खाड़ी युद्ध का प्रभाव घटाने में जुटी सरकार: विदेशी निवेश बढ़ाने और गैर-जरूरी आयात घटाने पर बढ़ाया फोकस
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भारत की अर्थव्यवस्था को संभावित झटकों से बचाने के लिए कई बड़े कदम उठाैने पर काम शुरू कर दिया है। सरकार का फोकस विदेशी निवेश बढ़ाने, निर्यात को मजबूत करने और गैर-जरूरी आयात कम करने पर है, ताकि महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपए पर दबाव को नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, पीएमओ विभिन्न मंत्रालयों के साथ मिलकर नई आर्थिक संभावनाओं की पहचान कर रहा है। वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) से जुड़े नियमों को आसान बनाने की तैयारी में हैं।
निवेश बढ़ाने के उपायों पर केंद्र का जोर
इसके साथ ही भारत के द्विपक्षीय निवेश समझौतों को भी विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने पर विचार किया जा रहा है। नीति आयोग और वित्त मंत्रालय ईरान संघर्ष से पैदा हुए आर्थिक अवसरों और वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर का अलग-अलग स्तरों पर अध्ययन कर रहे हैं। नीति आयोग इस मुद्दे पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार कर सकता है। सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो उसका भारत की आर्थिक वृद्धि और व्यापार संतुलन पर कितना असर पड़ेगा।
चीनी आयात घटाने निर्यात बढ़ाने की तैयारी
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोलियम और रत्न-ज्वेलरी को छोड़कर भारत का सालाना व्यापार घाटा करीब 140 अरब डॉलर है। सरकार का मानना है कि घरेलू उद्योगों के पास कई क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की पर्याप्त संभावना है। इसी कारण वाणिज्य मंत्रालय चीन से होने वाले सस्ते आयात की जगह घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रहा है। एक पुराने अध्ययन में 327 ऐसे उत्पादों की पहचान की गई थी, जिनमें भारत चीन से आयात कम कर घरेलू उत्पादन बढ़ा सकता है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और केमिकल्स जैसे सेक्टर शामिल हैं।
स्थानीय उद्योगों प्रोत्साहित कर रही सरकार
सरकार अब इन क्षेत्रों में स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही सरकार घरेलू निर्यातकों को पुराने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित कर रही है। हाल के व्यापार समझौतों का लाभ उठाने और कमजोर रुपए का फायदा लेकर निर्यात बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है। दूसरी ओर, सोना, बुलियन और ज्वेलरी जैसे गैर-जरूरी आयात को सीमित करने पर भी दोबारा जोर दिया जा रहा है। पीएमओ मंत्रालयों से मिल रहे सुझावों की लगातार समीक्षा कर रहा है और अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक दोनों तरह के उपायों पर विचार किया जा रहा है।
रुपए में गिरावट-चालू खाता घाटे ने बढ़ाई चिंता
सरकार का मुख्य उद्देश्य बढ़ते व्यापार घाटे के असर को कम करना और विदेशी पूंजी निवेश बढ़ाना है, ताकि चालू खाता घाटा नियंत्रित रहे और रुपए में ज्यादा गिरावट न आए। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.5% से 2.4% तक पहुंच सकता है, जबकि वित्तवर्ष 25 में यह 0.6% था। आईएमएफ के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्तवर्ष 27 में घटकर 6.5% रह सकती है। सरकार घरेलू सोने को बाजार में लाने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को फिर से बढ़ावा देने पर भी विचार कर रही है। आयात को हतोत्साहित करने के लिए सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया है।
SRH vs GT: गुजरात-हैदराबाद का मैच 34.5 ओवर में खत्म, फिर क्यों कमिंस पर लगा स्लो ओवर रेट का जुर्माना?
Pat cummins fined: आईपीएल 2026 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ मिली बड़ी हार के बाद सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस की मुश्किलें और बढ़ गई। टीम को जहां मैदान पर 82 रन की शर्मनाक हार झेलनी पड़ी, वहीं अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कमिंस पर स्लो ओवर रेट के कारण 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया।
यह मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया था। मैच के बाद आईपीएल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सनराइजर्स हैदराबाद ने तय समय में अपने ओवर पूरे नहीं किए, जिसके चलते कप्तान पैट कमिंस पर कार्रवाई की गई। आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.22 के तहत यह हैदराबाद का सीजन का पहला ओवर रेट अपराध था, इसलिए कमिंस पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
34.5 ओवर में मैच खत्म फिर क्यों कमिंस पर जुर्माना?
दिलचस्प बात यह रही कि मुकाबला कुल 34.5 ओवर में ही खत्म हो गया था। इसके बावजूद ओवर रेट नियम टूटने पर बीसीसीआई ने सख्त रुख अपनाया। इस सीजन में कई कप्तानों पर स्लो ओवर रेट को लेकर जुर्माना लग चुका है और अब इस सूची में कमिंस का नाम भी जुड़ गया है।
हैदराबाद 82 रन से मैच हारी
मैच की बात करें तो गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 168 रन बनाए थे। लक्ष्य ज्यादा बड़ा नहीं लग रहा था, लेकिन जवाब में SRH की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। पूरी टीम सिर्फ 86 रन पर ऑलआउट हो गई और गुजरात ने मुकाबला 82 रन से अपने नाम कर लिया।
गुजरात के तेज गेंदबाजों ने शानदार गेंदबाजी करते हुए लगातार हार्ड लेंथ पर हमला किया। पिच से मिल रही मदद का उन्होंने पूरा फायदा उठाया और हैदराबाद के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।
पिच मुश्किल थी: कमिंस
हार के बाद पैट कमिंस ने माना कि गुजरात के गेंदबाजों ने उनसे बेहतर रणनीति अपनाई। उन्होंने कहा कि पिच पर बैक ऑफ लेंथ गेंदबाजी काफी असरदार साबित हो रही थी और शायद SRH को भी उसी लाइन पर ज्यादा देर टिके रहना चाहिए था।
कमिंस ने कहा, 'गुजरात के गेंदबाजों ने दूसरी पारी में शानदार गेंदबाजी की। जब हम बल्लेबाजी खत्म करके लौटे थे, तब हमें लगा था कि स्कोर ठीक है, लेकिन विकेट काफी मुश्किल था। उन्होंने अपनी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया।'
ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने गुजरात की गेंदबाजी की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि यह टी20 क्रिकेट में देखने वाली बेहतरीन गेंदबाजी में से एक थी। हालांकि उन्होंने अपनी टीम की बल्लेबाजी को लेकर ज्यादा चिंता जताने से इनकार किया और कहा कि क्रिकेट में ऐसे खराब दिन आते रहते हैं।
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