जस्टिस वर्मा पर लगे तीनों आरोप सिद्ध, जांच समिति ने रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को सौंपी, संसद में बताए गए मुख्य अंश
नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने और उससे जुड़े साक्ष्यों के संरक्षण को लेकर गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सिद्ध माना है. समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट के साथ संबंधित दस्तावेज, साक्ष्य और पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड सक्षम प्राधिकारी को सौंप दिया है. अब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. संसद में जस्टिस वर्मा पर तीनों आरोपों को मुख्य अंश भी प्रस्तुत किए गए.
तीनों आरोपों को समिति ने माना सिद्ध
जांच समिति के सामने जस्टिस वर्मा के खिलाफ तीन मुख्य आरोप रखे गए थे. रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने Article of Charge I, II और III यानी तीनों आरोपों को जांच के बाद सिद्ध पाया. इनमें सरकारी आवास से कथित अघोषित नकदी की बरामदगी, भौतिक साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही और जांच के दौरान दिए गए स्पष्टीकरण से जुड़े आरोप शामिल थे.
पहला आरोप: सरकारी आवास के स्टोररूम में नकदी
पहला आरोप नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रेसेंट के आधिकारिक आवासीय परिसर के स्टोररूम से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से संबंधित था. रिपोर्ट के मुताबिक, वहां 500 रुपए के नोटों के रूप में नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी.
समिति ने जस्टिस वर्मा से नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर स्पष्टीकरण मांगा. हालांकि, समिति के अनुसार दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं था. इसी आधार पर जांच समिति ने पहले आरोप को सिद्ध माना.
दूसरा आरोप: साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में लापरवाही
दूसरा आरोप घटना से जुड़े भौतिक साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित नहीं रखने से संबंधित था. समिति ने पाया कि कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किए गए थे.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि बाद में कुछ करेंसी नोट उपलब्ध नहीं पाए गए और उनके गायब होने या अनुपलब्ध होने का स्पष्ट स्पष्टीकरण सामने नहीं आया. समिति ने इसे साक्ष्यों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही और संस्थागत विफलता माना.
हालांकि, रिपोर्ट का यह निष्कर्ष यह साबित नहीं करता कि जज ने स्वयं उन नोटों को हटाया था. यह अंतर इस मामले को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.
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तीसरा आरोप: जवाब को बताया गया टालमटोल वाला
तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा की ओर से जांच के दौरान दिए गए स्पष्टीकरण से जुड़ा था. समिति ने विशेष रूप से 22 मार्च 2025 को दिए गए उनके जवाब का परीक्षण किया.
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने उनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना और कहा कि उनका रुख टालमटोल वाला था. समिति के मुताबिक, उनका जवाब संस्थागत जिम्मेदारी और अपेक्षित स्पष्टता के अनुरूप नहीं पाया गया. स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समिति ने इस आरोप को भी सिद्ध माना.
अब आगे क्या होगा?
जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट के साथ सभी संबंधित दस्तावेज, साक्ष्य और कार्यवाही का रिकॉर्ड सक्षम प्राधिकारी को सौंप दिया है. इसका मतलब है कि समिति ने अपनी जांच पूरी कर दी है और अब आगे की प्रक्रिया रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर तय होगी.
फिलहाल समिति की रिपोर्ट में तीनों आरोपों को सिद्ध माना गया है. हालांकि, रिपोर्ट में किसी आरोप के सिद्ध पाए जाने और उसके आधार पर अंतिम दंडात्मक या संवैधानिक कार्रवाई होने के बीच का चरण अलग है. आगे सक्षम प्राधिकारी की ओर से कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाएगा.
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