के साथ पीस डील साइन कर चुके हैं। लेकिन अब नेतन याू के प्रेशर के बाद डोन्ड ट्रंप ने सभी मुस्लिम देशों से कहा है कि वह इजराइल के साथ पीस डील साइन करें। ट्रंप ने जैसे ही बाकी मुस्लिम देशों से पीस डील साइन करने के लिए कहा, तो अचानक फोन पर सन्नाटा छा गया। मजाक में डॉन्ड ट्रंप ने पूछा कि क्या सभी लाइन पर अभी भी मौजूद हैं? रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका ने खासतौर पर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान से बोल दिया है कि इजराइल के साथ पीस डील साइन करो। आपको बता दें कि सऊदी अरब, क़तर और पाकिस्तान के इजराइल के साथ कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं है। लेकिन अगर अमेरिका के दबाव में यह मुस्लिम देश और खासतौर पर पाकिस्तान, इजराइल को एक देश की मान्यता देते हैं, तो पूरी दुनिया की जिओपॉलिटिक्स ही बदल जाएगी।
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मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि इजरायल के लिए अमेरिका कुछ भी कर सकता है और अमेरिका के बिना इजरायल कुछ नहीं है। जून 2025 में 12 दिनों की जंग में इसराइल के लिए आखिर में अमेरिका खड़ा हो गया था। और 2026 की 40 दिनों की जंग भी अमेरिका इजरायल ने मिलकर लड़ी ईरान के खिलाफ। इजरायल के लिए ही अमेरिका अपनी जंगी बेड़े से लेकर सारा साजो सामान अरब देशों की जमीन और समंदर में रखता है। यानी इसराइल अमेरिका के लिए सब कुछ है। प्रेसिडेंट ट्रंप ने इजरायल की मोहब्बत में कुछ ऐसा ही किया है। अरब और मुस्लिम देशों के साथ। दरअसल ट्रंप ने सऊदी, क़तर, पाकिस्तान को दो टूक कह दिया है कि वो इजरायल को स्वीकार करें, उसे मान्यता दें। उसके साथ समझौता करें। अब मुस्लिम देशों के सामने तो बड़ा धर्म संकट खड़ा हो गया है। ट्रंप को देखें या फिर अपनी आवाम की भावनाओं को। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को ट्रंप ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के लीडर्स के साथ फोन पर बात की। इसमें ट्रंप ने ऐसी बात कही जिससे हर लीडर चौंक गया और कुछ पल के लिए फोन कॉल में सन्नाटा छा गया।
ट्रंप ने कहा कि ईरान जंग खत्म होने के बाद अगला कदम होगा कि अरब और मुस्लिम देश इसराइल से समझौता सामान्य करें और अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हो। ट्रंप ख्ते के अरब मुल्कों और डील में सहयोग कर रहे पाकिस्तान, तुर्की वगैरह के साथ फोन पर चर्चा कर रहे थे। लेकिन इसी बातचीत में ट्रंप ने अचानक नया मुद्दा उठा दिया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप ने नेताओं से कहा कि वह अब इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को फोन करने जा रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द ही इजरायल के लीडर भी इसी तरह की कॉल में सबके साथ शामिल होंगे। फिर क्या था यूएई को छोड़कर बाकी अरब और मुस्लिम देशों के नेताओ को काटो तो खून नहीं। ट्रंप के सामने कुछ बोले तो फंसे और अगर ना बोले तो मुसीबत। ट्रंप के इजरायल के साथ समझौते का जिक्र करते हुए एक चुप्पी छा गई। वक्त बदल गया, हालात बदल गए। खासकर सऊदी अरब, क़तर और पाकिस्तान जैसे देशों के नेता जिनके इजरायल के साथ औपचारिक कूटनीतिक रिश्ते नहीं है।
ट्रंप की इस मांग से वो लोग हैरान रह गए। पाकिस्तान जैसे कथित इस्लामिक देशों की तो पूरी इंटरनेशनल सियासत ही इजरायल के खिलाफ बेस्ड है। वो तो बुरे फंस गए हैं। पाकिस्तान की इजरायल से नफरत को इसी आधार पर समझा जा सकता है कि उसके पासपोर्ट पर लिखा है कि पाकिस्तान इजरायल को नहीं मानता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि लाइन पर कुछ देर के लिए खामोशी छा गई। तब ट्रंप ने मजाक में पूछा कि क्या आप लोग अभी भी लाइन पर हैं? तब जाकर मुस्लिम देश कुछ सहज हुए। ट्रंप ने यहां तक इशारा कर दिया कि एक दिन ईरान भी अब्राहम समझौते में शामिल हो सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन की सरकारों के रहते यह मुमकिन नहीं है क्योंकि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही ईरान की फॉरेन पॉलिसी में फिलिस्तीन की आजादी शामिल है।
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