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'The Traitors 2' शुरू होने से एक दिन पहले अस्पताल में भर्ती हुईं श्वेता तिवारी, इस बीमारी का चल रहा इलाज

Shweta Tiwari Hospitalised: टेलिविजन की पॉपुलर एक्ट्रेस श्वेता तिवारी इन दिनों रियलिटी शो 'द ट्रेटर्स 2' (The Traitors 2) को लेकर चर्चा में हैं. ये शो 13 अगस्त से शुरू होने जा रहे हैं. लेकिन इसी बीच श्वेता तिवारी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. शो शुरू होने से एक दिन पहले एक्ट्रेस हॉस्पिटलाइज हो गई है. अचानक एक्ट्रेस के हॉस्पिटलाइन होने की खबर ने उनके फैंस को चिंता में डाल दिया है. चलिए जानते हैं, उन्हें क्या हुआ. 

श्वेता तिवारी को क्या हुआ?

मिली जानकारी के मुताबिक, 'द ट्रेटर्स 2' के प्रीमियर से पहले श्वेता तिवारी को डेंगू हो गया है इस वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सेलिब्रिटी इंस्टाग्राम पेज विरल भयानी के मुताबिक, श्वेता डेंगू जैसी बीमारी से पीड़ित हैं. उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. फिलहाल उनका इलाज अभी जारी है और वो खतरे से बाहर हैं. हालांकि, अभी तक एक्ट्रेस के परिवार या टीम की ओर से उनकी  हेल्थ को लेकर कोई जानकारी शेयर नहीं की गई है.

इन एक्ट्रेसेस को भी हुआ डेंगू

श्वेता तिवारी को डेंगू होने की खबर के बाद उनके फैंस उनकी सेहत को लेकर चिंतित हैं. वहीं, बता दें कि  श्वेता से पहले टीवी एक्ट्रेस अविका गौर और एक्ट्रेस स्वरा भास्कर के भी डेंगू की चपेट में आने की खबरें सामने आई थीं. यानी मनोरंजन जगत से हाल के दिनों में अब तक इन तीन सितारों के डेंगू से संक्रमित होने की जानकारी सामने आ चुकी है. बारिश के मौसम में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच सेलेब्स के बीमार पड़ने की खबरों ने एक बार फिर इस बीमारी को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

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'द ट्रेटर्स 2' के प्रोमो में छाई श्वेता

बता दें, लंबे समय के बाद  श्वेता तिवारी कोई रियलिटी शो करने जा रही हैं. कुछ दिनों पहले ही शो का प्रोमो टीजर  रिलीज किया गया था. जिसमें कंटेस्टेंट्स के बीच कुछ खास पल दिखाए गए  थे. वीडियो में श्वेता तिवारी भी नजप आई थी, वो कहती हैं, 'अपने पतियों को धोखा देते हुए मैंने ही पकड़ा था' इसपर करण जवाब देते हैं, 'झूठ को पकड़ने में आप इतनी माहिर तो नहीं हो सकतीं.' अब देखना होगा कि शो में श्वेता कैसा खेलती हैं.

कब से देख सकेंगे ‘द ट्रेटर्स 2’?

‘द ट्रेटर्स 2’ की बात करे तो ये शो 13 अगस्त 2026 से प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम होने जा रहा है. इस बार शो को फिर से करण जौहर होस्ट कर रहे हैं और पहले सीजन के मुकाबले कंटेस्टेंट्स की संख्या बढ़ाकर 21 कर दी गई है. शो में खिलाड़ियों को ‘फेथफुल’ और ‘ट्रेटर्स’ के बीच बांटा जाएगा, जहां भरोसे, चालाकी और धोखे के दम पर आगे बढ़ना होगा. वहीं, शो शुरू होने से पहले ही इसके कआ वीडियोज वायरल हो रहे हैं और फैंस की एक्साइटमेंट काफी ज्यादा है.

‘द ट्रेटर्स 2’ के कंटेस्टेंट्स

इस सीजन में  श्वेता तिवारी के अलावा मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारूकी, अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान), आदित्य कुलश्रेष्ठ (कुल्लू), रिया चक्रवर्ती, क्रिस्टल डिसूजा, शहनील गिल, रैपर रफ्तार, संजय कपूर, शालिनी पासी, दलीप ताहिल, साहिल सलाथिया, पारुल गुलाटी समेत कई चर्चित चेहरे नजर आएंगे. शो में टीवी, बॉलीवुड, कॉमेडी, सोशल मीडिया और फैशन से जुड़े अलग-अलग बैकग्राउंड के लोग एक ही गेम में आमने-सामने होंगे. ऐसे में इस सीजन में ड्रामा और रणनीति दोनों देखने को मिलेगी.

