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इमरान खान की जेल में ही हो गई मौत? पाकिस्तान में मचा हड़कंप, पत्रकार के दावे से बढ़ी चिंता

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल इमरान खान बीते लंबे वक्त से पाकिस्तान की जेल में बंद है. अब दावा किया जा रहा है कि जेल में ही इमरान खान की मौत हो गई है. पहले ये दावा किया गया था कि उनकी आंखों की रोशनी खत्म हो रही है. कुछ हद तक तो उन्हें दिखाई ही नहीं दे रहा है.

इसको लेकर उनकी बहन ने भी सरकार को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी. वहीं अब  जेल में मौत की खबर ने पड़ोसी देश की राजनीति में अचानक हलचल बढ़ा दी है. हालांकि, अभी तक इमरान खान की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. एक पाकिस्तानी पत्रकार के दावे के बाद उनकी सेहत और सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर गहराने लगे हैं.

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जस्टिस वर्मा पर लगे तीनों आरोप सिद्ध, जांच समिति ने रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को सौंपी, संसद में बताए गए मुख्य अंश

नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने और उससे जुड़े साक्ष्यों के संरक्षण को लेकर गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सिद्ध माना है.  समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट के साथ संबंधित दस्तावेज, साक्ष्य और पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड सक्षम प्राधिकारी को सौंप दिया है.  अब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. संसद में जस्टिस वर्मा पर तीनों आरोपों को मुख्य अंश भी प्रस्तुत किए गए. 

तीनों आरोपों को समिति ने माना सिद्ध

जांच समिति के सामने जस्टिस वर्मा के खिलाफ तीन मुख्य आरोप रखे गए थे. रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने Article of Charge I, II और III यानी तीनों आरोपों को जांच के बाद सिद्ध पाया. इनमें सरकारी आवास से कथित अघोषित नकदी की बरामदगी, भौतिक साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही और जांच के दौरान दिए गए स्पष्टीकरण से जुड़े आरोप शामिल थे.

पहला आरोप: सरकारी आवास के स्टोररूम में नकदी

पहला आरोप नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रेसेंट के आधिकारिक आवासीय परिसर के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से संबंधित था. रिपोर्ट के मुताबिक, वहां 500 रुपए के नोटों के रूप में नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी.

समिति ने जस्टिस वर्मा से नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर स्पष्टीकरण मांगा. हालांकि, समिति के अनुसार दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं था. इसी आधार पर जांच समिति ने पहले आरोप को सिद्ध माना.

दूसरा आरोप: साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में लापरवाही

दूसरा आरोप घटना से जुड़े भौतिक साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित नहीं रखने से संबंधित था. समिति ने पाया कि कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किए गए थे.

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि बाद में कुछ करेंसी नोट उपलब्ध नहीं पाए गए और उनके गायब होने या अनुपलब्ध होने का स्पष्ट स्पष्टीकरण सामने नहीं आया. समिति ने इसे साक्ष्यों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही और संस्थागत विफलता माना.

हालांकि, रिपोर्ट का यह निष्कर्ष यह साबित नहीं करता कि जज ने स्वयं उन नोटों को हटाया था. यह अंतर इस मामले को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.

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तीसरा आरोप: जवाब को बताया गया टालमटोल वाला

तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा की ओर से जांच के दौरान दिए गए स्पष्टीकरण से जुड़ा था. समिति ने विशेष रूप से 22 मार्च 2025 को दिए गए उनके जवाब का परीक्षण किया.

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने उनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना और कहा कि उनका रुख टालमटोल वाला था. समिति के मुताबिक, उनका जवाब संस्थागत जिम्मेदारी और अपेक्षित स्पष्टता के अनुरूप नहीं पाया गया. स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समिति ने इस आरोप को भी सिद्ध माना.

अब आगे क्या होगा?

जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट के साथ सभी संबंधित दस्तावेज, साक्ष्य और कार्यवाही का रिकॉर्ड सक्षम प्राधिकारी को सौंप दिया है. इसका मतलब है कि समिति ने अपनी जांच पूरी कर दी है और अब आगे की प्रक्रिया रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर तय होगी. 

फिलहाल समिति की रिपोर्ट में तीनों आरोपों को सिद्ध माना गया है. हालांकि, रिपोर्ट में किसी आरोप के सिद्ध पाए जाने और उसके आधार पर अंतिम दंडात्मक या संवैधानिक कार्रवाई होने के बीच का चरण अलग है. आगे सक्षम प्राधिकारी की ओर से कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाएगा.

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  Sports

Joe Root के कप्तान बनते ही England टीम से हटा मध्यरात्रि कर्फ्यू, खिलाड़ी खुद लेंगे फैसले

जो रूट के कप्तान बनने के बाद इंग्लैंड की पुरुष क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों पर लगाया गया मध्यरात्रि का कर्फ्यू हटा दिया गया है। न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरों के दौरान देर रात हुई विवादास्पद घटनाओं के बाद इंग्लैंड के प्रबंध निदेशक रॉब की ने खिलाड़ियों पर मध्यरात्रि के बाद बाहर घूमने पर प्रतिबंध लगा दिया था। पूर्व टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने इस साल जून में न्यूजीलैंड के इंग्लैंड दौरे के दौरान मैच के बाद इस कर्फ्यू का उल्लंघन किया था, जिसके कारण उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था।

इसके बाद उन्होंने अचानक ही टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी जिसके बाद रूट को दूसरी बार कप्तान नियुक्त किया गया। इंग्लैंड क्रिकेट के लिए नए युग की शुरुआत अगले सप्ताह पाकिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला के साथ होगी और रूट ने स्काई स्पोर्ट्स क्रिकेट पॉडकास्ट को बताया कि ‘‘कर्फ्यू नहीं लगने वाला है।‘‘ उन्होंने कहा, ‘‘सच कहूं तो मुझे नहीं लगता कि इसे इतना बड़ा मुद्दा बनाने की जरूरत है। कर्फ्यू के बारे में मेरा विचार यह है कि मुझे नहीं लगता कि यह कारगर है।

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अगर आप चाहते हैं कि खिलाड़ी मैदान पर जिम्मेदारी लें, तो उन्हें मैदान के बाहर भी समझदार वयस्कों की तरह व्यवहार करने और अच्छे फैसले लेने में सक्षम होना चाहिए।’’ रूट ने कहा, ‘‘यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम खुद पर नियंत्रण रखें। कई मायनों में यह मेरी और फ्लेम (टेस्ट टीम के नए मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग) की जिम्मेदारी है। लेकिन आखिरकार आप समझदार लोग हैं, आप जानते हैं कि इंग्लैंड के लिए खेलने के लिए क्या जरूरी है, आप जानते हैं कि मैदान के बाहर आपकी क्या जिम्मेदारियां हैं और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि मैदान के बाहर हम किसी भी तरह के विवाद में नहीं फंसे।

Thu, 13 Aug 2026 11:55:08 +0530

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