कुछ ही सेकंड की इस वीडियो क्लिप में दादा-पोती के बीच हुई छोटी-सी बातचीत और उनके चेहरे के हाव-भाव ने सोशल मीडिया यूजर्स को अंदर तक झकझोर दिया है. इंस्टाग्राम पर @ray.ana1818 अकाउंट से शेयर हुआ यह वीडियो इंटरनेट पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है.
Preity Zinta chat with Shreyas Iyer: आरसीबी ने आईपीएल 2026 के 61वें मुकाबले में पंजाब को 27 रन से हरा दिया है. इस हार के बाद पंजाब की सह-मालकिन प्रीति जिंटा और कप्तान श्रेयस अय्यर काफी मायूस नजर आ रहे हैं.
CIC Decision on BCCI RTI Case: भारतीय क्रिकेट प्रशासन से जुड़ा एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया। केंद्रीय सूचना आयोग ने साफ कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सूचना के अधिकार यानी आरटीआई कानून के दायरे में नहीं आता। इस फैसले के बाद दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड को अब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी सार्वजनिक करने की बाध्यता नहीं होगी।
यह फैसला सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने सुनाया। इसके साथ ही 2018 से चल रहा लंबा विवाद भी खत्म हो गया। दरअसल, साल 2018 में तत्कालीन सूचना आयुक्त एम श्रीधर ने बीसीसीआई को आरटीआई एक्ट की धारा 2(h) के तहत पब्लिक अथॉरिटी माना था और बोर्ड को पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर नियुक्त करने का निर्देश दिया था। हालांकि बीसीसीआई ने इस फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
बीसीसीआई आरटीआई दायरे में नहीं आएगा बाद में कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सीआईसी के पास भेज दिया। अब नई सुनवाई में आयोग ने कहा कि बीसीसीआई सूचना के अधिकार कानून में तय 'पब्लिक अथॉरिटी' की शर्तों को पूरा नहीं करता।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बीसीसीआई तमिलनाडु सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड एक संस्था है। इसे न तो संविधान के तहत बनाया गया है और न ही संसद के किसी कानून के जरिए स्थापित किया गया है।
केंद्रीय सूचना आयोग का बड़ा फैसला सीआईसी ने अपने फैसले में कई अहम कारण गिनाए। आयोग के मुताबिक सरकार का बीसीसीआई के कामकाज में कोई गहरा या व्यापक नियंत्रण नहीं है। बोर्ड अपने फैसले खुद लेता है और प्रशासनिक तौर पर स्वतंत्र है। दूसरा बड़ा कारण उसकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बताई गई। आयोग ने कहा कि बीसीसीआई मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री से खुद कमाई करता है। वह सरकारी फंडिंग पर निर्भर नहीं है।
फैसले में यह भी साफ किया गया कि टैक्स छूट या कानून के तहत मिलने वाली सुविधाओं को सरकारी फंडिंग नहीं माना जा सकता। इसलिए बीसीसीआई को सरकारी सहायता प्राप्त संस्था नहीं कहा जा सकता।
आईपीएल और भारतीय बाजार का भी जिक्र अपने फैसले में आयोग ने बीसीसीआई की आर्थिक ताकत और इंडियन प्रीमियर लीग की सफलता का भी जिक्र किया। आयोग ने कहा कि बीसीसीआई अब वैश्विक क्रिकेट का आर्थिक केंद्र बन चुका और इसकी ताकत भारतीय बाजार और आईपीएल से आती है। सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने कहा कि सिर्फ सरकारी नियंत्रण बढ़ाने से पारदर्शिता की गारंटी नहीं मिलती। उन्होंने माना कि ऐसे बड़े और व्यावसायिक ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहतर नियामक व्यवस्था से लाई जा सकती है।
यह मामला तब शुरू हुआ था जब खेल मंत्रालय के पास एक आरटीआई आवेदन दाखिल किया गया था। मंत्रालय ने जवाब दिया था कि उसके पास मांगी गई जानकारी नहीं है और वह आवेदन बीसीसीआई को ट्रांसफर भी नहीं कर सकता क्योंकि बोर्ड निजी संस्था है। अब केंद्रीय सूचना आयोग के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए संसद में नया कानून या विशेष सरकारी आदेश लाना होगा।