आजकल युवा लोगों में भी बीपी और शुगर की दिक्कतें देखने को मिलती हैं। तनाव से भरी लाइफस्टाइल में हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशऱ काफी आम हो गया है। इसके पीछे तनाव, तला-भुना खाना, ज्यादा नमक का सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी या मोटापा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आजकल हाई बीपी आम हो गया है। इसके शुरूआती लक्षण भी नजर नहीं आते हैं। लंबे समय तक बीपी का हाई या लो रहने का असर शरीर के कई अंगों पर देखने को मिलता है।
ऐसे में ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रेंज में रखना जरूरी है। अगर आपका बीपी भी हाई रहता है, तो आपको दवाओं के साथ-साथ डाइट और लाइफस्टाइल में भी कुछ बदलाव करना चाहिए। इससे आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि ब्लड प्रेशऱ कंट्रोल में करने के लिए लाइफस्टाइल में क्या-क्या बदलाव करने चाहिए।
लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ब्लड प्रेशर को मैनेज करने के लिए जितना जरूरी दवाएं लेना है। उतना ही जरूरी लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव भी है। आप डॉक्टर की सलाह पर नियमित दवाई लें, लेकिन साथ ही कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखें।
आपको बैलेंस डाइट लेनी है। दिन में 5 से 6 ग्राम से ज्यादा नमक का सेवन न करें। सब्जियां, फल, लीन मीट्स, साबुत अनाज और डैश डाइट का पैटर्न फॉलो करना चाहिए। वहीं प्रोसेस्ड फूड्स या ज्यादा तले-भुने खाने से दूर रहें।
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए डाइट के साथ-साथ एक्सरसाइज भी अहम भूमिका निभाता है। आप ब्रिस्क वॉकिंग, साइकिलिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्टिविटीज जरूर करें। वहीं सप्ताह में 2 बार एक्सरसाइज जरूर करें।
अगर आपका वेट बढ़ा हुआ है, तो इसको कम करने पर फोकस करें। क्योंकि मोटापा कम करने से ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिलेगी।
अगर आप एल्कोहल या फिर कैफीन का सेवन करते हैं। तो इसको फौरन बंद कर दें। क्योंकि इसका बीपी और हार्ट हेल्थ समेत पूरे शरीर पर बुरा असर होता है।
ब्लड प्रेशर बढ़ने के पीछ तनाव भी मुख्य कारण होता है। लंबे समय तक होने वाले तनाव को हल्के में नहीं लें। यह आपकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है। तनाव कम करने के लिए आप डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, माइंडफुलनेस और पूरी नींद लेना चाहिए।
इसके अलावा बीपी को रेगुलर मॉनिटर करें। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या लो बीपी की समस्या है, तो उनको सप्ताह में कम से कम एक बार बीपी जरूर चेक करना चाहिए।
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हर साल जुलाई और अगस्त के महीनों में पड़ने वाला सावन का महीना न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष है, बल्कि यह आयुर्वेद के लिहाज से भी जुड़ा हुआ है। कल यानी 30 जुलाई को सावन का महीना शुरु होने जा रहा है। इस दौरान हल्का और सात्विक भोजन करने की परंपरा न केवल एक धार्मिक नियम नहीं, बल्कि मानसून के मौसम में शरीर को हेल्दी रखने का एक तरीका है। इसलिए सावन के महीने में खाने-पीने का विशेष ध्यान रखा जाता है। आइए आपको बताते हैं हल्का खान-पान क्यों जरुरी माना जाता है?
सावन में पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है
आयुर्वेद के अनुसार, सावन का महीना वर्षा ऋतु के दौरान आता है। इस समय वातावरण में काफी नमी होती है, जिससे तापमान में काफी बदलाव आता है, जिसका असर सीधे हमारी पाचन क्रिया पर पड़ता है।
अग्नि का मंद होना
मानसून के समय शरीर का डाइजेस्टिव फायर स्वाभाविक रुप से धीमी हो जाती है, जिससे भारी भोजन पचने में काफी समय लेता है।
त्रिदोष का असंतुलन
इस दौरान वायु और पित्त दोष में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इस कारण से गैस, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती है।
सात्विक आहार में क्या खाएं और क्या नहीं?
आयुर्वेद में बताया है कि सावन के दौरान सात्विक आहार लें। जिससे शरीर को ऊर्जा देने के साथ ही पाचन तंत्र भी मजबूत बना रहे है।
क्या खाएं?
- सावन के महीने में आप ताजे फल, लौकी/तोरई, मूंग दाल, गाय का घी, नारियल पानी इन सभी चीजों का सेवन करें।
- आप हर्बल टी, उबली सब्जियां, सादे अनाज (कुट्टू/सामक चावल) का सेवन कर सकते हैं।
किन चीजों से बचें?
- इस दौरान तला-भुना, बासी खाना, प्रिजर्वेटिव्स खाने से दूरी बनाएं।
- सावन में मांसाहार, शराब, लहसुन, प्याज और तेज मिर्च-मसाले का सेवन न करें।
सात्विक खान-पान के फायदे
इस महीने में हल्का और सात्विक भोजन करने से पेट को ही दुरुस्त नहीं रखता, बल्कि मन और दिमाग भी शांत रहता है।
- आलस और सुस्ती दूर: हल्का खाना खाने से आलस और सुस्ती दूर होती है और व्यक्ति पूरे दिन ऊर्जावन बना रहता है।
- इम्यूनिटी में सुधार: असल में बरसात के समय संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे भोजन के सेवन से इम्यूनिटी मजबूत रहती है।
- आध्यात्मिक जुड़ाव: शांत और संतुलित मन ध्यान, पूजा-पाठ और भक्ति में अधिक एकाग्र होता है।
गौरतलब है कि सावन में हल्का और सात्विक भोजन अपनाना प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया का हिस्सा है। इस सावन भारी और मसालेदार भोजन से परहेज करें और सात्विक खाना अपनाकर खुद को हेल्दी रखें।
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