बांग्लादेश को भाजपा की बंगाल जीत से रिश्तों में नए दौर की उम्मीद, तीस्ता समझौते पर बढ़ी आस
ढाका, 13 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बड़ी जीत सिर्फ पूर्वी भारत की राजनीति और शासन को ही नहीं बदल सकती, बल्कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी एक नया और ज्यादा सकारात्मक दौर शुरू कर सकती है। ढाका के स्थानीय मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा हो रही है।
बांग्लादेश के अखबार ढाका ट्रिब्यून के एक संपादकीय के मुताबिक, भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से दक्षिण एशिया की सबसे मजबूत और सफल साझेदारियों में से एक रही है। सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों ने मिलकर काम किया है, जो व्यावहारिक कूटनीति का एक अच्छा उदाहरण माना जाता है।
हालांकि, कुछ पुराने और अनसुलझे मुद्दों की वजह से समय-समय पर रिश्तों में तनाव भी आया है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा तीस्ता नदी के पानी बंटवारे का समझौता है, जो लंबे समय से अटका हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कोलकाता में भाजपा की सरकार बनने और केंद्र में पहले से एनडीए की सरकार होने से इन पुराने मुद्दों को ज्यादा तालमेल और तेजी के साथ हल करने का अच्छा मौका मिल सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि तीस्ता नदी हिमालय से निकलती है, फिर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में जाती है। बांग्लादेश के उत्तरी इलाकों में लाखों किसान इसकी पानी पर निर्भर हैं।
भारत और बांग्लादेश 2011 में पानी बंटवारे के समझौते के काफी करीब पहुंच गए थे, लेकिन उस समय पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने स्थानीय पानी की जरूरतों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई थी, जिसके कारण समझौता नहीं हो पाया।
तब से तीस्ता का मुद्दा दोनों देशों के अच्छे रिश्तों के बीच अधूरे काम की तरह देखा जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत से राज्य और केंद्र दोनों जगह एक ही राजनीतिक नेतृत्व होने की स्थिति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच पुराने मुद्दों को सुलझाने और रिश्तों को और मजबूत करने का मौका मिल सकता है।
संपादकीय में कहा गया, “अगर तीस्ता और बाकी लंबित मुद्दों पर प्रगति होती है तो यह सिर्फ पुराने विवादों का समाधान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण एशिया के सबसे अहम रिश्तों में से एक को और मजबूत करेगा। इतिहास, भूगोल और साझा सपनों से जुड़े इन दो देशों के लिए यह एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है, ऐसा दौर जो भरोसे, सहयोग और साझा समृद्धि पर आधारित होगा।”
इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का हाई कमिश्नर बनाए जाने को भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे यह संदेश जाता है कि नई दिल्ली इस अहम पड़ोसी रिश्ते में नई राजनीतिक ऊर्जा लाना चाहती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल की राजनीति और बांग्लादेश के साथ सांस्कृतिक रिश्तों की त्रिवेदी की समझ दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, खासकर तब जब दोनों देश पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर साझा अवसरों पर ध्यान देना चाहते हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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घोर बेइज्जती! ट्रंप पहुंचे चीन, लेकिन स्वागत के लिए एयरपोर्ट नहीं आए राष्ट्रपति जिनपिंग
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिन के सरकारी दौरे पर चीन पहुंच गए हैं. लेकिन इस दौरे की सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद ट्रंप का स्वागत करने एयरपोर्ट नहीं पहुंचे. उनकी जगह चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने बीजिंग एयरपोर्ट पर ट्रंप का स्वागत किया. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ट्रंप जब एयर फोर्स वन विमान से बीजिंग पहुंचे तो वहां उपराष्ट्रपति हान झेंग मौजूद थे. उनके साथ चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू, अमेरिका में चीन के राजदूत शी फेंग और चीन के विदेश मामलों के कार्यकारी उप मंत्री मा झाओक्सू भी मौजूद रहे.
स्वागत में दिखी खास तैयारी
हालांकि, ट्रंप के स्वागत के लिए चीन ने खास इंतजाम किए थे. एयरपोर्ट पर सफेद और नीली वर्दी में करीब 300 युवाओं को तैनात किया गया था. एक बैंड पार्टी भी मौजूद रही, जिसने ट्रंप का स्वागत किया. लेकिन दुनिया की नजर इस बात पर टिकी रही कि जिनपिंग खुद एयरपोर्ट क्यों नहीं पहुंचे.
Wheels down in Beijing!
— The White House (@WhiteHouse) May 13, 2026
President Donald J. Trump lands for a landmark summit with China, greeted by Vice President Han Zheng during a welcome ceremony. pic.twitter.com/4q2mATZrn4
दरअसल, ट्रंप जहां भी हाल के दिनों में दौरे पर गए, वहां ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्ष खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे थे. यूएई, सऊदी अरब, कतर और इजराइल जैसे देशों में ट्रंप का भव्य स्वागत हुआ था. ऐसे में चीन का यह कदम एक बड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है.
जिनपिंग एयरपोर्ट क्यों नहीं गए?
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के प्रोटोकॉल के तहत आमतौर पर किसी विदेशी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए विदेश मंत्री एयरपोर्ट जाते हैं. साल 2017 में जब ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति रहते हुए चीन आए थे, तब भी उनका स्वागत विदेश विभाग के एक अधिकारी ने किया था. इस बार चीन ने उपराष्ट्रपति को भेजकर प्रोटोकॉल से थोड़ा बड़ा सम्मान जरूर दिया, लेकिन जिनपिंग खुद नहीं पहुंचे. रिपोर्ट के अनुसार, जिनपिंग आमतौर पर किसी भी विदेशी नेता को रिसीव करने एयरपोर्ट नहीं जाते. इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के चीन दौरे पर भी जिनपिंग एयरपोर्ट नहीं गए थे.
क्यों अहम है ट्रंप का चीन दौरा?
राष्ट्रपति बनने के बाद दूसरी बार ट्रंप का यह चीन दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है. इस दौरान अमेरिका और चीन के बीच एआई तकनीक, रेयर अर्थ मिनरल्स और टैरिफ जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. इसके अलावा ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत संभव है. अमेरिका ताइवान को अपना सहयोगी मानता है, जबकि चीन उसे अपना हिस्सा बताता है. माना जा रहा है कि ट्रंप ईरान से जुड़े तनाव और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी जिनपिंग से चर्चा कर सकते हैं. ट्रंप के साथ अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री और कई बड़े अमेरिकी उद्योगपति भी चीन पहुंचे हैं.
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