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जरूरत की खबर- आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक ठंडक नहीं देते:शरीर को गर्म करते हैं, डॉक्टर से समझें साइंस, ठंडक के लिए ये 11 चीजें खाएं

गर्मियों में लोग तेज धूप, पसीना और थकान से राहत के लिए इंस्टेंट कूलिंग देने वाली चीजें खाना-पीना पसंद करते हैं। ज्यादातर लोग ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और आइसक्रीम लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो चीजें तुरंत ठंडक देती हैं, वे असल में सेहत को नुकसान भी पहुंचाती हैं। कई ‘कूलिंग फूड्स’ डिहाइड्रेशन, डाइजेस्टिव इश्यू, मोटापा और डायबिटीज का रिस्क बढ़ाते हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में बात करेंगे कि कौन से समर कूलिंग फूड सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- ऐसे कौन से फूड हैं, जो गर्मियों में कूलिंग तो देते हैं, लेकिन असल में नुकसान पहुंचाते हैं? जवाब- कई ऐसे समर फूड और ड्रिंक्स हैं, जो ‘टेम्परेरी कूलिंग‘ का एहसास देते हैं। लेकिन ये बॉडी टेम्परेचर इम्बैलेंस, डिहाइड्रेशन, शुगर स्पाइक और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ाते हैं। नीचे ऐसे फूड की लिस्ट देखिए- अब जानते हैं कि ये फूड्स शरीर पर क्या असर करते हैं- हमें क्या लगता है? असल में क्या होता है? हमें क्या लगता है? असल में क्या होता है? हमें क्या लगता है? असल में क्या होता है? हमें क्या लगता है? असल में क्या होता है? हमें क्या लगता है? असल में क्या होता है? हमें क्या लगता है? असल में क्या होता है? हमें क्या लगता है? असल में क्या होता है? हमें क्या लगता है? असल में क्या होता है? हमें क्या लगता है? असल में क्या होता है? सवाल- कैसे समझें कि कोई फूड शरीर को ठंडक पहुंचाता है या नहीं? इनर कूलिंग के लिए क्या खाना चाहिए? जवाब- असली कूलिंग फूड वही है, जो शरीर के अंदर तापमान संतुलित रखे, पाचन को सपोर्ट करे और पर्याप्त हाइड्रेशन दे। इन पॉइंटर्स से इसे पहचान सकते हैं- सवाल- कौन से फूड गर्मियों में शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखते हैं? जवाब- हमारे आसपास पैदा होने वाले पानी से भरपूर और हल्के फूड शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं और डिहाइड्रेशन से बचाते हैं। नीचे ग्राफिक में इसकी लिस्ट देखिए- ये फूड शरीर को हाइड्रेट रखते हैं, इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखते हैं और पाचन को सपोर्ट करते हैं। सवाल- गर्मियों में खानपान को लेकर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- सही खानपान गर्मियों में हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और पाचन समस्याओं से बचाता है। सभी जरूरी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- गर्मियों में एक व्यक्ति को दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए? जवाब- आमतौर पर एक व्यक्ति को दिनभर में 2.5 से 3.5 लीटर पानी पीना चाहिए। मौसम, एक्सरसाइज और हेल्थ के हिसाब से जरूरत कम-ज्यादा हो सकती है। …………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- गर्मियों में नींद नहीं आती: डाइजेशन कमजोर होता है, एक्सपर्ट से जानें गहरी नींद के 12 टिप्स क्या आपने भी नोटिस किया है कि गर्मियों में देर से सोते हैं, फिर भी सुबह जल्दी आंख खुल जाती है? हाई टेम्परेचर और उमस नींद की क्वालिटी को प्रभावित करते हैं। इसलिए हम नींद की तीसरी स्टेज यानी डीप स्लीप में नहीं पहुंच पाते और पूरी रात सोने के बाद भी शरीर को आराम नहीं मिलता। आगे पढ़िए…

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फिजिकल हेल्थ- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म से प्रतीक यादव की मौत:जानें क्या है ये बीमारी, किसे रिस्क ज्यादा, बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