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Explainer: चीन अरुणाचल प्रदेश पर क्यों करता है दावा? तिब्बत, तवांग और मैकमोहन लाइन का क्या है कनेक्शन

भारत और चीन के बीच सीमा का विवाद दशकों पुराना है. चीन भारत के अभिन्न अंग लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के हिस्सों को अपना बताता है. अरुणाचल प्रदेश भारत और चीन के सीमा विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा है. वह अरुणाचल के बड़े हिस्से को अपना बताता है. चीन इसे जांगनान यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है. चीन के इस दावे को भारत पूर्ण रूप से खारिज करता है. भारत ने हर बार अरुणाचल को भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग बताया है.  

आखिर में सवाल है कि आखिर अरुणाचल प्रदेश पर चीन हमेशा दावा क्यों करता है? आखिर इस विवाद में तिब्बत, तवांग और 1914 की मैकमोहन लाइन की क्या भूमिका है? आइये जानते हैं….

सबसे पहले समझिए अरुणाचल प्रदेश का महत्व

अरुणाचल प्रदेश भारत के पूर्वोत्तर में स्थित एक राज्य हैै. इसकी सीमा भूटान, म्यांमार और चीन के साथ लगती है. भारत-चीन सीमा के पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा आता है. चीन करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर वाले भारतीय इलाके को अपना कहता है. ये इलाका सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं है. इसकी भौगोलिक स्थिति बहुत ज्यादा रणनीतिक है. यहीं हिमालयी दर्रों के जरिए तिब्बत के पठार की ओर जाने वाला रास्ता है. इसके अलावा, तवांग का धार्मिक और सामरिक महत्व इसे और अधिक संवेदनशील बना देता है. 

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तिब्बत का इस विवाद से क्या संबंध है?

अरुणाचल पर चीन के दावे को समझने के लिए तिब्बत सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. साल 1914 में जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब तिब्बत और ब्रिटिश भारत के बीच सीमा तय करने के लिए शिमला में एक सम्मेलन हुआ. इसमें ब्रिटिश भारत, तिब्बत और चीन के प्रतिनिधि शामिल हुए थे. इसी प्रक्रिया में भारत और तिब्बत के बीच सीमा के लिए जिस रेखा का निर्धारण हुआ, उसे बाद में मैकमोहन लाइन कहा गया.

चीन तर्क देता है कि उस वक्त तिब्बत को स्वतंत्र रूप से इंटरनेशनल समझौते करने का अधिकार नहीं था. इसलिए चीन 1914 में तय हुई सीमा को स्वीकार नहीं करता है. चीन का कहना है कि तिब्बत चीन का हिस्सा था और तिब्बती प्रतिनिधि को ब्रिटिश भारत के साथ ऐसी सीमा तय करने का अधिकार नहीं था. चीन के उलट भारत की स्थिति अलग है. भारत मैकमोहन लाइन को पूर्वी सीमा की वैध ऐतिहासिक सीमा कहता है. 

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क्या है 1914 की मैकमोहन लाइन?

अब बात विवाद की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी- मैकमोहन लाइन. 1913-14 में शिमला सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर हेनरी मैकमोहन ने भारत और तिब्बत के बीच सीमा का निर्धारण किया था. ये रेखा करीब 890 किलोमीटर लंबी है. इस सीमा को हिमालय के पहाड़ी क्षेत्र को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था. इस दौरान, तवांग भारतीय सीमा की ओर आ गया था. लेकिन चीन ने शिमला सम्मेलन की अंतिम व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया. 

तवांग इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

अरुणाचल विवाद की कोई सबसे संवेदनशील जगह है- तवांग. तवांग भारत का हिस्सा है, जो तिब्बत के भी करीब है. तवांग सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से भी ये काफी ज्यादा अहम है. तवांग मठ तिब्बती बौद्ध धर्म की प्रमुख संस्थाओं में से एक है. इसका संबंध तिब्बती बौद्ध परंपरा और दलाई लामा की संस्था से रहा है. छठ दलाईलामा का जन्म तवांग में ही हुआ था. 

