पश्चिम बंगाल के सिलीगुडी के फांसीदेवा इलाके में भारत बांग्लादेश सीमा पर आखिरकार वह काम शुरू हो गया है, जिसका इंतजार सीमा से सटे गांवों के लोग बरसों से कर रहे थे। सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने की प्रक्रिया अब आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है और इसके साथ ही उन लोगों के चेहरे पर राहत लौट आई है, जो वर्षों से घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराधों की दहशत में जीने को मजबूर थे। पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को सत्ताईस किलोमीटर जमीन सौंप दी है। इसमें 18 किलोमीटर हिस्सा सीधे सीमा पर बाड़ लगाने के लिए दिया गया है, जबकि नौ किलोमीटर जमीन सीमा चौकियां स्थापित करने के लिए तय की गई है। यह फैसला सीमा पर लंबे समय से पसरे भय और अव्यवस्था पर करारा प्रहार माना जा रहा है।
फांसीदेवा से लेकर बसिरहाट तक सीमा से सटे गांवों में लोगों ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें पहली बार लग रहा है कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर हुई है। वर्षों तक इन इलाकों में रात होते ही डर का माहौल छा जाता था। सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियां, मवेशी चोरी, अवैध घुसपैठ और तस्करी ने लोगों का जीवन तबाह कर रखा था। किसान खेतों तक जाने में डरते थे, परिवार रात भर जागकर घरों की रखवाली करते थे और महिलाएं व बुजुर्ग हमेशा असुरक्षा के साये में जीते थे।
अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाड़ बनने के बाद वे निश्चिंत होकर खेती कर पा रहे हैं, पशुपालन कर रहे हैं और रात में चैन की नींद सो पा रहे हैं। सीमा के पास रहने वाले लोगों के लिए यह केवल तारबंदी नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान की नई दीवार बनकर उभर रही है। लोगों का साफ कहना है कि अगर यह कदम पहले उठा लिया गया होता, तो वर्षों तक उन्हें भय और नुकसान नहीं झेलना पड़ता।
हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की भारत बांग्लादेश सीमा करीब दो हजार दो सौ सत्रह किलोमीटर लंबी है। चौंकाने वाली बात यह है कि अब भी लगभग पांच सौ उनहत्तर किलोमीटर सीमा बिना बाड़ के पड़ी हुई है। यही खुला हिस्सा लंबे समय से घुसपैठियों, तस्करों और अपराधी गिरोहों के लिए आसान रास्ता बना हुआ था। सुरक्षा एजेंसियां लगातार चेतावनी देती रही हैं कि खुली सीमा देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, लेकिन राजनीतिक ढुलमुल रवैये और प्रशासनिक सुस्ती ने इस काम को वर्षों तक लटकाए रखा।
अब नई सरकार की कैबिनेट ने करीब छह सौ एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा बल को सौंपने का फैसला लेकर साफ संकेत दिया है कि सीमा सुरक्षा पर अब समझौता नहीं होगा। सरकार ने जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़ी अड़चनों को खत्म करने के लिए पैंतालीस दिन की समय सीमा भी तय कर दी है। यह फैसला उन ताकतों के मुंह पर तमाचा माना जा रहा है, जो सीमा सुरक्षा के सवाल पर हमेशा राजनीति करती रहीं। सीमा पर शुरू हुई यह तारबंदी केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत करने की निर्णायक कार्रवाई है। फांसीदेवा में उठी यह शुरुआत अब पूरे पश्चिम बंगाल की सीमा पर सुरक्षा की नई लकीर खींचने जा रही है।
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पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई थमने के संकेत नहीं दे रही है। इस बार, स्थानीय लोगों को डराने-धमकाने, धोखाधड़ी करने और चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोपों के संबंध में एक और टीएमसी नेता को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, टीएमसी मजदूर संघ इकाई के अध्यक्ष शेख वासूल पर नौकरी दिलाने के झूठे वादे करके लोगों से बड़ी रकम वसूलने, इलाके में अपना दबदबा कायम करने के लिए स्थानीय लोगों को डराने-धमकाने और भय का माहौल बनाने का आरोप है। पुलिस द्वारा ले जाते समय उसने एक निजी मीडिया को बताया कि मैं निर्दोष हूं। मैंने 15 साल तक पार्टी की है और मेरे खिलाफ कोई शिकायत नहीं हुई है।
सूत्रों ने यह भी दावा किया कि उन पर विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने और उन पर दबाव डालने का आरोप था, जिससे इलाके में तनाव पैदा हुआ। बताया जाता है कि चुनाव से पहले कई निवासियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। दरअसल, सूत्रों ने खुलासा किया कि उनके खिलाफ लंबे समय से कई शिकायतें दर्ज थीं। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन के बाद राज्य भर में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत, दुर्गापुर-फरीदपुर पुलिस ने गुरुवार देर रात छापा मारा और दुर्गापुर-फरीदपुर ब्लॉक के लाउदोहा इलाके से शेख वासुल को गिरफ्तार किया। दुर्गापुर-फरीदपुर क्षेत्र के रंगमती निवासी वासुल को शुक्रवार सुबह दुर्गापुर उपमंडल न्यायालय में पेश किया गया।
शुभेंदु अधिकारी सरकार के सत्ता में आने के बाद पहली बड़ी गिरफ्तारी सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की गिरफ्तारी थी। उन पर नगर निगम भर्ती घोटाले का आरोप है। ईडी सूत्रों के अनुसार, बोस पर दक्षिण दमदम नगर पालिका के अंतर्गत विभिन्न पदों के लिए लगभग 150 उम्मीदवारों की सिफारिश करने का आरोप है, जिसके बदले उन्होंने आर्थिक लाभ लिया था। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि उसने उन फ्लैटों के रूप में अपराध की आय का पता लगाया है, जिन्हें पूर्व मंत्री (जो 2026 के विधानसभा चुनावों में बिधाननगर सीट हार गए थे) ने कथित तौर पर कई लोगों को नगर निगम में नौकरी दिलाने में मदद करने के बदले हासिल किया था। जांचकर्ताओं ने आगे आरोप लगाया कि उनसे जुड़े बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा पाई गई है। बोस को इस मामले में पूछताछ के लिए ईडी के समक्ष पेश किए जाने के कुछ घंटों बाद ही उनकी गिरफ्तारी हुई।
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