हाल ही में 38 साल की उम्र में प्रतीक यादव का निधन हो गया। वह दिवंगत नेता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे थे। डॉक्टर्स ने उनकी मौत की वजह ‘पल्मोनरी एम्बॉलिज्म’ बताई है। इस कंडीशन में फेफड़ों की नसें ब्लॉक हो जाती हैं और हार्ट फेल हो जाता है। ‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ और ‘अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी’ की गाइडलाइन 2026 के मुताबिक, पल्मोनरी एम्बॉलिज्म वस्कुलर (नसों से जुड़ी बीमारी) डेथ का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। साल 2024 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक ऑटोप्सी बेस्ड भारतीय स्टडी के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती मरीजों में करीब 16% मौतों की मुख्य वजह ‘पल्मोनरी एम्बॉलिज्म’ पाई गई। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में जानेंगे कि- सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म क्या है? जवाब- यह एक गंभीर हेल्थ कंडीशन है, जिसमें फेफड़ों की आर्टरीज में अचानक ब्लॉकेज हो जाता है और ब्लड सप्लाई प्रभावित होती है। इसमें शरीर के किसी हिस्से (ज्यादातर पैर की नसों) में बना ब्लड क्लॉट टूटकर खून के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाता है। यह पल्मोनरी आर्टरी को ब्लॉक कर देता है। ज्यादतर मामलों में डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) के कारण पैर की नसों में बने ब्लड क्लॉट ही फेफड़ों में जाकर ब्लॉकेज की वजह बनते हैं। सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) में क्या संबंध है? जवाब- डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) और पल्मोनरी एम्बॉलिज्म का सीधा कनेक्शन है। पॉइंटर्स से समझते हैं- यानी ज्यादातर मामलों में पल्मोनरी एम्बॉलिज्म की शुरुआत DVT से ही होती है। इसलिए DVT को समय पर पहचानना और इलाज करना बहुत जरूरी होता है। सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म होने पर क्या संकेत दिखते हैं? जवाब- ज्यादातर मामलों में इसके संकेत अचानक नजर आते हैं। इन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। ग्राफिक में पल्मोनरी एम्बॉलिज्म के सभी संकेत देखिए- सवाल- डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) के संकेत क्या हैं? जवाब- इसके शुरुआती संकेत कई बार हल्के होते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। पॉइंटर्स में देखिए- सवाल- अगर DVT के संकेत दिखें तो क्या तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- हां। इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह ब्लड क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है या रुक सकता है। सवाल- यह ब्लड क्लॉट फेफड़ों तक कैसे पहुंच जाता है? जवाब- नसों में बने क्लॉट कभी-कभी टूट जाते हैं। ये ब्लड के साथ बहते हुए नसों के जरिए हार्ट तक पहुंचते हैं। हार्ट जब ब्लड को पंप करता है तो ये क्लॉट्स फेफड़ों की आर्टरीज में भी पहुंच जाते हैं। सवाल- शरीर में ब्लड क्लॉट बनता कैसे है? जवाब- शरीर में ब्लड क्लॉट बनना एक सामान्य और नेचुरल प्रोसेस है। सवाल- ब्लड क्लॉटिंग कहां-कहां हो सकती है? जवाब- बॉडी में ब्लड वेसल्स का करीब 60,000 मील लंबा नेटवर्क होता है। इसमें कहीं भी ब्लड क्लॉट बन सकता है। इसके लक्षण क्लॉट के प्रकार और ऑर्गन्स के मुताबिक बदल सकते हैं। पैर (DVT)- यह सबसे कॉमन है। इसमें पैरों की गहरी नसों में क्लॉट बनता है। फेफड़े- फेफड़ों में ब्लड क्लॉट फंस जाता है। इससे ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है। जिस कारण पल्मोनरी एम्बॉलिज्म हो सकता है। हार्ट- हार्ट आर्टरीज में क्लॉट बनता है। इससे हार्ट अटैक हो सकता है। ब्रेन- ब्रेन की नस में क्लॉट बनने पर स्ट्रोक हो सकता है। आंत/किडनी (रेयर)- ब्लड की सप्लाई रुकने से ऑर्गन्स डैमेज हो सकते हैं। सवाल- क्या यह अचानक होने वाली बीमारी है? जवाब- नहीं, ज्यादातर मामलों में इसकी शुरुआत पहले से शरीर में बने ब्लड क्लॉट (अक्सर पैरों की नसों में) से होती है, जो बाद में टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है। सवाल- क्या यह हमेशा जानलेवा होती है? जवाब- इसकी गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि क्लॉट कितना बड़ा है। सवाल- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? जवाब- पल्मोनरी एम्बॉलिज्म का खतरा कुछ खास स्थितियों और लाइफस्टाइल फैक्टर्स में ज्यादा बढ़ जाता है। ‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ और ‘अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी’ के मुताबिक, इन रिस्क फैक्टर्स की पहचान समय पर करना बेहद जरूरी है। ग्राफिक में सभी रिस्क फैक्टर्स देखिए- सवाल- इसका इलाज कैसे होता है? जवाब- इसके ट्रीटमेंट का मकसद लंग्स के ब्लड क्लॉट को खत्म करना और नए क्लॉट बनने से रोकना होता है। इसके लिए दवाएं दी जाती हैं। कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत हो सकती है। एंटीकोआगुलेंट्स (Anticoagulants) थ्रोम्बोलाइसिस (Thrombolysis) एम्बोलेक्टॉमी (Embolectomy) इन्फीरियर वेना कावा फिल्टर: सवाल- लाइफस्टाइल की कौन सी आदतें या गलतियां ब्लड क्लॉटिंग का रिस्क बढ़ाती हैं? जवाब- रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें ब्लड फ्लो धीमा कर देती हैं और क्लॉट बनने का खतरा बढ़ा सकती हैं। जैसे- सवाल- हेल्दी ब्लड फ्लो के लिए लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए? जवाब- ब्लड का सही फ्लो बॉडी के हर अंग तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने के लिए जरूरी है। खराब लाइफस्टाइल से ब्लड क्लॉट और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का रिस्क बढ़ सकता है। ग्राफिक में देखिए लाइफस्टाइल टिप्स- सवाल- कौन-से फूड ब्लड क्लॉटिंग का रिस्क कम करते हैं? जवाब- कुछ फूड्स ब्लड थिनर का काम करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे ब्लड क्लॉट बनने का खतरा कम हो सकता है। ग्राफिक में देखिए- याद रखें, छोटी लगने वाली समस्या जैसे पैरों में सूजन या दर्द कभी-कभी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकती है। इसलिए समय पर जांच और इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है। ………………………. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है:क्या बिना दवा भी हो सकता कंट्रोल, अगर हाई बीपी है तो डॉक्टर से जरूर पूछें ये 15 सवाल हाई ब्लड प्रेशर आज की सबसे कॉमन हेल्थ प्रॉब्लम है। BP बढ़ने पर लोग डॉक्टर के पास जाते हैं और सजेस्ट की गई दवाएं खाते हैं। इससे ब्लड प्रेशर काफी हद तक कंट्रोल हो जाता है और मशीन में नंबर्स ठीक दिखने लगते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ नंबर कंट्रोल होना ही काफी है? पूरी खबर पढ़ें…

