HRA Tax Exemption: कैश में किराया देते हैं तो भी मिलेगा HRA टैक्स छूट का फायदा? जानें नियम
कई नौकरीपेशा लोग मकान का किराया कैश में देते हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या बैंक ट्रांसफर या ऑनलाइन पेमेंट का रिकॉर्ड नहीं होने पर भी हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA पर टैक्स छूट ली जा सकती है? इसका जवाब है- हां। सिर्फ कैश में किराया देने की वजह से हाउस रेंट अलाउंस का दावा खारिज नहीं होता। हालांकि, किराया वास्तव में दिया गया है, यह साबित करने के लिए सही दस्तावेज होना जरूरी।
कैश में किराया देने पर HRA क्लेम कैसे करें?
अगर आप मकान मालिक को हर महीने कैश में किराया देते हैं तो हर भुगतान की रसीद जरूर लें। रसीद पर कुछ जरूरी जानकारियां होनी चाहिए। जैसे, मकान मालिक का नाम और पता, किराए के मकान का पूरा पता, किस महीने का किराया दिया गया, किराए की रकम, भुगतान का तरीका यानी कैश। इससे जुड़ी सारी रसीदों को सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि इनसे किराया भुगतान का रिकॉर्ड तैयार होता है।
रेंट एग्रीमेंट भी रखें
किराए की रसीद के साथ रेंट एग्रीमेंट रखना भी फायदेमंद होता है। इसमें किराए की रकम, मकान का पता, किरायेदार और मकान मालिक की जानकारी जैसी चीजें दर्ज होती हैं। दोनों दस्तावेज साथ होने पर HRA क्लेम के दौरान किराए से जुड़े दावे को साबित करना आसान हो सकता है।
बैंक से कैश निकालने का रिकॉर्ड भी रखें
अगर आप बैंक से पैसे निकालकर मकान मालिक को किराया देते हैं तो कैश विड्रॉल का रिकॉर्ड भी संभालकर रख सकते हैं। हालांकि, सिर्फ बैंक से पैसे निकालने की एंट्री यह साबित नहीं करती कि वही रकम किराए के तौर पर मकान मालिक को दी गई थी।
इसलिए बैंक विड्रॉल रिकॉर्ड को किराए की रसीद और रेंट एग्रीमेंट के साथ रखना ज्यादा बेहतर है।
सालाना 1 लाख से ज्यादा किराया है तो PAN जरूरी
अगर पूरे साल का किराया 1 लाख रुपए से ज्यादा है तो HRA क्लेम करते समय आम तौर पर मकान मालिक का PAN देना जरूरी होता है। इसलिए किराएदार को पहले से मकान मालिक से PAN की जानकारी ले लेनी चाहिए।
HRA लेने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
HRA टैक्स छूट का फायदा लेने के लिए कर्मचारी का वास्तव में किराए के मकान में रहना और किराया देना जरूरी है। फर्जी रसीद या गलत जानकारी देकर HRA क्लेम करने से टैक्स संबंधी परेशानी हो सकती है।
इसलिए कैश में किराया देने वालों के लिए सबसे जरूरी बात है कि हर महीने की भुगतान रसीद लें, उसे सुरक्षित रखें और रेंट एग्रीमेंट समेत किराए से जुड़े सभी दस्तावेज व्यवस्थित रखें। कैश पेमेंट अपने आप में HRA क्लेम को खत्म नहीं करता, लेकिन बिना पर्याप्त सबूत के दावा करना मुश्किल हो सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
Financial Tips: परिवार के लिए इन 4 वित्तीय दस्तावेजों को एक जगह संभालकर रखना क्यों जरूरी?
जिंदगीभर कमाई और निवेश करने के बाद भी कई परिवार अपने जरूरी वित्तीय दस्तावेजों को व्यवस्थित नहीं रखते। बीमा पॉलिसी, बैंक खाते, म्यूचुअल फंड, एफडी, पीपीएफ या प्रॉपर्टी के कागज अलग-अलग जगह पड़े रहते हैं।
ऐसे में अचानक बीमारी, दुर्घटना या परिवार के किसी सदस्य की मौत होने पर पैसे और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड ढूंढना मुश्किल हो सकता। इसलिए परिवार के जरूरी वित्तीय दस्तावेज एक जगह व्यवस्थित रखना बेहद जरूरी है।
पहचान और बैंक से जुड़े दस्तावेज
आधार, पैन, पासपोर्ट, वोटर आईडी जैसे पहचान पत्रों की कॉपी एक जगह रखें। इसके साथ सभी बैंक खातों की जानकारी, पासबुक, चेकबुक, अकाउंट नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की सूची भी रखें। बंद हो चुके खातों के पुराने दस्तावेज अलग कर दें, ताकि परिवार को भ्रम न हो।
सभी बीमा पॉलिसियों का रिकॉर्ड
लाइफ, हेल्थ, मोटर और होम इंश्योरेंस के दस्तावेज एक फोल्डर में रखें। इसमें पॉलिसी नंबर, प्रीमियम की रसीद और बीमा कंपनी का संपर्क नंबर भी शामिल होना चाहिए। सबसे जरूरी है कि हर पॉलिसी में नॉमिनी की जानकारी सही और अपडेट हो। परिवार को यह भी पता होना चाहिए कि कौन-कौन सी पॉलिसी चल रही है।
निवेश से जुड़े रिकॉर्ड
म्यूचुअल फंड, एफडी, शेयर, पीपीएफ, एनपीएस, ईपीएफ और पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अलग-अलग जगह हो सकती हैं। इनका एक रिकॉर्ड बनाकर रखें। इसमें फोलियो नंबर, अकाउंट नंबर और संबंधित बैंक या संस्था की जानकारी शामिल करें। यह रिकॉर्ड डिजिटल फाइल या सामान्य फोल्डर में भी रखा जा सकता है।
प्रॉपर्टी और लोन के कागज
प्रॉपर्टी से जुड़े सेल डीड, रजिस्ट्रेशन पेपर, पजेशन लेटर और प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद सुरक्षित रखें। अगर होम लोन चल रहा है तो उसकी लेटेस्ट स्टेटमेंट भी साथ रखें। वाहन, एजुकेशन या दूसरे लोन की जानकारी में बकाया राशि, लेंडर और ईएमआई की जानकारी दर्ज होनी चाहिए।
इसके अलावा अगर आपने वसीयत बनाई है तो परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को उसके मूल दस्तावेज की जगह जरूर पता होनी चाहिए।
वित्तीय दस्तावेजों को व्यवस्थित करना एक बार का काम नहीं है। साल में कम से कम एक बार रिकॉर्ड की समीक्षा करें, पुराने कागज हटाएं और नई जानकारी जोड़ें। साथ ही परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को बताएं कि जरूरी दस्तावेज कहां रखे हैं। थोड़ी सी तैयारी भविष्य में परिवार को महीनों की परेशानी से बचा सकती है।
(प्रियंका कुमारी)
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