आज से नौतपा शुरु: अगले 9 दिन झुलसाएगी गर्मी, लू और हीटवेव का अलर्ट, ये सावधानियां रखें
देशभर में गर्मी ने अब अपने सबसे तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। आज 25 मई से से नौतपा की शुरुआत हो गई है जिसे साल के सबसे गर्म नौ दिन माना जाता है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, बिहार और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में लू के साथ गर्म हवाओं का असर और अधिक तेज़ होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार नौतपा के दौरान कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक पहुंच सकता है।
नौतपा शब्द “नौ” और “तपा” से मिलकर बना है जिसका अर्थ है नौ दिनों तक पड़ने वाली तपिश। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य वृषभ राशि में प्रवेश कर रोहिणी नक्षत्र में आता है, तब नौतपा आरंभ होता है। भारतीय परंपरा और लोक मान्यताओं में इसे मौसम परिवर्तन का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।
नौतपा शुरु
लोक मान्यता है कि नौतपा जितना अधिक तपता है, मानसून उतना ही बेहतर होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे अच्छी बारिश और कृषि से भी जोड़कर देखा जाता है। हालांकि मौसम विज्ञान इसे गर्म और शुष्क वातावरण की प्राकृतिक प्रक्रिया मानता है, जो आगे चलकर मानसूनी गतिविधियों को प्रभावित करती है।
नौतपा के दौरान धरती और वातावरण तेजी से गर्म होते हैं। इससे उत्तर और मध्य भारत में लू की स्थिति बनती है। दिन के समय गर्म हवाएं चलती हैं और रात के तापमान में भी ज्यादा राहत नहीं मिलती। कई इलाकों में हीट वेव की स्थिति बन सकती है। खासतौर पर बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग इस मौसम में ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
ये सावधानियां रखें
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, चक्कर, उल्टी, सिरदर्द और अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। खासतौर पर बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग और डॉक्टरों ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। नींबू पानी, छाछ, सत्तू, नारियल पानी और ओआरएस जैसे पेय पदार्थों का सेवन फायदेमंद माना गया है।
विशेषज्ञों ने हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनने, सिर को टोपी या गमछे से ढंकने तथा धूप का चश्मा और छाता इस्तेमाल करने की सलाह दी है। भोजन में तरबूज, खरबूजा, खीरा और अन्य पानी से भरपूर फलों को शामिल करने को कहा गया है। तला-भुना, मसालेदार और भारी भोजन से बचने की सलाह भी दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में पानी की कमी होने पर चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी, अत्यधिक थकान और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हीट स्ट्रोक की स्थिति गंभीर होने पर जान का खतरा भी बढ़ सकता है। किसी व्यक्ति को तेज बुखार, घबराहट या बेहोशी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
चीन बोला- भारत दलाई लामा उत्तराधिकारी मामले से दूर रहे:यह हमारा आंतरिक मासला, तिब्बत मुद्दे में बाहरी दखल मंजूर नहीं