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  Sports

MS Dhoni: महेंद्र सिंह धोनी को लेकर CSK पर भड़के श्रीकांत, बोले- फैन्स को पूरे सीजन उम्मीद में रखा गया

आईपीएल 2026 में महेंद्र सिंह धोनी की वापसी को लेकर पूरे सीजन बना सस्पेंस अब विवाद की वजह बन गया। पूर्व भारतीय क्रिकेटर कृष्णमाचारी श्रीकांत ने चेन्नई सुपर किंग्स मैनेजमेंट पर फैन्स को भ्रम में रखने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने यूट्यूब शो Cheeky Cheeka में कहा कि टीम की ओर से हर मैच से पहले धोनी की उपलब्धता को लेकर संकेत दिए जाते रहे, लेकिन पूरे सीजन उनकी स्थिति को लेकर साफ जानकारी नहीं दी गई।

'MS धोनी स्कैम'- यह शब्द एक्स (पूर्व ट्विटर) पर नाराज़ सपोर्टर्स ने बनाया था- के बारे में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चर्चा पर रिएक्शन देते हुए श्रीकांत ने मैनेजमेंट पर आरोप लगाया कि वे सोची-समझी उलझन और ट्रेनिंग वीडियो का इस्तेमाल करके फैंस की पुरानी यादों को हथियार बना रहे जबकि उन्हें पता था कि अनुभवी कीपर पूरे सीजन में एक भी मैच नहीं खेलेंगे।

