नहीं रहे पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह, रांची के निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस
गोमिया के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह का निधन हो गया. रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली, क्षेत्र में शोक की लहर है.
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खाड़ी युद्ध का प्रभाव घटाने में जुटी सरकार: विदेशी निवेश बढ़ाने और गैर-जरूरी आयात घटाने पर बढ़ाया फोकस
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भारत की अर्थव्यवस्था को संभावित झटकों से बचाने के लिए कई बड़े कदम उठाैने पर काम शुरू कर दिया है। सरकार का फोकस विदेशी निवेश बढ़ाने, निर्यात को मजबूत करने और गैर-जरूरी आयात कम करने पर है, ताकि महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपए पर दबाव को नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक, पीएमओ विभिन्न मंत्रालयों के साथ मिलकर नई आर्थिक संभावनाओं की पहचान कर रहा है। वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) से जुड़े नियमों को आसान बनाने की तैयारी में हैं।
निवेश बढ़ाने के उपायों पर केंद्र का जोर
इसके साथ ही भारत के द्विपक्षीय निवेश समझौतों को भी विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने पर विचार किया जा रहा है। नीति आयोग और वित्त मंत्रालय ईरान संघर्ष से पैदा हुए आर्थिक अवसरों और वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर का अलग-अलग स्तरों पर अध्ययन कर रहे हैं। नीति आयोग इस मुद्दे पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार कर सकता है। सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो उसका भारत की आर्थिक वृद्धि और व्यापार संतुलन पर कितना असर पड़ेगा।
चीनी आयात घटाने निर्यात बढ़ाने की तैयारी
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोलियम और रत्न-ज्वेलरी को छोड़कर भारत का सालाना व्यापार घाटा करीब 140 अरब डॉलर है। सरकार का मानना है कि घरेलू उद्योगों के पास कई क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की पर्याप्त संभावना है। इसी कारण वाणिज्य मंत्रालय चीन से होने वाले सस्ते आयात की जगह घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रहा है। एक पुराने अध्ययन में 327 ऐसे उत्पादों की पहचान की गई थी, जिनमें भारत चीन से आयात कम कर घरेलू उत्पादन बढ़ा सकता है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और केमिकल्स जैसे सेक्टर शामिल हैं।
स्थानीय उद्योगों प्रोत्साहित कर रही सरकार
सरकार अब इन क्षेत्रों में स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही सरकार घरेलू निर्यातकों को पुराने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित कर रही है। हाल के व्यापार समझौतों का लाभ उठाने और कमजोर रुपए का फायदा लेकर निर्यात बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है। दूसरी ओर, सोना, बुलियन और ज्वेलरी जैसे गैर-जरूरी आयात को सीमित करने पर भी दोबारा जोर दिया जा रहा है। पीएमओ मंत्रालयों से मिल रहे सुझावों की लगातार समीक्षा कर रहा है और अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक दोनों तरह के उपायों पर विचार किया जा रहा है।
रुपए में गिरावट-चालू खाता घाटे ने बढ़ाई चिंता
सरकार का मुख्य उद्देश्य बढ़ते व्यापार घाटे के असर को कम करना और विदेशी पूंजी निवेश बढ़ाना है, ताकि चालू खाता घाटा नियंत्रित रहे और रुपए में ज्यादा गिरावट न आए। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.5% से 2.4% तक पहुंच सकता है, जबकि वित्तवर्ष 25 में यह 0.6% था। आईएमएफ के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्तवर्ष 27 में घटकर 6.5% रह सकती है। सरकार घरेलू सोने को बाजार में लाने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को फिर से बढ़ावा देने पर भी विचार कर रही है। आयात को हतोत्साहित करने के लिए सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया है।
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