चीन तवांग और ल्हासा के बीच पुराने धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों का हवाला देता है. चीन का तर्क है कि तवांग का ऐतिहासिक रूप से तिब्बत के धार्मिक संस्थाओं से संबंध रहा है, जिस वजह से यह क्षेत्र दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है. सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को आधुनिक इंटरनेशनल सीमा का निर्णायक आधार मानना भारत स्वीकार नहीं करता है. 

चीन अरुणाचल को ‘दक्षिणी तिब्बत’ क्यों कहता है?

चीन अरुणाचल को आधिकारिक तौर पर भारत का राज्य मानने से इनकार करता है. वह इसे दक्षिणी तिब्बत कहता है. अप्रैल 2026 में चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि जांगनान चीन का क्षेत्र है. चीन अरुणाचल प्रदेश नाम को मान्यता नहीं देता है. चीन का तर्क तिब्बत की ऐतिहासिकता से जुड़ा है और अरुणाचल तिब्बत के दक्षिण में है, जिस वजह से चीन इसे दक्षिणी तिब्बत कहता है. 

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फिर 1962 का युद्ध क्यों हुआ?

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद 1950 और 1960 के दशक में तेजी से बढ़ा, जिस वजह से भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ गया. 1962 में दोनों देशों के बीच युद्ध हो गया. युद्ध में भारतीय सेना को पीछे हटना पड़ा. बाद में चीन ने भी अपनी सेना वापस बुला ली. युद्ध के बाद भी सीमा विवाद का समाधान नहीं हुआ. आज भारत और चीन के बीच पूरी सीमा पर Line of Actual Control यानी LAC है, लेकिन दोनों देशों की LAC की धारणा पूरी तरह समान नहीं है. पूर्वी सेक्टर में LAC का बड़ा हिस्सा मैकमोहन लाइन के आसपास माना जाता है।

चीन बार-बार अरुणाचल के स्थानों के नाम क्यों बदलता है?

वक्त-वक्त पर चीन अरुणाचल के शहरों, गांवों, पहाड़ों और अन्य भौगौलिक स्थानों के लिए चीनी नाम जारी करता है. भारत का कहना है कि इस प्रकार से असल में देश की संप्रभुता नहीं बदलती है. भारत 2023 और 2024 में भी चीन की ऐसी कोशिशों को खारिज कर चुका है. चीन ने 2026 में भी जांगनान क्षेत्र के कुछ स्थानों के लिए मानकीकृत नाम जारी किए. चीन इसे अपने प्रशासनिक अधिकारों के तहत उठाया गया कदम बताता है. भारत इसे अपने क्षेत्र पर गलत दावा मजबूत करने की कोशिश मानता है.

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  Sports

Ajinkya Rahane Test Debut as Commentator: मैदान के बाद अब Commentary Box में दिखेगा भारतीय दिग्गज का जलवा

 भारत के पूर्व बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे श्रीलंका में होने वाली दो मैचों की श्रृंखला से टेस्ट कमेंट्री में पदार्पण करेंगे। उन्हें 15 अगस्त को गॉल में शुरू होने वाली श्रृंखला के लिए सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के कमेंट्री पैनल में शामिल किया गया है। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने के बाद लगभग 18 वर्षों तक चले अपने शानदार खेल करियर को हाल में अलविदा कहने वाले 37 वर्षीय रहाणे अब कमेंटेटर के रूप में नई भूमिका में नजर आएंगे। रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट मैच में 38.46 के औसत से 5,077 रन बनाए, जिनमें 12 शतक और 26 अर्धशतक शामिल हैं।

उनके नेतृत्व में भारत ने 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट श्रृंखला जीती थी। रहाणे ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘मैं सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क और सोनी लिव पर भारत के श्रीलंका दौरे के दौरान टेस्ट कमेंट्री की शुरुआत करने को लेकर उत्साहित हूं। टेस्ट क्रिकेट हमारे खेल का चरम बिंदु है और इतने वर्षों तक इस प्रारूप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब खेल को एक अलग दृष्टिकोण से देखना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने अनुभव साझा करने, खेल की बारीकियों को समझाने और प्रशंसकों को उन फैसलों, रणनीति और क्षण के बारे में जानकारी देने के लिए उत्सुक हूं जो टेस्ट मैच का रुख बदल सकते हैं।

Wed, 12 Aug 2026 12:28:54 +0530

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