पेरेंटिंग- दूध पीकर बच्चा सो जाता है:क्या उसे नींद से उठाकर डकार दिलाना जरूरी, मैं नई मां हूं, थोड़ा कनफ्यूज भी, क्या करूं?
सवाल- मैं एक नई मां हूं और मेरा 2 महीने का बच्चा है। दूध पिलाने के बाद कई बार वह सो जाता है, तो समझ नहीं आता कि उसे हर बार डकार दिलाना जरूरी है या ऐसे ही सुला देना ठीक है? लोग कहते हैं कि डकार न दिलाने से गैस, पेट दर्द या उल्टी की समस्या हो सकती है। इसका सही तरीका क्या है? एक्सपर्ट: डॉ. बेजी जैसन, पीडियाट्रिशियन, MD, MRCPCH (मेंबरशिप ऑफ द रॉयल कॉलेज ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ) जवाब- सबसे पहले तो आपको मां बनने की बधाई। एक नई मां के रूप में आपके मन में ऐसे सवाल आना स्वाभाविक हैं। इस समय आसपास के लोग तरह-तरह की सलाह देते हैं। इससे कन्फ्यूजन और बढ़ जाता है। इसलिए सही जानकारी हाेना जरूरी है। ‘शिशु को डकार दिलाना सही या गलत’, पेरेंटिंग से जुड़ा ये कॉमन सवाल बहुत से पेरेंट्स के मन में आता है। इसका सीधा जवाब है कि ज्यादातर मामलों में दूध पिलाने के बाद शिशु को डकार दिलाना जरूरी होता है। अब आइए इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं। डकार और शिशु के हेल्थ के बीच कनेक्शन दरअसल नवजात शिशुओं का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता है। वे सिर्फ मां के दूध पर निर्भर होते हैं। कई बार वे फीडिंग के दौरान दूध के साथ हवा भी निगल लेते हैं। शिशु को डकार दिलाना क्यों जरूरी? डकार दिलाने से पेट में जमा हवा बाहर निकल जाती है और शिशु को आराम महसूस होता है। नीचे ग्राफिक में शिशु को डकार दिलाने के सभी कारण समझिए- डकार न दिलाने के संभावित रिस्क डकार न दिलाने से पेट में गैस जमा हो सकती है। इससे शिशु को पेट फूलने, दर्द और चिड़चिड़ापन हो सकता है। कुछ मामलों में बच्चा दूध भी उलट सकता है या उसकी नींद बार-बार टूट सकती है। नीचे ग्राफिक में डकार न दिलाने के सभी संभावित हेल्थ रिस्क देखिए- शिशु को डकार कैसे दिलाएं? शिशु को डकार बहुत सावधानी से दिलाना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि शिशु को हमेशा सीधी पोजिशन में रखें, ताकि उसके पेट में फंसी हवा आसानी से बाहर निकल सके। डकार दिलाते समय जल्दबाजी या जोर लगाने की जरूरत नहीं होती। नीचे ग्राफिक में डकार दिलाने के सुरक्षित तरीके दिए गए हैं। आप अपने शिशु की सुविधा के अनुसार इनमें से कोई भी तरीका अपना सकते हैं। कितनी देर तक डकार दिलानी चाहिए? आमतौर पर शिशु को डकार दिलाने के लिए 1-3 मिनट का समय पर्याप्त होता है। इतने समय में ज्यादातर शिशुओं के पेट में गई हवा बाहर निकल जाती है। डकार दिलाते समय किन बातों का ध्यान रखें? डकार हमेशा सही तरीके और सावधानी के साथ दिलानी चाहिए। इस दौरान छोटी-सी गलती भी शिशु को असहज महसूस करा सकती है, क्योंकि नवजात शिशु का शरीर बेहद नाजुक होता है। सबसे जरूरी है कि शिशु को हमेशा सुरक्षित और सपोर्टेड पोजिशन में रखें, ताकि उसकी गर्दन और सिर पर कोई दबाव न पड़े। डकार दिलाते समय बहुत हल्के हाथों का इस्तेमाल करें। जोर से थपथपाना या हिलाना नुकसानदायक हो सकता है। इस दौरान कुछ बातों का खास ख्याल रखें। अंत में यही कहूंगी कि शिशु को डकार दिलाना बहुत जरूरी है, जो उसके पाचन, आराम और नींद से जुड़ा है। शिशु के संकेतों को समझना सबसे जरूरी है। अगर आप धैर्य और सही तरीके से यह प्रक्रिया अपनाते हैं, तो शिशु ज्यादा सहज और खुश रहेगा। …………………… पेरेंटिंग की ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 13 साल की बेटी हकलाती है: बच्चे मजाक उड़ाते हैं, क्लास में कुछ बोलती नहीं, हमेशा चुप रहती है, हम उसे कैसे हेल्प करें? ‘द स्टटरिंग फाउंडेशन’ के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 1% यानी 8 करोड़ से ज्यादा लोग हकलाते हैं। