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Silent Killer है High BP, साइलेंट किलर बन रहा है उच्च रक्तचाप, ये Lifestyle Changes करेंगे असर

आजकल युवा लोगों में भी बीपी और शुगर की दिक्कतें देखने को मिलती हैं। तनाव से भरी लाइफस्टाइल में हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशऱ काफी आम हो गया है। इसके पीछे तनाव, तला-भुना खाना, ज्यादा नमक का सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी या मोटापा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आजकल हाई बीपी आम हो गया है। इसके शुरूआती लक्षण भी नजर नहीं आते हैं। लंबे समय तक बीपी का हाई या लो रहने का असर शरीर के कई अंगों पर देखने को मिलता है।

ऐसे में ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रेंज में रखना जरूरी है। अगर आपका बीपी भी हाई रहता है, तो आपको दवाओं के साथ-साथ डाइट और लाइफस्टाइल में भी कुछ बदलाव करना चाहिए। इससे आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि ब्लड प्रेशऱ कंट्रोल में करने के लिए लाइफस्टाइल में क्या-क्या बदलाव करने चाहिए।

इसे भी पढ़ें: Sawan 2026 में क्यों जरूरी है Satvic Diet? आयुर्वेद ने बताया कमजोर Digestive System का पूरा विज्ञान


लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ब्लड प्रेशर को मैनेज करने के लिए जितना जरूरी दवाएं लेना है। उतना ही जरूरी लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव भी है। आप डॉक्टर की सलाह पर नियमित दवाई लें, लेकिन साथ ही कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखें।

आपको बैलेंस डाइट लेनी है। दिन में 5 से 6 ग्राम से ज्यादा नमक का सेवन न करें। सब्जियां, फल, लीन मीट्स, साबुत अनाज और डैश डाइट का पैटर्न फॉलो करना चाहिए। वहीं प्रोसेस्ड फूड्स या ज्यादा तले-भुने खाने से दूर रहें।

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए डाइट के साथ-साथ एक्सरसाइज भी अहम भूमिका निभाता है। आप ब्रिस्क वॉकिंग, साइकिलिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्टिविटीज जरूर करें। वहीं सप्ताह में 2 बार एक्सरसाइज जरूर करें।

अगर आपका वेट बढ़ा हुआ है, तो इसको कम करने पर फोकस करें। क्योंकि मोटापा कम करने से ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिलेगी।

अगर आप एल्कोहल या फिर कैफीन का सेवन करते हैं। तो इसको फौरन बंद कर दें। क्योंकि इसका बीपी और हार्ट हेल्थ समेत पूरे शरीर पर बुरा असर होता है।

ब्लड प्रेशर बढ़ने के पीछ तनाव भी मुख्य कारण होता है। लंबे समय तक होने वाले तनाव को हल्के में नहीं लें। यह आपकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है। तनाव कम करने के लिए आप डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, माइंडफुलनेस और पूरी नींद लेना चाहिए।

इसके अलावा बीपी को रेगुलर मॉनिटर करें। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या लो बीपी की समस्या है, तो उनको सप्ताह में कम से कम एक बार बीपी जरूर चेक करना चाहिए। 

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Sawan 2026 में क्यों जरूरी है Satvic Diet? आयुर्वेद ने बताया कमजोर Digestive System का पूरा विज्ञान

हर साल जुलाई और अगस्त के महीनों में पड़ने वाला सावन का महीना न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष है, बल्कि यह आयुर्वेद के लिहाज से भी जुड़ा हुआ है। कल यानी 30 जुलाई को सावन का महीना शुरु होने जा रहा है। इस दौरान हल्का और सात्विक भोजन करने की परंपरा न केवल एक धार्मिक नियम नहीं, बल्कि मानसून के मौसम में शरीर को हेल्दी रखने का एक तरीका है। इसलिए सावन के महीने में खाने-पीने का विशेष ध्यान रखा जाता है। आइए आपको बताते हैं हल्का खान-पान क्यों जरुरी माना जाता है?

सावन में पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है
आयुर्वेद के अनुसार, सावन का महीना वर्षा ऋतु के दौरान आता है। इस समय वातावरण में काफी नमी होती है, जिससे तापमान में काफी बदलाव आता है, जिसका असर सीधे हमारी पाचन क्रिया पर पड़ता है।

अग्नि का मंद होना
मानसून के समय शरीर का डाइजेस्टिव फायर स्वाभाविक रुप से धीमी हो जाती है, जिससे भारी भोजन पचने में काफी समय लेता है।

त्रिदोष का असंतुलन
इस दौरान वायु और पित्त दोष में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इस कारण से गैस, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती है।

सात्विक आहार में क्या खाएं और क्या नहीं?
आयुर्वेद में बताया है कि सावन के दौरान सात्विक आहार लें। जिससे शरीर को ऊर्जा देने के साथ ही पाचन तंत्र भी मजबूत बना रहे है।

क्या खाएं? 
- सावन के महीने में आप ताजे फल, लौकी/तोरई, मूंग दाल, गाय का घी, नारियल पानी इन सभी चीजों का सेवन करें।

 - आप हर्बल टी, उबली सब्जियां, सादे अनाज (कुट्टू/सामक चावल) का सेवन कर सकते हैं।

किन चीजों से बचें?
- इस दौरान तला-भुना, बासी खाना, प्रिजर्वेटिव्स खाने से दूरी बनाएं।

