Vyatipat Yog 2026: सूर्य-चंद्रमा मिलकर बना रहे व्यातिपात योग, इन 3 राशियों की बढ़ेंगी टेंशन, मिल सकता है धोखा!
Vyatipat Yog 2026: ज्योतिष शास्त्रों में ग्रहों की चाल और उनके संयोगों को बेहद खास बताया जाता है. दरअसल, सनातन धर्म में ग्रहों के परिवर्तन का प्रभाव इंसानों पर भी पड़ता है, ऐसा माना जाता है. मई के महीने में एक खास और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय संयोग बनने वाला है, जिससे व्यातिपात योग का निर्माण हो रहा है. 27 मई को सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति बन रही है, जिससे यह योग बन रहा है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा बिल्कुल आमने-सामने यानी कि 180 डिग्री पर होता है. उस स्थिति में इस योग का निर्माण होता है.
इस दौरान कॉस्मिक एनर्जी का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. इसका असर सभी राशियों पर पड़ता है. इस वर्ष यह योग 27 मई को सुबह 3 बजे शुरू होगा और 30 मई तक रहेगा. इस अवधि में किसी भी नए कार्य की शुरुआत नहीं होती है.
इन 3 राशियों की बढ़ेगी टेंशन
1.वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए समय चुनौतियों से भरा हुआ हो सकता है. व्यातिपात योग के दौरान इस राशि के जातकों को आर्थिक फैसले लेने में जल्दबाजी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. इन लोगों को किसी भी महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. पैसों के लेन-देन और बड़े निवेश से बचना चाहिए. धैर्य रखना जरूरी है.
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2.सिंह राशि
सिंह राशि वाले जातकों को व्यातिपात योग के दौरान बहुत संभलकर रहना चाहिए. इन्हें कार्यक्षेत्र में कोई अड़चन आती दिखेगी. ऑफिस और साथी कर्मियों के साथ मतभेद या विवाद हो सकता है. कोई भी आर्थिक फैसला लेने से पहले अच्छे से विचार कर लें.
3.कन्या राशि
कन्या राशि के जातकों को इस दौरान अपनी वाणी पर काबू रखने की जरूरत है. इस अवधि में व्यातिपात योग इनकी जुबान को कंट्रोल करेगा. ऐसे में कई बार न चाहते हुए भी ये लोग कुछ ऐसी बाते कह सकते हैं, जिससे इनके रिश्ते बिगड़ सकते हैं. बातों का बतंगड़ बन सकता है. किसी भी परिस्थिति में अपनी प्रतिक्रिया को तुरंत देने से बचना चाहिए.
व्यातिपात योग क्या होता है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा जब एक-दूसरे के विपरित होते हैं तो उस स्थिति में व्यातिपात योग बनता है. इस समय में ब्रह्मांड की ऊर्जा बहुत तीव्र होती है. इससे जातकों को मानसिक तनाव और कार्यों में देरी होती है.
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी इस्लामिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
Masik Durga Ashtami 2026: मासिक ज्येष्ठ दुर्गा अष्टमी पर आज जरूर करें मां दुर्गा की आरती और चालीसा का पाठ, पढ़ें लिरिक्स
Masik Durga Ashtami 2026: आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है. हिन्दू धर्म में प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है. अष्टमी तिथि का व्रत मां दुर्गा को समर्पित होता है. इस दिन भक्त मां जगदंबा की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-शांति की कामना करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से मां दुर्गा की भक्ति करने पर जीवन के दुख, डर और परेशानियां दूर होने लगती हैं. इसके अलावा इस पावन अवसर पर दुर्गा मां की आरती और चालीसा का पाठ करना भी बेहद शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा का स्मरण करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं. दुर्गा मां की आरती और चालीसा पढ़ने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है.
दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa Lyrics in Hindi)
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्बा भवानी॥
दोहा
शरणागत रक्षा करे, भक्त रहे नि:शंक।
मैं आया तेरी शरण में, मातु लिजिये अंक॥
दुर्गा माता की आरती (Maa Durga Aarti Lyrics in Hindi)
जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ओम जय अंबे गौरी
मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ ओम जय अंबे गौर
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ ओम जय अंबे गौरी
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ओम जय अंबे गौरी
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर,
सम राजत ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना,
निशिदिन मदमाती॥ ओम जय अंबे गौरी
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ओम जय अंबे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ओम जय अंबे गौरी
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥ ओम जय अंबे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ ओम जय अंबे गौरी
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ ओम जय अंबे गौरी
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ ओम जय अंबे गौरी
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥ ओम जय अंबे गौरी, ओम जय अंबे गौरी
जोर से बोलो जय माता दी, सारे बोले जय माता दी। बोल सांचे दरबार की जय
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