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह समस्या लगभग चार गुना ज्यादा होती है। करीब 5% बच्चे उम्र के किसी-न-किसी दौर में हकलाहट का सामना करते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
जरूरत की खबर- गर्मी में ज्यादा हो रहे मुंहासे:अपनी फूड हैबिट बदलें, 8 चीजें बिल्कुल न खाएं, समर स्किन केयर रूटीन के 6 स्टेप्स
गर्मियों में चेहरा चिपचिपा लगने लगता है और छोटे-छोटे पिंपल्स अचानक बढ़ जाते हैं। दरअसल, तापमान बढ़ने पर स्किन खुद को प्रोटेक्ट करने के लिए ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाती है। इससे पसीना देर तक चेहरे पर बना रहता है। इस कारण पोर्स ब्लॉक हो सकते हैं। ऐसे में स्किन छोटे-छोटे पिंपल्स भी जल्दी इंफ्लेम (सूजन, रेडनेस) होकर जिद्दी एक्ने का रूप ले लेते हैं। इन्हें कंट्रोल करना आसान नहीं होता। गर्मियों में पसीना, बैक्टीरिया और गंदगी का कॉम्बिनेशन इस समस्या को और बढ़ा देता है। इसलिए आज जरूरत की खबर में गर्मियों में होने वाले मुंहासों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- मुंहासे क्या होते हैं? जवाब- यह एक स्किन कंडीशन है। इसमें तेल (सीबम), डेड स्किन सेल्स और बैक्टीरिया से स्किन के पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं। ये आमतौर पर चेहरे पर होते हैं। ये पीठ, कंधे और चेस्ट पर भी हो सकते हैं। सवाल- क्या मुंहासे और एक्ने एक ही चीज है? जवाब- हां, आमतौर पर मुंहासे और एक्ने एक ही समस्या का संकेत हैं, लेकिन इनमें थोड़ा फर्क होता है। एक्ने एक स्किन कंडीशन है, जबकि मुंहासे उसी कंडीशन का एक लक्षण होते हैं। जब स्किन के पोर्स ऑयल, डेड स्किन और बैक्टीरिया से ब्लॉक हो जाते हैं तो एक्ने होता है। उसी के अलग-अलग रूप में मुंहासे, ब्लैकहेड, व्हाइटहेड या पेनफुल बड़े दाने दिखाई देते हैं। इसलिए मुंहासा एक्ने का लक्षण होता है, लेकिन एक्ने सिर्फ मुंहासों तक सीमित नहीं है। इसके कई लक्षण हो सकते हैं। सवाल- कितने तरीके के मुंहासे होते हैं? जवाब- मुंहासे आमतौर पर 2 मुख्य कैटेगरी में बांटे जाते हैं- 1. नॉन-इंफ्लेमेटरी इनमें सूजन नहीं होती है। ब्लैकहेड- खुले पोर्स, काले दाने होते हैं। व्हाइटहेड- बंद पोर्स, सफेद दाने होते हैं। 2. इंफ्लेमेटरी इनमें सूजन, रेडनेस और दर्द होता है पेप्यूल- छोटे, लाल और सेंसेटिव दाने होते हैं। पस्ट्यूल- पिंपल में पस हो सकता है। नोड्यूल- बड़े, सख्त और पेनफुल दाने होते हैं। सिस्ट- गहरे, पेनफुल और निशान छोड़ सकते हैं। सवाल- क्या नींद की कमी और स्ट्रेस भी गर्मियों में मुंहासे को बढ़ा सकते हैं? जवाब- हां, दोनों मुंहासे को और बढ़ा सकते हैं। एक-एक करके समझते हैं कि इनके कारण मुंहासे क्यों बढ़ते हैं- स्ट्रेस नींद की कमी सवाल- गर्मियों में मुंहासे ज्यादा क्यों होते हैं? जवाब- इस मौसम में पसीना और स्किन का ऑयल (सीबम) प्रोडक्शन बढ़ जाता है। इससे स्किन के पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं। इसके अलावा- सवाल- किस स्किन टाइप में गर्मियों में मुंहासे ज्यादा होते हैं? जवाब- गर्मियों में सबसे ज्यादा मुंहासे ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन टाइप में होते हैं। कॉम्बिनेशन स्किन, जिसमें चेहरे के कुछ हिस्से (जैसे T-zone माथा, नाक, ठुड्डी) ऑयली होते हैं, जबकि बाकी हिस्से (जैसे गाल) नॉर्मल या ड्राई रहते हैं। सवाल- ऑयली स्किन और कॉम्बिनेशन स्किन वालों को मुंहासे ज्यादा क्यों होते हैं? जवाब- ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वालों में मुंहासे होने के कई कारण हैं। जैसे- सवाल- गर्मियों में क्या खाने से मुंहासे ज्यादा होते हैं? जवाब- गर्मियों में पसीना और ऑयल पहले ही ज्यादा होता है। ऐसे में कुछ फूड्स स्किन में ऑयल और सूजन बढ़ाकर मुंहासों का रिस्क और बढ़ा देते हैं। ग्राफिक में ऐसे फूड्स देखिए- सवाल- स्किन को साफ, शाइनी रखना है तो फूड हैबिट कैसी होनी चाहिए? जवाब- सही फूड हैबिट्स स्किन को अंदर से क्लीन, हाइड्रेटेड और हेल्दी बनाए रखती हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- गर्मियों में डेली स्किनकेयर रूटीन क्या होना चाहिए? जवाब- सही डेली स्किनकेयर रूटीन स्किन को फ्रेश और प्रोटेक्टेड रखने में मदद करता है। ग्राफिक में देखिए समर स्किन केयर रूटीन टिप्स- सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- कुछ स्थितियों में डर्मेटोलॉजिस्ट को दिखाना जरूरी है। जैसे- जब मुंहासे बहुत ज्यादा या लगातार हों पेनफुल या बड़े पिंपल्स (नोड्यूल/सिस्ट) दाग बनने लगें ओवर-द-काउंटर प्रोडक्ट्स काम न करें अगर एक्ने के साथ अन्य लक्षण दिखें जैसे- ऐसे में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। मुंहासों से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और उनके जवाब सवाल- क्या गर्मियों में हॉर्मोनल बदलाव भी मुंहासे ट्रिगर कर सकते हैं? जवाब- हां, इस दौरान शरीर में एंड्रोजन जैसे हॉर्मोन का असर बढ़ सकता है। यह स्किन की ऑयल ग्लैंड्स को ज्यादा एक्टिव कर देते हैं और सीबम प्रोडक्शन बढ़ जाता है। जब यह एक्स्ट्रा ऑयल पसीने, धूल और डेड स्किन के साथ मिल जाता है, तो पोर्स ब्लॉक होकर पिंपल्स बनने लगते हैं। सवाल- क्या एसी में ज्यादा रहने से स्किन बैरियर डैमेज होता है? जवाब- हां, एसी हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) कम कर देता है। इससे स्किन का नेचुरल मॉइश्चर तेजी से खत्म होने लगता है। इससे स्किन ड्राई, डिहाइड्रेटेड और सेंसिटिव हो जाती है। उसका प्रोटेक्टिव बैरियर कमजोर पड़ जाता है। सवाल- क्या शेविंग या वैक्सिंग से पिंपल्स ट्रिगर हो सकते हैं? जवाब- हां, इस प्रोसेस में स्किन पर माइक्रो-कट्स और इरिटेशन होता है। सवाल- क्या हार्ड वाटर (नल का पानी) मुंहासों को बढ़ा सकता है? जवाब- हां, इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स ज्यादा होते हैं। पॉइंटर्स से समझते हैं- ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- सनबर्न से बढ़ता स्किन कैंसर का रिस्क:स्किन रखें हेल्दी, ये 7 संकेत इग्नोर न करें, सनबर्न से बचाव के 10 टिप्स गर्मियों की चिलचिलाती धूप शरीर के साथ स्किन को भी नुकसान पहुंचाती है। इससे स्किन में जलन, रेडनेस या चुभन जैसा एहसास हो सकता है। ये सनबर्न के लक्षण हो सकते हैं। अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि असल में सूरज की UV (अल्ट्रावायलेट) किरणें स्किन की ऊपरी लेयर को नुकसान पहुंचाती हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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