कैंसर का नाम सुनते ही हम परेशान हो उठते हैं। लेकिन अगर शरीर में होने वाले हर अच्छे बुरे बदलाव पर ध्यान दिया जाए, तो किसी भी गंभीर बीमारी का आसानी से पता लगाया जा सकता है। ऐसी ही एक बीमारी टेस्टिकुलर कैंसर है। यह कैंसर 15 से 40 साल के आयु वाले पुरुषों में सबसे ज्यादा आम कैंसरों में से एक है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर शुरूआती स्टेज में ही इस बीमारी का पता चल जाए, तो इससे छुटकारा भी मिल सकता है।
टेस्टिकुलर कैंसर के शुरूआती लक्षण बेहद सामान्य होते हैं। जैसे टेस्टिकुलर में सूजन या लम्प, स्क्रोटम में भारीपन महसूस होना या लोअर बैक में दर्द महसूस होना आदि है। युवा पुरुषों को टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों को समझना जरूरी है। आसान भाषा में समझा जाए, तो टेस्टिकल्स में बनने वाले ट्यूमर या गांठ को टेस्टिकुलर कैंसर कहा जाता है।
जानें टेस्टिकुलर कैंसर के वार्निंग साइन
टेस्टिकुलर कैंसर अन्य कैंसर की तुलना में धीरे-धीरे बढ़ता है। इसलिए कई बार लोग इसके लक्षणों को इग्नोर कर देते हैं। तो आइए जानते हैं टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षण क्या हैं, जिनको समझकर आप इस गंभीर बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।
टेस्टिकल्स में सूजन
टेस्टिकल्स में सूजन या फिर लम्प की समस्या शुरू हो सकती है। यह सबसे बड़ा संकेत होता है कि एक अंडकोष में बिना दर्द की गांठ या फिर सूजन होना है। क्योंकि हर गांठ कैंसर नहीं होती है। लेकिन फिर भी असामान्य बदलाव की जांच करवानी चाहिए। वहीं कुछ पुरुषों को महसूस हो सकता है कि अंडकोष सामान्य से भारी, बड़ा या ज्यादा सख्त है।
टेस्टिकल्स में बदलाव
अगर आपको टेस्टिकल्स के साइज या शेप में अचानक कुछ बदलाव महसूस हो, तो आपको डॉक्टर से साथ इस बदलाव को शेयर करना चाहिए।
स्क्रोटम में भारीपन
स्क्रोटम में बिना लम्प या गांठ के भी भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए अगर आपको भी भारीपन महसूस हो रहा है। तो इसको इग्नोर करने की गलती नहीं करनी चाहिए।
कमर या पेट के निचले हिस्से में दर्द
टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों में पेट के निचले हिस्से में दर्द, अंडकोश में हल्का दर्द, जांघों के जोड़ या बेचैनी आदि महसूस हो सकती है। अंडोकोष में लगातार दर्द या भारीपन महसूस होना आदि लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में अंडकोष को आसपास तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिस कारण भी सूजन हो सकती है।
स्क्रोटम में दर्द
अधिकतर मामलों में कैंसर की गांठ में दर्द नहीं होता है। हालांकि कुछ मामलों में स्क्रोटम में जलन या फिर दर्द जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में अगर आपको दो सप्ताह से अधिक दर्द रहता है, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
स्क्रोटम में तरल पदार्थ
टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों में स्क्रोटम में तरल पदार्थ का जमा होना भी है। स्क्रोटम में तरल पदार्थ की वजह से सूजन की समस्या हो सकती है।
लोअर बैक में दर्द
अगर लोअर बैक में दर्द महसूस हो रहा है। तो बता दें कि कई बार टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों में बिना कारण थकान, पीठ दर्द, वेट कम होना या फिर सांस लेने में तकलीफ होना जैसी समस्या हो सकती है।
ब्रेस्ट में सूजन होना
टेस्टिकुलर ट्यूमर ऐसा हॉर्मोन सीक्रेट कर सकता है, जिसकी वजह से मेल ब्रेस्ट में पेन, सूजन या ब्रेस्ट सॉफ्ट महसूस हो सकते हैं। कैंसर एक्सपर्ट की मानें तो युवा पुरुषों को इसके बारे में जागरुक किया जाना चाहिए कि सामान्य रूप से उनके अंडकोष कैसे दिखते हैं। इससे हर महीने खुद से जांच करने से बदलावों को पता जल्दी चल सकता है। सूजन, गांठ या आकार में बदलाव होने पर फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
