राजस्थान रॉयल्स ने प्लेऑफ के लिए कितनी बार किया है क्वालीफाई? यहां देखिए पूरी लिस्ट
Rajasthan Royals Playoffs List: आईपीएल 2026 में शानदार खेल दिखाते हुए राजस्थान रॉयल्स ने प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर लिया है. लीग स्टेज का 69वां मैच मुंबई इंडियंस बनाम राजस्थान रॉयल्स के बीच खेला गया. वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस हाईवोल्टेज मैच में रियान पराग की कप्तानी वाली टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की और इसी जीत ने ही आरआर को प्लेऑफ का टिकट दिलाया. जी हां, राजस्थान की टीम ने पंजाब किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के सपनों को चूर-चूर करते हुए प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर लिया है. तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि राजस्थान ने कितनी बार आईपीएल इतिहास में अब तक प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई किया है.
कितनी बार प्लेऑफ में पहुंची है राजस्थान रॉयल्स?
इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास में राजस्थान रॉयल्स ने सातवीं बार प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की की है. 2008 की चैंपियन टीम ने अब तक खेले 19 आईपीएल सीजनों में 7 बार टॉप-4 में क्वालीफाई किया है. 2008, 2013, 2015, 2022, 2024, 2025 , 2026 में प्लेऑफ में पहुंची है.
कितनी बार राजस्थान रॉयल्स ने खेला है फाइनल?
7 बार प्लेऑफ में पहुंचने वाली राजस्थान रॉयल्स की टीम ने अपना पहला फाइनल शेन वॉर्न की कप्तानी में 2008 में खेला था और खिताबी जीत दर्ज की थी. वहीं, दूसरी बार ये टीम संजू सैमसन की कप्तानी में IPL 2022 में फाइनल में पहुंची थी. जहां, गुजरात टाइटंस के हाथों मिली हार के साथ ही टीम का ट्रॉफी जीतने का सपना चूर-चूर हो गया था. अब देखने वाली बात होगी कि राजस्थान की टीम IPL 2025 में फाइनल तक पहुंच पाएगी या नहीं.
A ???????????????????? ???????????????????? into the Playoffs ✅
— IndianPremierLeague (@IPL) May 24, 2026
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IPL 2026 का एलिमिनेटर मैच खेलेगी राजस्थान रॉयल्स
IPL 2026 में राजस्थान रॉयल्स ने अंक तालिका में चौथे स्थान पर रहते हुए प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई किया है. फ्रेंचाइजी ने इस सीजन 14 लीग मैच खेले, जिसमें 8 मैच जीते और 6 मैचों में हार का सामना करना पड़ा. इस तरह 16 अंक के साथ टीम ने टॉप-4 में जगह पक्की की. ऐसे में अब राजस्थान की टीम को एलिमिनेटर मैच खेलना होगा, जो 28 मई को सनराइजर्स हैदराबाद के साथ खेला जाएगा. यदि रियान पराग एंड कंपनी उस मैच को जीतने में कामयाब होती है, तो वह क्वालीफायर-2 खेलना होगा.
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चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, घर का बिगड़ेगा बजट! जानें आम आदमी की जेब पर कितना होगा असर
देशभर में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण पेट्रोल डीजल के रेट में उछाल आया है. इस बार पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये महंगा हो चुका है. यह महीने में चौथी बार है जब पेट्रोल-डीजल के के रेट बढ़ गए हैं. अब तक पेट्रोल के दाम 7.35 रुपये बढ़ चुके हैं. वहीं डीजल के रेट में 7.53 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. इस बढ़ोतरी के बाद कई राज्यों में ईंधन के दाम सौ रुपये के पार जा चुके हैं. दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.
हर माह खर्चों का बोझ बढ़ने वाला है
इसका असर सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने वाला है. यह आम आदमी की जेब पर भी पड़ने वाला है. माल ढुलाई महंगी होने से जहां एक ओर दूध, सब्जी और राशन के दाम बढ़ने वाले हैं. वहीं दूसरी ओर स्कूल वैन और बसों का सफर भी महंगे होने के आसार हैं. इस तरह से हर माह खर्चों का बोझ बढ़ने वाला है.
बाजार के जानकारों की मानें तो इस ताजा महंगाई के कारण खाड़ी देशों में चल रहा तनाव है. यहां पर स्ट्रेट आफ होर्मुज के रास्ते बंद कर दिए गए हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में तेजी आई है. इससे घरेलू बाजार में ईंधन और महंगा हो चुका है.
अर्थशास्त्र के नियम के अनुसार, पेट्रोल-डीजल के दाम कभी भी एक चीज पर असर नहीं डालते हैं. यह अपने साथ ट्रांसपोर्ट, किराना, फल-सब्जी और रोजमर्रा ही जरूरी चीजों से महंगाई का पूरा चक्र लेकर आते हैं. मध्यम वर्ग के परिवारों की चिंताएं बढ़ चुकी हैं.
माल ढुलाई से लेकर पब्लिक के सफर तक
पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ने से एक अलार्म पूरी तरह से एक्टिवेट हो चुका है. डीजल को भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘रक्त’ की तरह कहा जाता है. डीजल महंगा होते ही सबसे पहला और सबसे गहरा असर देश के ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी असर दिख रहा है.
देशभर में माल की ढुलाई ट्रकों के जरिए होती है. ट्रकों के टैंक में जाने वाला डीजल महंगा होने का है, मालभाड़ा यानी फ्रेट चार्ज (Freight Charge) को तुरंत बढ़ाया जाए. इसका अर्थ यह है कि कारखानों से निकलने वाला सामन जब थोक बाजार और फिर वहां से आपके मोहल्ले की दुकान तक पहुंचता है. उसकी ढुलाई की लागत पहले से अधिक हो चुकी है.
पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी इसका असर है. बस, ऑटो, टैक्सी का संचालन सीधे तौर पर ईंधन के दामों पर निर्भर है. बसों के टिकट और ऑटो के किराए में इस बढ़ोतरी का असर देखने को मिल सकता है. ऐसे में रोज दफ्तर जाने वालों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट ही सहारा बन रह जाएगा. इस दौरान माल ढुलाई महंगी होने के आसार हैं. ट्रकों या मालगाड़ियों से ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो सकता है.
दूध-सब्जी के दामों पर असर
ईंधन के दाम बढ़ने के बाद आम आदमी को ‘डबल झटका’ लगता है. पहला झटका तब लगता है, जब वह अपनी गाड़ी में तेल भरवाता है. वहीं दूसरा बड़ा झटका तब लगता है, जब वह बाजार में सब्जी या राशन खरीदने के लिए निकलता है. सब्जियां, फल, दूध, अनाज, खाने का तेल और पैकेज्ड फूड ये सभी चीजें खेतों और फैक्ट्रियों से ट्रकों में लदकर शहरों तक पहुंचती हैं. खासतौर पर जल्दी खराब होने वाली चीजें (Perishable Goods) जैसे हरी सब्जियां, दूध और फल सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. इन सामानों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज और तेज ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क की आवश्यकता होती है. दोनों ही जगह बिजली (जनरेटर) और डीजल पर निर्भरता होती है.
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