Gadchiroli snakebite: CM देवेंद्र फडणवीस ने रद्द किया आश्रमशाला का लाइसेंस
महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में सरकारी सहायता-प्राप्त एक आवासीय विद्यालय में ज़हरीले सांप के काटने से हुई तीन आदिवासी लड़कियों की दुखद मौत ने इस स्कूल की खराब हालत और कथित लापरवाही की पोल खोल दी है, जिसके चलते मंगलवार को उसका लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया गया और एक अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। यह घटना रविवार करीब आधी रात धनोरा तालुका से लगभग 10 किलोमीटर दूर जप्तलाई गांव के छात्रावास में हुई। छात्रावास के फ़र्श पर सो रही छह लड़कियों को एक ज़हरीले सांप ने डस लिया।
अधिकारियों ने बताया था कि आठ साल की एक बच्ची समेत तीन लड़कियों की मौत हो गयी, जबकि तीन का इलाल चल रहा है। इस घटना को लेकर विपक्ष के निशाने पर आये मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को इस आवासीय विद्यालय का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने तथा हाल में उसका निरीक्षण कर कमियों के बावजूद अनुकूल रिपोर्ट सौंपने वाले अधिकारी को निलंबित करने का आदेश दिया। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने राज्य में आदिवासी बच्चों से जुड़े 500 से अधिक आवासीय विद्यालयों (आश्रमशालाओं) का तीसरी पार्टी से ‘ऑडिट’ कराने का भी निर्णय लिया है।
संबंधित आवासीय विद्यालय कांग्रेस के पूर्व मंत्री मारोतराव कोवासे चलाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अनुदान मिलने के बावजूद स्कूल में न तो शिक्षक हैं और न ही कोई वार्डन और वहां बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सिर्फ़ मुख्य सड़कों पर स्थित स्कूलों की ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ और अंदरूनी इलाकों के स्कूलों की भी जांच करें।
फडणवीस ने मुख्य सचिव से बैठक बुलाने और राज्य भर के आश्रमशालाओं के लिए एक व्यापक निरीक्षण व्यवस्था बनाने को कहा। आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल को इस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उइके ने कहा कि रविवार रात जब सांप छात्रावास में घुसा तब 50 लड़कियां नीचे सो रही थीं।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सरकार महाराष्ट्र में लगभग 511 सहायता प्राप्त आदिवासी आवासीय स्कूलों का तीसरी पार्टी से ‘ऑडिट’ भी कराएगी। उइके ने सवाल उठाया कि इस आश्रम स्कूल को इस तरह कैसे चलाया जा रहा था कि लड़कियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गयी। इस घटना की विपक्ष ने कड़ी आलोचना की।
शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि गढ़चिरोली, नंदुरबार और चंद्रपुर में आदिवासी आवासीय स्कूलों की हालत खराब है। उन्होंने दावा किया कि वहां सांप और बिच्छू के काटने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसी कई मौतों का रिकॉर्ड ही नहीं रखा जाता।
एक विवादित बयान में राउत ने कहा कि आदिवासी लोगों को मंत्रियों के घरों में सांप और बिच्छू छोड़ देने चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि ऐसे स्कूलों में बच्चे किस तरह के डर का सामना करते हैं। उन्होंने गढ़चिरोली के प्रभारी मंत्री फडणवीस पर भी निशाना साधा और नैतिक आधार पर आदिवासी समुदाय के मंत्रियों से इस्तीफे की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया और महायुति सरकार के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
इस घटना को ‘बेहद गंभीर’ बताते हुए सपकाल ने सवाल उठाया कि क्या आदिवासी विकास विभाग ने यह सुनिश्चित किया था कि छात्रावास को पर्याप्त अनुदान और बुनियादी सुविधाएं मिलें। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ स्कूल का लाइसेंस रद्द करने से सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकती; उनका तर्क था कि प्रशासन को सभी सहायता प्राप्त संस्थानों में उचित सुविधाओं और सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए।
Kota JK Lon Hospital में सीजेरियन के बाद महिला की मौत, पति ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप
कोटा के जेके लोन अस्पताल में मंगलवार को ‘सीजेरियन’ प्रसव के बाद 25 वर्षीय महिला की मौत हो गई। पिछले 24 घंटे में अस्पताल में यह प्रसव के बाद मां की मौत का दूसरा मामला है। चिकित्सकों ने महिला की मौत का कारण दौरे पड़ना और सांस संबंधी जटिलताएं बताया है।
मृतका की पहचान कोटा जिले के कैथून क्षेत्र के लाडपुरा गांव निवासी आमिर खान की पत्नी करीना के रूप में हुई है। अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि मंगलवार दोपहर प्रसव पीड़ा होने पर करीना को अस्पताल लाया गया था। सीजेरियन के जरिए उसने जुड़वां बच्चों - एक लड़के और एक लड़की को जन्म दिया।
हालांकि, प्रसव के कुछ ही देर बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। इससे एक दिन पहले सोमवार सुबह 34 वर्षीय गंगोत्री की भी अस्पताल में ऐसी ही परिस्थितियों में मौत हुई थी। जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में करीना का रक्तचाप सामान्य था, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उसका रक्तचाप काफी बढ़ा हुआ था।
उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा रिकॉर्ड के अनुसार करीना को गर्भावस्था के सातवें महीने से रक्तचाप की दवा लेने की सलाह दी गई थी, लेकिन मरीज को इसकी जानकारी नहीं थी। शर्मा ने बताया कि बढ़े हुए रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए उसका प्रसव कराना जरूरी चिकित्सकीय कदम था, इसलिए चिकित्सकों ने आपातकालीन सीजेरियन किया। प्रसव के बाद करीना का शरीर अचानक ठंडा पड़ने लगा, जिसके बाद चिकित्सकों ने जरूरी दवाएं दीं।
अस्पताल अधीक्षक के अनुसार, दौरे पड़ने के दौरान कुछ पदार्थ सांस की नली में चले जाने से ‘एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम’ (एआरडीएस) हुआ। इसके साथ ही उसे ‘डिसेमिनेटेड इंट्रावास्कुलर कोएगुलेशन’ (डीआईसी) और प्रसव के बाद होने वाला ‘एक्लेम्पसिया’ भी हुआ। उन्होंने बताया कि डीआईसी के कारण शरीर के कई हिस्सों से रक्तस्राव हुआ और पेशाब में भी खून आने लगा।
प्रसव के बाद हुए एक्लेम्पसिया के कारण उसे दौरे पड़े, जिससे रक्त में ऑक्सीजन का स्तर 86 प्रतिशत से गिरकर 62 प्रतिशत और रक्तचाप 90/60 एमएमएचजी तक पहुंच गया। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। वहीं, करीना के पति आमिर खान ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले में गड़बड़ी की आशंका जताई है।
उन्होंने कहा कि एक तरल पदार्थ चढ़ाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। खान ने दावा किया कि करीना रात तक पूरी तरह स्वस्थ थी और रात में पानी मांग रही थी। उनके अनुसार, अस्पताल में छोटी बोतल से तरल पदार्थ चढ़ाए जाने के बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई।
उन्होंने यह भी दावा किया कि करीना गर्भावस्था के दौरान हर महीने सरकारी चिकित्सक से जांच करवाती थी और नौ महीने के दौरान चिकित्सक ने किसी तरह की जटिलता के बारे में नहीं बताया था।
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