CBSE Syllabus: सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली, कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मातृभाषा के रूप में पढ़ेंगे छात्र
Maithili Language: बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के लोगों और मैथिली भाषा प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को भी आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है। इस बड़े फैसले के बाद अब देशभर के सीबीएसई स्कूलों में मैथिली भाषा की पढ़ाई हो सकेगी।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर यह अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने इस फैसले को मिथिलांचल के इतिहास में एक मील का पत्थर और बेहद गर्व की बात बताया है।
कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मिलेगी जगह
सम्राट चौधरी ने बताया कि सीबीएसई के नए सिलेबस के तहत कक्षा 1 से लेकर माध्यमिक स्तर (Secondary Level) तक मैथिली को एक मातृभाषा विषय के रूप में शामिल किया गया है। सरकार के इस कदम से नई पीढ़ी न केवल अपनी समृद्ध भाषा से रूबरू होगी, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति और परंपरा से और अधिक मजबूती से जुड़ने का मौका मिलेगा।
मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में सशक्त स्थान दिलाने की दिशा में लिया गया यह निर्णय ऐतिहासिक एवं अत्यंत स्वागतयोग्य है।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) May 25, 2026
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के… pic.twitter.com/PCcTnMEXDv
सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी का जताया आभार
इस बड़े फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में देश की सभी क्षेत्रीय और भारतीय भाषाओं को एक नई ताकत मिल रही है। मैथिली को सीबीएसई के नेशनल करिकुलम में शामिल करना हमारी सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।
मिथिला की समृद्ध संस्कृति को मिलेगा वैश्विक सम्मान
हम सब जानते हैं कि मैथिली भाषा का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। मिथिला की लोक संस्कृति, अद्भुत साहित्य, मधुर गीत-संगीत और विश्व प्रसिद्ध कला (मधुबनी पेंटिंग) में मैथिली भाषा का एक विशेष और अटूट स्थान है। अब एक राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड में जगह मिलने के बाद मैथिली भाषा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान और नया सम्मान हासिल होगा।
मातृभाषा में शिक्षा से छात्रों को होगा बड़ा फायदा
शिक्षाविदों और मिथिला के बुद्धिजीवियों का मानना है कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा अगर उनकी मातृभाषा में हो, तो उनके सीखने और समझने की क्षमता कई गुना बेहतर हो जाती है। सीबीएसई के इस फैसले से मिथिलांचल के लाखों छात्र-छात्राओं को सीधा फायदा पहुंचने वाला है। अपनी भाषा में पढ़ाई करने से बच्चों के लिए विषय को समझना काफी आसान हो जाएगा और वे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे।
West Bengal Politics: अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस की छापेमारी, कंप्यूटर समेत कई दस्तावेज किए गए जब्त
तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता, राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित निजी आवास पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीमों ने अचानक एक बड़ी छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया है।
इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर और आसपास के पूरे इलाके में भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। अचानक हुई इस प्रशासनिक घेराबंदी से पूरे राज्य के राजनीतिक हलकों में कयासों और तीखी बहसों का दौर बेहद तेज हो गया है।
#WATCH | West Bengal | Kolkata police leave from the residence of TMC National General Secretary Abhishek Banerjee. pic.twitter.com/pgasm6lCOw
— ANI (@ANI) May 25, 2026
हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास पर हुई छापेमारी
यह पूरी कार्रवाई कोलकाता के पॉश इलाके में स्थित 188ए हरीश मुखर्जी रोड वाले अभिषेक बनर्जी के मुख्य आवास पर सोमवार दोपहर को की गई। पुलिस के आला अधिकारियों ने आवास के भीतर कई घंटों तक सघन तलाशी ली।
तलाशी अभियान पूरा होने के बाद बाहर निकली पुलिस की टीमें अपने साथ कंप्यूटर मॉनिटर, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज, सीपीयू और कई अन्य महत्वपूर्ण फाइलों व विधिक दस्तावेजों को जब्त कर अपने साथ लेकर रवाना हुई हैं।
कोलकाता नगर निगम द्वारा जारी अवैध निर्माण का नोटिस बना वजह
शुरुआती जांच और प्रशासनिक सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारियों के मुताबिक, इस पूरी कार्रवाई का सीधा संबंध कोलकाता नगर निगम द्वारा पूर्व में जारी किए गए एक विधिक नोटिस से जुड़ा हुआ है।
अवैध निर्माण का मामला: निगम के अधिकारियों का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी के इस आलीशान घर के कई हिस्सों में कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर और बिना उचित प्रशासनिक अनुमति के अवैध निर्माण कार्य कराया जा रहा था।
समयसीमा का पेंच: इस विषय को लेकर कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी को बकायदा सात दिनों का एक कड़ा विधिक नोटिस थमाया था, जिसमें उनसे स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। सूत्रों के मुताबिक, नोटिस के जवाब और विधिक समीक्षा के लिए दी गई सात दिनों की यह आधिकारिक समयसीमा आज सोमवार को ही समाप्त हो गई थी, जिसके तुरंत बाद यह कड़ा एक्शन लिया गया।
टीएमसी में भारी आक्रोश
इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी पेचीदगियों को देखते हुए फिलहाल कोलकाता पुलिस और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने कोई भी आधिकारिक बयान या विस्तृत विवरण साझा करने से इनकार कर दिया है। अधिकारी अभी पूरे मामले की कागजी कार्रवाई पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
दूसरी ओर, फलता उपचुनाव के नतीजों के तुरंत बाद टीएमसी के सबसे बड़े नेता के घर पर हुई इस कार्रवाई को लेकर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। टीएमसी नेताओं ने दबी जबान में इसे राजनीतिक कूटनीति से प्रेरित कार्रवाई बताना शुरू कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति का पारा और ज्यादा चढ़ना पूरी तरह तय माना जा रहा है।




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