27 लाख का खर्च और 15 लाख का पैकेज: क्या खोखला हो रहा है आईआईटी का भरोसा? सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
IIT average salary package decline: जो माता-पिता अपने बच्चों को आईआईटी (IIT) में पढ़ाने के लिए अपनी जमा-पूंजी और भारी-भरकम चेक काट रहे हैं, उनके लिए आंखें खोलने वाली रिपोर्ट सामने आई है। सालों से छात्रों और अभिभावकों को यह भरोसा दिया जाता रहा है कि रातों की नींद हराम करना, दबाव झेलना और जेईई (JEE) की तैयारी में जी-जान लगाना आखिरकार रंग लाता है, क्योंकि इसके बदले जीवन बदलने वाला प्लेसमेंट मिलता है। लेकिन अब यह वादा धीरे-धीरे खोखला साबित होता दिखाई दे रहा है।
आईआईटी सिस्टम के सबसे प्रमुख संस्थान, आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के साल 2024-25 के ताजा प्लेसमेंट के आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार हायरिंग रेट (भर्ती दर) में गिरावट दर्ज की गई है। इस साल संस्थान में कम कंपनियां पहुंचीं और जो औसत प्लेसमेंट प्रतिशत सामने आया है, वह बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं है।
औसत और मीडियन आंकड़ों के पीछे छिपी कड़वी हकीकत
ऊपरी तौर पर देखने पर कुछ आंकड़े जरूर राहत देने वाले लग सकते हैं। इस साल का प्लेसमेंट रेट 70% रहा है, जो पिछले साल के 75% से कम है। हालांकि, संस्थान का औसत सालाना वेतन बढ़कर 26.45 लाख रुपये और मीडियन वेतन 20 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
संस्थान का कहना है कि वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के बावजूद पिछले साल के मुकाबले दोनों आंकड़ों में 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो बेहतर सैलरी ट्रेंड को दर्शाती है।
लेकिन हकीकत यह है कि औसत और मीडियन के आंकड़े अक्सर जमीनी सच्चाई को छिपा देते हैं। इंटरनेशनल स्तर के कुछ बेहद ऊंचे पैकेज और एआई (AI) के क्षेत्र में आई तेजी के कारण कुल औसत बढ़ जाता है, जबकि बड़ी संख्या में छात्रों को बहुत मामूली ऑफर से संतोष करना पड़ता है या फिर वे ग्रेजुएशन के महीनों बाद भी नौकरी की तलाश में भटकते रहते हैं।
ऐसे में मिडिल क्लास परिवारों के लिए असली सवाल यह नहीं है कि सैलरी बढ़ रही है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या यह पैकेज उस खर्च, मानसिक दबाव और वित्तीय जोखिम के मुकाबले काफी है, जो उन्होंने उठाया है? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भी लोग इस बात की आशंका जता रहे हैं कि साल 2025 में जो औसत 26 लाख दिख रहा है, वह बहुत जल्द यानी 2027 तक सिमटकर 15 लाख के ब्रैकेट में आ सकता है।
कितना खर्च करते हैं परिवार?
अगर एक सामान्य (General) वर्ग के मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार द्वारा बच्चे को आईआईटी की सीट दिलाने पर होने वाले वास्तविक खर्च का आकलन किया जाए, तो वह कुछ इस प्रकार है:
- 2 साल की JEE कोचिंग का खर्च: 4 से 8 लाख रुपये (एक रूढ़िवादी अनुमान)
- कोचिंग के दौरान हॉस्टल और रहने का खर्च: 2 से 3 लाख रुपये
- IIT की 4 साल की ट्यूशन फीस (सामान्य श्रेणी): 8 से 10 लाख रुपये
- IIT में हॉस्टल और रहने का कुल खर्च: 4 से 6 लाख रुपये
- कुल निवेश (टोटल इन्वेस्टमेंट): 18 से 27 लाख रुपये
हालांकि आरक्षित श्रेणी के छात्रों के लिए ट्यूशन फीस कम होती है, लेकिन बिना किसी स्कॉलरशिप के पूरी फीस देने वाले सामान्य वर्ग के परिवारों के लिए यही कड़वी सच्चाई है।
बदले में क्या मिलता है?
इस भारी-भरकम निवेश के बदले जो रिटर्न मिल रहा है, वह बेहद असहज करने वाला है। इंडस्ट्री के जानकारों और प्लेसमेंट समन्वयकों (Coordinators) का इशारा है कि आने वाले एक या दो सालों में सभी आईआईटी का वास्तविक औसत प्लेसमेंट ऑफर महज 15 लाख रुपये सालाना (15 LPA) के आसपास ही रह सकता है। जब शीर्ष स्तर के आईआईटी बॉम्बे का यह हाल है, तो बाकी आईआईटी संस्थानों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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