 - सावन में मांसाहार, शराब, लहसुन, प्याज और तेज मिर्च-मसाले का सेवन न करें।

 सात्विक खान-पान के फायदे
इस महीने में हल्का और सात्विक भोजन करने से पेट को ही दुरुस्त नहीं रखता, बल्कि मन और दिमाग भी शांत रहता है। 

- आलस और सुस्ती दूर: हल्का खाना खाने से आलस और सुस्ती दूर होती है और व्यक्ति पूरे दिन ऊर्जावन बना रहता है।

 - इम्यूनिटी में सुधार: असल में बरसात के समय संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे भोजन के सेवन से इम्यूनिटी मजबूत रहती है।

- आध्यात्मिक जुड़ाव: शांत और संतुलित मन ध्यान, पूजा-पाठ और भक्ति में अधिक एकाग्र होता है। 
 
गौरतलब है कि सावन में हल्का और सात्विक भोजन अपनाना प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया का हिस्सा है। इस सावन भारी और मसालेदार भोजन से परहेज करें और सात्विक खाना अपनाकर खुद को हेल्दी रखें। 

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  Sports

England Test Captain Joe Root ने खिलाड़ियों पर से हटाया 'Night Curfew', कहा- अपनी Responsibility खुद समझें Team Members

इंग्लैंड की टेस्ट टीम में कप्तानी बदलने के साथ ही खिलाड़ियों के लिए नियमों में भी बड़ा बदलाव हुआ है। नए टेस्ट कप्तान जो रूट ने टीम पर लागू रात का कर्फ्यू हटाने का फैसला किया है। पाकिस्तान के खिलाफ इस महीने शुरू होने वाली टेस्ट श्रृंखला से खिलाड़ियों पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी। रूट का कहना है कि इंग्लैंड के खिलाड़ी वयस्क हैं और उन्हें अपने फैसलों की जिम्मेदारी खुद समझनी चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कर्फ्यू की व्यवस्था न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के पिछले दौरों में शराब से जुड़े विवादों के बाद लागू की गई थी। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को देर रात तक बाहर रहने और ऐसी गतिविधियों से रोकना था, जिनका असर अगले दिन के मुकाबले पर पड़ सकता है। हालांकि, रूट अब मानते हैं कि केवल समय की पाबंदी लगाना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

रूट ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कर्फ्यू लगाने से खिलाड़ियों की आदतों में जरूरी बदलाव आता है। उनका मानना है कि अगर खिलाड़ियों से मैदान पर जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है तो उन्हें मैदान के बाहर भी खुद सही और मजबूत फैसले लेने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि टीम को अपने स्तर पर इस व्यवस्था को संभालना और एक-दूसरे पर नजर रखना होगा।

गौरतलब है कि हाल की न्यूजीलैंड श्रृंखला के दौरान पूर्व कप्तान बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन कर्फ्यू के नियम का उल्लंघन कर चुके थे। इसके बाद टीम में कई बदलाव देखने को मिले। स्टोक्स दूसरे टेस्ट में नहीं खेल पाए थे और तीसरे टेस्ट में वापसी कर कप्तानी की थी। इसी मुकाबले के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा भी की थी।

इसके बाद इंग्लैंड ने टेस्ट टीम के मुख्य प्रशिक्षक ब्रेंडन मैकुलम को पद से हटा दिया और उनकी जगह स्टीफन फ्लेमिंग को जिम्मेदारी दी गई। फ्लेमिंग के आने के साथ टेस्ट टीम की कप्तानी दोबारा जो रूट को सौंपी गई है। यह रूट का इंग्लैंड की टेस्ट टीम के कप्तान के रूप में दूसरा कार्यकाल है।

बता दें कि रूट के पहले कप्तानी कार्यकाल में भी इंग्लैंड की टीम पर कर्फ्यू लागू था। 2017-18 की एशेज श्रृंखला के दौरान शराब से जुड़े विवाद के बाद 2017 से 2022 के बीच खिलाड़ियों के लिए ऐसी पाबंदियां रखी गई थीं। अब दूसरी बार कप्तानी संभालने के साथ रूट ने इस व्यवस्था को खत्म कर नई सोच के साथ टीम आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

रूट ने खिलाड़ियों से कहा है कि उन्हें याद रखना होगा कि वे इंग्लैंड के लिए खेल रहे हैं और मैदान के बाहर उनके व्यवहार का असर पूरी टीम की छवि पर पड़ता है। उनका कहना है कि टीम की पहचान उसके क्रिकेट और मैदान पर प्रदर्शन से होनी चाहिए, न कि मैदान के बाहर होने वाली घटनाओं से।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कर्फ्यू हटाने का फैसला केवल टेस्ट टीम तक सीमित नहीं रहने वाला है। इंग्लैंड की सीमित ओवरों की टीम के लिए भी इसे हटाए जाने की खबर है। उस टीम की जिम्मेदारी अभी ब्रेंडन मैकुलम के पास है और हैरी ब्रूक कप्तान हैं।

रूट ने खिलाड़ियों से यह भी कहा कि जीत के बाद जश्न मनाना गलत नहीं है, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि कब जश्न मनाना है और कब आराम करना जरूरी है। उन्होंने खिलाड़ियों से एक-दूसरे का ध्यान रखने और टीम के भीतर मजबूत माहौल बनाने की अपील की है। पाकिस्तान के खिलाफ आगामी श्रृंखला से इंग्लैंड की नई व्यवस्था और रूट की नेतृत्व शैली की असली परीक्षा शुरू होने वाली हैं।
Wed, 12 Aug 2026 21:53:16 +0530

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