किन लोगों को अधिक खतरा
15 से 40 साल के पुरुषों में इस बीमारी का अधिक खतरा होता है।
अगर परिवार में पहले किसी को कैंसर हुआ हो।
पिता या भाई को पहले टेस्टिकुलर कैंसर हुआ हो।
व्यक्ति को पहले कभी टेस्टिकुलर कैंसर हुआ हो।
इनफर्टिलिटी या फिर टेस्टिकुलर एब्नॉर्मल्टिज की समस्या।
एन्वॉयरमेंट या लाइफस्टाइल की वजह से भी टेस्टिकुलर कैंसर का जोखिम रहता है।
बता दें कि युवा पुरुष सबसे ज्यादा टेस्टिकुलर कैंसर से प्रभावित होते हैं। इसलिए यह याद रखना जरूरी होता है कि शुरूआती स्टेज में हमेशा टेस्टिकुलर कैंसर दर्दनाक नहीं होता है। किसी भी तरह का असामान्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह लें। इससे बीमारी का जल्दी पता चलता है और इलाज में आसानी हो सकती है। टेस्टिकुलर कैंसर से लड़ने के लिए जागरुकता के साथ-साथ समय पर कदम उठाना जरूरी है।
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आजकल युवा लोगों में भी बीपी और शुगर की दिक्कतें देखने को मिलती हैं। तनाव से भरी लाइफस्टाइल में हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशऱ काफी आम हो गया है। इसके पीछे तनाव, तला-भुना खाना, ज्यादा नमक का सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी या मोटापा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आजकल हाई बीपी आम हो गया है। इसके शुरूआती लक्षण भी नजर नहीं आते हैं। लंबे समय तक बीपी का हाई या लो रहने का असर शरीर के कई अंगों पर देखने को मिलता है।
ऐसे में ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रेंज में रखना जरूरी है। अगर आपका बीपी भी हाई रहता है, तो आपको दवाओं के साथ-साथ डाइट और लाइफस्टाइल में भी कुछ बदलाव करना चाहिए। इससे आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि ब्लड प्रेशऱ कंट्रोल में करने के लिए लाइफस्टाइल में क्या-क्या बदलाव करने चाहिए।
लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ब्लड प्रेशर को मैनेज करने के लिए जितना जरूरी दवाएं लेना है। उतना ही जरूरी लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव भी है। आप डॉक्टर की सलाह पर नियमित दवाई लें, लेकिन साथ ही कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखें।
आपको बैलेंस डाइट लेनी है। दिन में 5 से 6 ग्राम से ज्यादा नमक का सेवन न करें। सब्जियां, फल, लीन मीट्स, साबुत अनाज और डैश डाइट का पैटर्न फॉलो करना चाहिए। वहीं प्रोसेस्ड फूड्स या ज्यादा तले-भुने खाने से दूर रहें।
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए डाइट के साथ-साथ एक्सरसाइज भी अहम भूमिका निभाता है। आप ब्रिस्क वॉकिंग, साइकिलिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्टिविटीज जरूर करें। वहीं सप्ताह में 2 बार एक्सरसाइज जरूर करें।
अगर आपका वेट बढ़ा हुआ है, तो इसको कम करने पर फोकस करें। क्योंकि मोटापा कम करने से ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिलेगी।
अगर आप एल्कोहल या फिर कैफीन का सेवन करते हैं। तो इसको फौरन बंद कर दें। क्योंकि इसका बीपी और हार्ट हेल्थ समेत पूरे शरीर पर बुरा असर होता है।
ब्लड प्रेशर बढ़ने के पीछ तनाव भी मुख्य कारण होता है। लंबे समय तक होने वाले तनाव को हल्के में नहीं लें। यह आपकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है। तनाव कम करने के लिए आप डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, माइंडफुलनेस और पूरी नींद लेना चाहिए।
इसके अलावा बीपी को रेगुलर मॉनिटर करें। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या लो बीपी की समस्या है, तो उनको सप्ताह में कम से कम एक बार बीपी जरूर चेक करना चाहिए।
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