चीन ने भारत को दलाई लामा के उत्तराधिकार के मुद्दे से दूर रहने की सलाह दी है। बीजिंग ने कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म और उत्तराधिकारी तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह चीन का आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म सदियों पुराने धार्मिक रीति-रिवाजों और ऐतिहासिक परंपराओं के तहत होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए चीन की केंद्रीय सरकार की मंजूरी जरूरी होती है और 14वें दलाई लामा को भी इसी प्रक्रिया के तहत मान्यता दी गई थी। चीनी दूतावास ने भारत को तिब्बत पर अपने पुराने रुख की याद भी दिलाई। बयान में कहा गया कि भारत को तिब्बती स्वतंत्रता से जुड़ी गतिविधियों के लिए मंच उपलब्ध नहीं कराना चाहिए। यह क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-चीन संबंधों के लिए जरूरी है। चीन दलाई लामा के मुद्दे को संबंधों में कांटा बता चुका यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने दलाई लामा मुद्दे पर भारत को चेतावनी दी हो। पिछले साल भी बीजिंग ने कहा था कि दलाई लामा का उत्तराधिकार भारत-चीन संबंधों में कांटे की तरह है। दलाई लामा पहले भी कह चुके हैं कि उनके उत्तराधिकारी तय करने में चीन की कोई भूमिका नहीं होगी। तिब्बती मान्यता के मुताबिक, किसी वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा पुनर्जन्म लेती है। हालांकि चीन कहता है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी की प्रक्रिया को चीनी सरकार की मंजूरी जरूरी है। दलाई लामा 1959 से भारत में निर्वासन में रह रहे हैं। तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद वे भारत आए थे। भारत में करीब 70 हजार तिब्बती शरणार्थी और निर्वासित तिब्बती सरकार भी मौजूद है। वर्तमान दलाई लामा को कैसे चुना गया था? वर्तमान दलाई लामा का जन्म 1935 में चीन के उत्तर पश्चिम में ताक्तेसर गांव में हुआ था। सिर्फ दो साल की उम्र में उनकी पहचान हो गई थी। 13वें दलाई लामा की छोड़ी निशानियों की मदद से बौद्ध साधुओं का दल इस गांव तक पहुंचा था। यह दल अपने साथ 13वें दलाई लामा का कुछ सामान जैसे चश्मा, घंटी, छड़ी लेकर आए। उन्होंने दलाई लामा का सामान और कुछ और सामान बच्चे के सामने रखा। इनमें से बच्चे ने 13वें दलाई लामा से जुड़ी चीजें उठाकर कहा 'ये मेरा है।' आखिर में उन साधुओं ने बच्चे के सामने कुछ छड़ी रखी। बच्चे ने दलाई लामा की छड़ी उठाकर उसे अपने सीने से लगा लिया। इसके बाद उन साधुओं को यकीन हो गया कि यह बच्चा दलाई लामा का पुनर्जन्म है। 6 साल की उम्र में उनकी पढ़ाई शुरू हुई और 1950 में चीन की तिब्बत में घुसपैठ के बाद उन्होंने दलाई लामा की पूरी शक्तियों के साथ पद संभाला। चीन छोड़कर भारत कैसे आए थे मौजूदा दलाई लामा? आज तिब्बत चीन का हिस्सा है, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। 1949 में चीन में कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आई। 1950 में चीनी सरकार ने तिब्बत में अपनी सेना भेजकर कब्जा कर लिया। इसके बाद चीन और तिब्बत की सरकार में समझौता हुआ, जिसमें चीन ने तिब्बत की आजादी बरकरार रखने की बात कही। इसके बावजूद अगले एक दशक तक चीनी सेना तिब्बत के लोगों पर अत्याचार करती रही। वर्तमान दलाई लामा की ऑटोबायोग्राफी के मुताबिक, मार्च 1959 में चीन की सेना दलाई लामा के महल तक पहुंच गई। दलाई लामा एक सिपाही के कपड़े पहनकर तिब्बत से भागे। करीब दो हफ्तों तक कई गांवों और मॉनेस्ट्री ने उन्हें शरण दी। 31 मार्च 1959 को अपने परिवार, अंगरक्षकों और कुछ तिब्बतियों के साथ अरुणाचल प्रदेश के रास्ते दलाई लामा भारत पहुंचे। 2 अप्रैल को आधिकारिक तौर से भारत सरकार ने उनका स्वागत किया और 3 अप्रैल को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दलाई लामा को भारत में शरण देने की घोषणा की। हालांकि ऐसा करने से चीन से रिश्तों पर असर पड़ सकता था इसलिए कई लोगों ने नेहरू के फैसले का विरोध भी किया। भारत सरकार ने दलाई लामा को पहले असम के तेजपुर में रहने की जगह दी। फिर कुछ समय वे मसूरी में रहे और आखिरकार 1960 में धर्मशाला में बस गए।
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