तिब्बत में चीनी शिक्षा प्रणाली सांस्कृतिक आत्मसात्करण और पहचान के मिटने को लेकर चिंता
वाशिंगटन, 13 मई (आईएएनएस)। तिब्बत में चीन की बोर्डिंग स्कूल प्रणाली को सांस्कृतिक विलोपन और वैचारिक नियंत्रण की दिशा में एक सोची-समझी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, मंदारिन भाषा थोपने, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने और बच्चों को उनके परिवारों से अलग करने के माध्यम से बीजिंग तिब्बतियों की एक ऐसी पीढ़ी तैयार करने की कोशिश कर रहा है जो शायद अब तिब्बती के रूप में सोचना, बोलना या पहचानना न चाहे।
अमेरिका स्थित जर्नल ऑफ डेमोक्रेसी के लिए लिखते हुए दलाई लामा के भतीजे खेदरूब थोंडुप ने कहा कि आज के तिब्बत में, सीसीपी न केवल क्षेत्र और धर्म के खिलाफ बल्कि स्मृति के खिलाफ भी युद्ध छेड़ रही है, जिसमें कक्षाएं मुख्य युद्धक्षेत्र के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस्तेमाल किए जा रहे हथियारों में भाषा नीतियाँ, बोर्डिंग स्कूल और वैचारिक शिक्षा शामिल हैं, जबकि लक्ष्य बच्चे हैं, संस्कृति के सबसे कमजोर वाहक।
थोंडुप ने कहा, सीसीपी ने पठार के सरकारी बोर्डिंग स्कूलों में दस लाख से अधिक तिब्बती बच्चों को रखा है। उन्हें उनके परिवारों से अलग कर दिया गया है, उनकी भाषा छीन ली गई है, और उन्हें केवल मंदारिन भाषा में ही शिक्षा दी जा रही है। उन्हें माओत्से तुंग की महिमा करना, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के लिए गीत गाना और सीसीपी को अपने भविष्य का परोपकारी निर्माता मानना सिखाया जा रहा है। जो हो रहा है वह शिक्षा नहीं है यह दमन है।
उन्होंने आगे कहा, यह अभियान जानबूझकर, सुनियोजित और विनाशकारी है। इसका उद्देश्य तिब्बतियों को उनकी विरासत से अलग करना, बौद्ध दर्शन और तिब्बती पहचान के प्रसार को मिटाना और एक ऐसी पीढ़ी का निर्माण करना है जो मंदारिन में सोचती, बोलती और सपने देखती हो, और ल्हासा के बजाय बीजिंग के प्रति वफादार हो।
रिपोर्ट के अनुसार, बोर्डिंग स्कूल प्रणाली बीजिंग की रणनीति का मुख्य आधार है। इसमें यह भी कहा गया है कि चार साल के छोटे बच्चों को भी उनके घरों से ले जाकर ऐसे संस्थानों में दाखिला दिलाया जाता है जहाँ तिब्बती भाषा और संस्कृति को हाशिए पर धकेल दिया जाता है। यदि तिब्बती भाषा पढ़ाई भी जाती है, तो उसे द्वितीयक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है, जबकि मंदारिन शिक्षा का प्रमुख माध्यम है।
इसमें कहा गया है, परिवार से अलगाव आकस्मिक नहीं है, बल्कि यह आवश्यक है। बच्चों को तिब्बती जीवन की दैनिक दिनचर्या से अलग करके, बीजिंग समुदाय के बंधनों को कमजोर करता है और संस्कृति के प्रसार को बाधित करता है। माता-पिता बताते हैं कि उनके बच्चे तिब्बती भाषा धाराप्रवाह बोलने में असमर्थ होकर, अपनी परंपराओं से शर्मिंदा होकर और बौद्ध प्रथाओं से विमुख होकर घर लौटते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कदम एक दीर्घकालिक रणनीति का प्रतिनिधित्व करता है और इसका उद्देश्य तिब्बत को आज शांत करना नहीं, बल्कि भविष्य में तिब्बत की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। शिक्षा के क्षेत्र से तिब्बती पहचान को मिटाकर बीजिंग भविष्य में किसी भी प्रतिरोध की संभावना को समाप्त करना चाहता है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, इस अभियान की मानवीय कीमत बहुत अधिक है। अलगाव के कारण बच्चों को मानसिक आघात पहुंचता है। रिपोर्टों में बौद्ध आशीर्वाद की माला पहनने पर पिटाई, प्रार्थना करने पर दंड और तिब्बती बोलने पर अपमान का वर्णन है। परिवार बिखर रहे हैं। समुदाय कमजोर हो रहे हैं। आने वाली पीढ़ियाँ तिब्बती भाषा में धाराप्रवाह हुए बिना या बौद्ध परंपराओं से जुड़े बिना बड़े होने का जोखिम उठा रही हैं। इसका परिणाम केवल सांस्कृतिक हानि ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विनाश भी है।
--आईएएनएस
डीकेपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से पंजाब के मुख्यमंत्री ने की मुलाकात, हाईवे प्रोजेक्ट्स पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को राज्य में लंबे समय से लंबित राजमार्ग और फ्लाईओवर परियोजनाओं के जल्द पूरा होने का आश्वासन दिया।
इन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में मखू, आदमपुर और भवानीगढ़ शामिल हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित फाजिल्का-फिरोजपुर कॉरिडोर जैसी रणनीतिक सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग भी उठाई। साथ ही उन्होंने वर्षों से अटकी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने भवानीगढ़-कोटशमीर सड़क के चार लेन निर्माण को भी मंजूरी देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा बरनाला-बाजाखाना और मलेरकोटला-बरनाला कॉरिडोर के विस्तार पर भी सहमति बनी है। इसे पंजाब की कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों और सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री मान ने बताया कि केंद्रीय मंत्री गडकरी ने पंजाब सरकार के सड़क सुरक्षा फोर्स के काम की सराहना की, जिसे सड़क हादसों में जान बचाने और सुरक्षित यातायात के लिए शुरू किया गया है।
उन्होंने अमृतसर के वल्लाह फ्लाईओवर प्रोजेक्ट के देरी से पूरा होने का मुद्दा भी उठाया और जल्द पूरा करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट एनएचएआई द्वारा दिया गया था और इसे 15 सितंबर 2023 तक पूरा होना था, लेकिन कई बार समय बढ़ाए जाने के बावजूद काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। वर्तमान में इसकी प्रगति करीब 76 प्रतिशत है और नई समय सीमा 30 अप्रैल 2026 तय की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर अमृतसर एयरपोर्ट को श्री हरमंदिर साहिब से जोड़ता है और यहां भारी ट्रैफिक रहता है, जिसमें वीआईपी आवाजाही भी शामिल है। परियोजना में देरी से जाम, सुरक्षा जोखिम और लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
एक अन्य मुद्दे में उन्होंने बठिंडा-मलोट रोड पर गिद्दड़बाहा के हुसेनर चौक फ्लाईओवर पर व्यू कटर लगाने की आवश्यकता भी उठाई, जो एनएचएआई के तहत आता है।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम
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