दिल्ली-NCR में E- वाहनों का होगा रिजस्ट्रेशन, प्रदूषण घटाने पर बड़ा फैसला
Delhi News: दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में हर साल सर्दियों के दस्तक देते ही हवा का दम घुटने लगता है. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने तीन ऐसे बड़े फैसले लिए हैं जो आम जनता से लेकर कमर्शियल वाहन बाजार और किसानों तक सीधे जुड़े हैं.
क्या है नए नियमों का मकसद?
इन नए नियमों का मकसद दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा को पूरी तरह से साफ और रहने लायक बनाना है. अगर आप दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद या गुरुग्राम जैसे शहरों में रहते हैं, तो आपके लिए इन बदलावों को जानना बेहद जरूरी है क्योंकि यह आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह बदलने वाले हैं.
बिना पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा गाड़ी में तेल
आमतौर पर देखा जाता है कि लोग अपनी गाड़ियों का प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र यानी पीयूसी बनवाने में काफी लापरवाही करते हैं. बहुत से लोग सिर्फ भारी-भरकम चालान से बचने के लिए ही इसे समय पर रिन्यू कराते हैं. लेकिन अब यह ढुलमुल रवैया नहीं चलेगा. नए आदेश के मुताबिक, पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 1 अक्टूबर 2026 से 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया जाएगा. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपकी गाड़ी का प्रदूषण सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है, तो किसी भी पेट्रोल पंप पर आपको ईंधन नहीं दिया जाएगा. पेट्रोल पंप संचालकों को इस नियम का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से दूर रखा जा सके.
सड़कों पर दौड़ेगी सिर्फ ग्रीन गाड़ियां
सड़कों पर बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए कमर्शियल वाहनों के बाजार में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है. सवारी ढोने वाले और माल ढुलाई करने वाले थ्री-व्हीलर (L5 कैटेगरी) के लिए नए नियम तय कर दिए गए हैं. अब भविष्य सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का ही होगा. तय योजना के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से देश की राजधानी दिल्ली में किसी भी नए पेट्रोल, डीजल या सीएनजी ऑटो रिक्शा का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा. दिल्ली में इस तारीख के बाद सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ही पंजीकृत हो सकेंगे.
सिर्फ दिल्ली तक सीमित नए नियम
यह नियम सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका दायरा धीरे-धीरे पूरे एनसीआर में फैलाया जाएगा. दिल्ली के बाद 1 जनवरी 2028 से गुरुग्राम, फरीदाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद और सोनीपत जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों में भी पेट्रोल-डीजल और सीएनजी से चलने वाले नए थ्री-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा. इसके बाद, अंतिम चरण में 1 जनवरी 2029 से पूरे बचे हुए एनसीआर क्षेत्र में इस नियम को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा, जिसके बाद केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ही सड़कों पर उतर सकेंगे.
खेतों में आग लगाने वालों पर नजर रखेगी स्पेशल फोर्स
सर्दियों के मौसम में दिल्ली-एनसीआर की हवा बिगड़ने का एक बड़ा कारण पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के खेतों में बड़े पैमाने पर पराली जलाया जाना है. आसमान में छाने वाले इस जहरीले धुएं को रोकने के लिए आयोग ने 'डायरेक्शन नंबर 99' जारी किया है. इसके तहत राज्य सरकारों को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट एक्शन प्लान सौंप दिया गया है.
'पराली प्रोटेक्शन फोर्स' का होगा गठन
इस योजना के तहत खेतों से उठने वाले धुएं को रोकने के लिए एक विशेष 'पराली प्रोटेक्शन फोर्स' का गठन किया जा रहा है. यह फोर्स सीधे तौर पर खेतों की निगरानी करेगी. इसके साथ ही आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए हर खेत की डिजिटल मैपिंग की जाएगी, जिससे सेटेलाइट के जरिए आग लगने की घटनाओं पर तुरंत नजर रखी जा सके.
होगी नोडल अधिकारियों की तैनाती
इस पूरे काम की जिम्मेदारी तय करने के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती की जाएगी, जो किसी भी लापरवाही के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे. प्रशासन का एकमात्र लक्ष्य यही है कि साल 2026 के धान कटाई सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह से शून्य पर लाया जा सके ताकि दिल्ली वालों को साफ हवा मिल सके.
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