खेल मंत्री का ममेरा भाई स्विमिंग पूल में डूबा, मौत:सोनीपत स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में हादसा, क्रिकेट में पीजी डिप्लोमा कर रहा था; पलवल का रहने वाला
हरियाणा के सोनीपत की राई स्थित हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में गुरुवार रात स्विमिंग पूल में डूबने से छात्र की मौत हो गई। मृतक की पहचान निशांत गौतम निवासी पलवल के रूप में हुई। वह यूनिवर्सिटी में क्रिकेट के पीजी डिप्लोमा फाइनल ईयर का छात्र था। हादसे के बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। निशांत, खेल मंत्री गौरव गौतम का ममेरा भाई था। खेल मंत्री के मीडिया सलाहकार नितिन शर्मा के मुताबिक, निशांत गौतम दिल्ली का रहने वाला है। निशांत के मामा गांव चिरावटा में हैं और खेल मंत्री गौरव गौतम भी चिरावटा गांव के ही रहने वाले हैं। मगर, खेल मंत्री के परिवार का इसे डायरेक्ट कोई रिश्ता नहीं है। हालांकि, निशांत गौतम की मौत की खबर सुनने के बाद गांव में दुख का महौल है। उधर, घटना के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में हड़कंप मच गया, जबकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पूल हाल ही में दोबारा शुरू किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… रात साढ़े आठ बजे हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, निशांत गौतम पलवल का रहने वाला था और यूनिवर्सिटी हॉस्टल में रहता था। गुरुवार रात करीब 8:30 बजे वह स्विमिंग पूल में उतरा। इसी दौरान वह गहरे पानी में डूब गया। घटना की सूचना यूनिवर्सिटी प्रबंधन तक काफी देर बाद पहुंची, जिसके चलते समय पर बचाव कार्य नहीं हो सका। अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित घटना की जानकारी मिलने के बाद यूनिवर्सिटी स्टाफ और अन्य छात्रों की मदद से निशांत को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही छात्रों और यूनिवर्सिटी स्टाफ में शोक का माहौल बन गया। मंगलवार से ही शुरू हुआ था स्विमिंग पूल सूत्रों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी का स्विमिंग पूल मंगलवार से ही दोबारा शुरू किया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि पूल संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया गया। यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि हादसे के समय पूल पर लाइफगार्ड मौजूद था या नहीं। पुलिस ने शुरू की जांच पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और कहीं सुरक्षा में लापरवाही तो नहीं बरती गई। पुलिस पूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ की मौजूदगी और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रही है।
MP में विकास की नई उड़ान! भोपाल-इंदौर-उज्जैन बनेंगे सबसे बड़े मेट्रो ग्रोथ सेंटर
मोहन यादव ने मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग के कामों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सड़क निर्माण परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ 2028 से पहले सभी जरूरी सड़क प्रोजेक्ट पूरे कर लिए जाएं ताकि लोगों को बेहतर यातायात सुविधाएं मिल सकें।
सरकार का मानना है कि नई सड़कें और हाईवे प्रदेश के विकास को नई दिशा देंगे। इससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में तेजी आएगी। खासकर भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने वाला है।
भोपाल-इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन को मिलेगा फायदा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई सड़क परियोजनाओं का फायदा मिलना शुरू हो गया है। इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन और इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद यात्रा पहले से ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
जबलपुर और ग्वालियर भी विकास की दौड़ में शामिल
सरकार अब जबलपुर और ग्वालियर को भी मेट्रोपॉलिटन विकास मॉडल से जोड़ने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में इन शहरों में भी नई सड़कें, रिंग रोड और बेहतर कनेक्टिविटी देखने को मिलेगी। इससे आसपास के जिलों को भी सीधा फायदा मिलेगा।
रिंग रोड और बायपास प्रोजेक्ट्स में आएगी तेजी
बैठक में बड़े शहरों की रिंग रोड परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि भोपाल वेस्टर्न बायपास को अगले ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर की रिंग रोड परियोजनाएं अगले डेढ़ साल में पूरी हो सकती हैं। वहीं रतलाम, देवास, सागर, रीवा और कटनी जैसे शहरों में भी नई रिंग रोड बनाने की योजना पर काम चल रहा है।
सड़क हादसे कम करने पर सरकार का फोकस
बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी गई। अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में 481 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं। सरकार इन जगहों पर चेतावनी संकेत, स्पीड कंट्रोल, लेन मार्किंग और दिशा संकेतक जैसे उपाय कर रही है। मुख्यमंत्री ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में प्राथमिक उपचार केंद्र शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। सरकार का दावा है कि 2026 में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में कमी आई है।
नई तकनीक से तैयार होंगी सड़क परियोजनाएं
अब सड़क परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले उनकी तकनीकी जांच अनिवार्य की गई है। सरकार जीआईएस आधारित प्लानिंग, ट्रैफिक घनत्व और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सड़क निर्माण कर रही है। इसके अलावा पीएम गति शक्ति पोर्टल के जरिए सड़क मार्गों की प्लानिंग की जा रही है ताकि परियोजनाओं को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सके।
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