पंजाब में शिक्षा क्रांति का असर, 416 सरकारी स्कूलों का 12वीं रिजल्ट रहा 100 प्रतिशत
पंजाब में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भगवंत मान सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब जमीन पर नजर आने लगे हैं. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) के 12वीं कक्षा के नतीजों में इस बार सरकारी स्कूलों ने नया इतिहास रच दिया. राज्य के 416 सरकारी स्कूलों ने 100 प्रतिशत परिणाम दर्ज किया है, जिसे सरकार अपनी “शिक्षा क्रांति” का बड़ा परिणाम मान रही है.
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चंडीगढ़ में 12वीं कक्षा के टॉपर विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए कहा कि पंजाब की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में नया इतिहास लिख रही हैं और राज्य के पुनरुत्थान में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं.
तीन छात्राओं ने हासिल किए पूरे 500 अंक
इस बार मानसा की सुपनीत कौर और लुधियाना की सुहानी चौहान व दिवांशी ने 500 में 500 अंक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने तीनों छात्राओं को 50-50 हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बेहद गर्व की बात है कि तीनों टॉपर छात्राएं राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खिलाड़ी भी हैं. इससे साबित होता है कि पंजाब की बेटियां शिक्षा, खेल और अन्य क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रही हैं.
सरकारी स्कूलों पर बढ़ा लोगों का भरोसा
पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे, स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया है. इसका असर इस बार के नतीजों में साफ दिखाई दिया. मेरिट सूची में शामिल 275 विद्यार्थियों में से 122 छात्र सरकारी स्कूलों से हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बदलाव सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लोगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि साधारण परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों ने मेहनत और लगन से यह सफलता हासिल की है.
लड़कियों ने फिर छोड़ा लड़कों को पीछे
12वीं बोर्ड परीक्षा में लड़कियों ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए लड़कों को पीछे छोड़ दिया. इस वर्ष लड़कियों का पास प्रतिशत 94.73 प्रतिशत रहा, जबकि लड़कों का परिणाम 88.52 प्रतिशत दर्ज किया गया.
मेरिट सूची में भी लड़कियों का दबदबा कायम रहा. कुल 278 मेरिट होल्डर्स में 217 लड़कियां और केवल 61 लड़के शामिल रहे.
अमृतसर और पटियाला ने मारी बाजी
राज्य में सबसे अधिक पास प्रतिशत अमृतसर जिले का रहा, जहां 96 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए. वहीं मेरिट सूची में पटियाला जिले ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और यहां से 59 विद्यार्थी मेरिट में शामिल हुए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में लगातार सुधार कर रही है ताकि पंजाब के युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें.
लड़कियों को सेना में जाने के लिए प्रेरित किया
कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा ने भारतीय वायुसेना में पायलट बनने की इच्छा जताई. इस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उसे मोहाली स्थित माई भागो आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया.
उन्होंने कहा कि यह संस्थान लड़कियों को रक्षा सेवाओं में अधिकारी बनने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करता है और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण देता है.
दिल्ली-NCR में E- वाहनों का होगा रिजस्ट्रेशन, प्रदूषण घटाने पर बड़ा फैसला
Delhi News: दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में हर साल सर्दियों के दस्तक देते ही हवा का दम घुटने लगता है. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने तीन ऐसे बड़े फैसले लिए हैं जो आम जनता से लेकर कमर्शियल वाहन बाजार और किसानों तक सीधे जुड़े हैं.
क्या है नए नियमों का मकसद?
इन नए नियमों का मकसद दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा को पूरी तरह से साफ और रहने लायक बनाना है. अगर आप दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद या गुरुग्राम जैसे शहरों में रहते हैं, तो आपके लिए इन बदलावों को जानना बेहद जरूरी है क्योंकि यह आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह बदलने वाले हैं.
बिना पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा गाड़ी में तेल
आमतौर पर देखा जाता है कि लोग अपनी गाड़ियों का प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र यानी पीयूसी बनवाने में काफी लापरवाही करते हैं. बहुत से लोग सिर्फ भारी-भरकम चालान से बचने के लिए ही इसे समय पर रिन्यू कराते हैं. लेकिन अब यह ढुलमुल रवैया नहीं चलेगा. नए आदेश के मुताबिक, पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 1 अक्टूबर 2026 से 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपकी गाड़ी का प्रदूषण सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है, तो किसी भी पेट्रोल पंप पर आपको ईंधन नहीं दिया जाएगा. पेट्रोल पंप संचालकों को इस नियम का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से दूर रखा जा सके.
सड़कों पर दौड़ेगी सिर्फ ग्रीन गाड़ियां
सड़कों पर बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए कमर्शियल वाहनों के बाजार में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है. सवारी ढोने वाले और माल ढुलाई करने वाले थ्री-व्हीलर (L5 कैटेगरी) के लिए नए नियम तय कर दिए गए हैं. अब भविष्य सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का ही होगा. तय योजना के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से देश की राजधानी दिल्ली में किसी भी नए पेट्रोल, डीजल या सीएनजी ऑटो रिक्शा का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा. दिल्ली में इस तारीख के बाद सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ही पंजीकृत हो सकेंगे.
सिर्फ दिल्ली तक सीमित नए नियम
यह नियम सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका दायरा धीरे-धीरे पूरे एनसीआर में फैलाया जाएगा. दिल्ली के बाद 1 जनवरी 2028 से गुरुग्राम, फरीदाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद और सोनीपत जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों में भी पेट्रोल-डीजल और सीएनजी से चलने वाले नए थ्री-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा. इसके बाद, अंतिम चरण में 1 जनवरी 2029 से पूरे बचे हुए एनसीआर क्षेत्र में इस नियम को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा, जिसके बाद केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ही सड़कों पर उतर सकेंगे.
खेतों में आग लगाने वालों पर नजर रखेगी स्पेशल फोर्स
सर्दियों के मौसम में दिल्ली-एनसीआर की हवा बिगड़ने का एक बड़ा कारण पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के खेतों में बड़े पैमाने पर पराली जलाया जाना है. आसमान में छाने वाले इस जहरीले धुएं को रोकने के लिए आयोग ने 'डायरेक्शन नंबर 99' जारी किया है. इसके तहत राज्य सरकारों को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट एक्शन प्लान सौंप दिया गया है.
'पराली प्रोटेक्शन फोर्स' का होगा गठन
इस योजना के तहत खेतों से उठने वाले धुएं को रोकने के लिए एक विशेष 'पराली प्रोटेक्शन फोर्स' का गठन किया जा रहा है. यह फोर्स सीधे तौर पर खेतों की निगरानी करेगी. इसके साथ ही आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए हर खेत की डिजिटल मैपिंग की जाएगी, जिससे सेटेलाइट के जरिए आग लगने की घटनाओं पर तुरंत नजर रखी जा सके.
होगी नोडल अधिकारियों की तैनाती
इस पूरे काम की जिम्मेदारी तय करने के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती की जाएगी, जो किसी भी लापरवाही के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे. प्रशासन का एकमात्र लक्ष्य यही है कि साल 2026 के धान कटाई सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह से शून्य पर लाया जा सके ताकि दिल्ली वालों को साफ हवा मिल सके.
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