धोनी को लेकर श्रीकांत ने सीएसके पर उठाए सवाल
यह मामला तब सामने आया जब पूर्व आईपीएल क्रिकेटर अनिरुद्ध श्रीकांत ने अपने शो में ऑनलाइन फैंस के गुस्से को उठाया और अपने पिता से स्थिति का रिव्यू करने के लिए कहा। पूर्व चीफ सेलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि फ्रेंचाइजी यह गलत जानकारी देना बंद करे।

'फैंस के साथ धोनी का नाम लेकर धोखा किया गया'
श्रीकांत ने अपने यूट्यूब शो में कहा, 'सीज़न शुरू होने से पहले, उन्होंने कहा कि उसके पैर में चोट है और उन्हें उम्मीद है कि वह जल्द ही टीम में आ जाएगा' यह बात CSK के गुजरात टाइटन्स से 89 रन से हारने और प्ले-ऑफ़ की रेस से बाहर होने के एक दिन बाद कही गई। फ्लेमिंग ने भी यही गाना गाया, ऋतुराज गायकवाड़ ने भी यही गाया। वह (धोनी) अगले मैच के लिए तैयार हो सकता है। और फिर मैच से पहले, CSK के पास धोनी की ट्रेनिंग का एक वीडियो होगा जो फैंस को दिखाएगा और इशारा देगा कि वह फिट है और वह खेल सकता है।'

श्रीकांत के लिए, CSK के फैसले लेने वालों की बदलती मेडिकल बातें टैक्टिकल सीक्रेसी से पब्लिक धोखे की हद पार कर गईं। धोनी शुरू में प्री-सीज़न पिंडली की चोट के कारण बाहर बैठे थे, जिससे उन्हें सिर्फ़ दो हफ़्ते के लिए बाहर रहना था, फिर जांघ की मांसपेशियों में दूसरा खिंचाव सामने आया। बाद की रिपोर्ट्स से पता चला कि वह फिट थे लेकिन टीम कॉम्बिनेशन बनाए रखने के लिए बाहर बैठे रहे।

फिर भी, धोनी टीम के साथ बाहर के मैचों के लिए नहीं गए। वह चेपॉक में आखिरी होम गेम के लिए ही मैदान पर उतरे थे, ताकि मैच के बाद लैप ऑफ ऑनर में हिस्सा ले सकें। इसके बावजूद, मैनेजमेंट ने उन्हें कभी साफ तौर पर बाहर नहीं किया।

मज़े की बात यह है कि CSK के आखिरी गेम के बाद, जब ब्रॉडकास्टर ग्रीम स्वान ने उनसे धोनी वाला सवाल पूछा, तो ऋतुराज ने कहा, 'आपको अगले साल पता चलेगा।' श्रीकांत ने कहा, 'यह धोखा बंद करो। आपको यह साफ कर देना चाहिए। अगर वह पूरा सीजन नहीं खेलने वाले हैं, तो ठीक है। अगर आपने यह साफ कर दिया होता तो फैंस मेंटली तैयार होते।'

श्रीकांत ने बताया कि खेल स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ा है, और येलो आर्मी धोनी के बाद के दौर की सच्चाई को संभालने के लिए काफी मैच्योर थी, अगर मैनेजमेंट ने पब्लिक रिलेशन टैक्टिक्स के बजाय सिर्फ ट्रांसपेरेंसी को चुना होता। उन्होंने कहा कि अगर आप ईमानदारी से देखें, तो किसी को धोनी की कमी महसूस नहीं हो रही है। कोई भी मैचों में धोनी को नहीं मांग रहा है। मुझे लगता है कि लोग पूछ रहे हैं कि वह ड्रेसिंग रूम में क्यों नहीं है, लेकिन कितने लोग पूछ रहे हैं कि वह नहीं खेल रहा है? धोनी का दौर खत्म हो गया है। 

CSK लगातार तीसरे साल प्ले-ऑफ के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई। सुपर किंग्स 14 गेम में सिर्फ 12 पॉइंट हासिल करके नीचे के चार में रहने वाली है।

Fri, 22 May 2026 18:48:00 +0530

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