रूस ने सरमत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया
मॉस्को, 12 मई (आईएएनएस)। रूस के स्ट्रेटेजिक मिसाइल फोर्सेज के कमांडर के मुताबिक, रूस ने सरमत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है।
मांडर सर्गेई कराकायेव ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सरमत मिसाइल सिस्टम के परीक्षण के नतीजे उसके तय किए गए तकनीकी मानकों को पूरा करते हैं और इसमें जो फैसले लिए गए थे, वे सही साबित हुए हैं।
रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी टास के अनुसार, कराकायेव ने प्रेसिडेंट को दी रिपोर्ट बताया कि यह मिसाइल ग्राउंड-बेस्ड स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर फोर्सेज ताकत को और मजबूत करेगी। इससे लक्ष्यों को नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी और रणनीतिक सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रपति पुतिन ने इस सफल परीक्षण पर रूसी सेना को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली हथियार सिस्टम है, जो सोवियत दौर की वोएवोडा मिसाइल सिस्टम के बराबर है।
पुतिन ने दावा किया कि इस मिसाइल की ताकत किसी भी मौजूदा पश्चिमी हथियार से चार गुना ज्यादा है।
उन्होंने बताया कि यह मिसाइल न केवल बैलिस्टिक बल्कि सबऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर भी जा सकती है, जिससे 35,000 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज मिलती है, साथ ही इसकी एक्यूरेसी और सभी मौजूदा और भविष्य के एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने की क्षमता दोगुनी हो जाती है।
कराकायेव ने कहा कि परीक्षण में इसकी उड़ान क्षमता, मारक क्षमता, लॉन्च की तैयारी और सुरक्षा उपायों की भी पुष्टि हो गई है।
इस सिस्टम की पहली सफल लॉन्चिंग 20 अप्रैल 2022 को रूस के आर्कान्जेस्क क्षेत्र स्थित प्लेसेट्सक कॉस्मोड्रोम से की गई थी।
पुतिन ने कहा कि सरमत सिस्टम को इस साल के अंत तक तैनात किया जाएगा।
आरएस-28 सरमत, एक एडवांस्ड ग्राउंड-बेस्ड साइलो-बेस्ड मिसाइल सिस्टम है जो न्यूक्लियर वॉरहेड और एक भारी लिक्विड-प्रोपेलेंट ऑर्बिटल इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल ले जाने में सक्षम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2000 के दशक से इस पर काम चल रहा है।
पुतिन ने कहा कि 2002 में जब अमेरिका ने एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि से बाहर निकलने का फैसला किया, तब रूस को अपनी रणनीतिक सुरक्षा और शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए नई व्यवस्था पर काम करना पड़ा।
--आईएएनएस
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'ऑपरेशन सिंदूर' में तबाह हुए आतंकी ठिकाने फिर हो रहे सक्रिय, जैश-ए-मोहम्मद ने शिफ्ट किया बेस : रिपोर्ट
वाशिंगटन, 12 मई (आईएएनएस)। पिछले साल 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था। अब उन जगहों पर बड़े स्तर पर सफाई और दोबारा निर्माण का काम चलता दिखाई दे रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों में वहां निर्माण सामग्री और मशीनें नजर आई हैं, जिससे पता चलता है कि इन ठिकानों को फिर से तैयार किया जा रहा है।
मंगलवार को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपने कई अहम ऑपरेशनल बेस पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से हटाकर खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) में शिफ्ट कर दिए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय हमलों के बाद पीओके उनके लिए कम सुरक्षित माना जाने लगा, जबकि केपीके को ज्यादा सुरक्षित और बचाव योग्य समझा जा रहा है।
अमेरिका की संस्था मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईएमआरआई) ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि यह शिफ्टिंग पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी की सीधी मदद से की जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जैश-ए-मोहम्मद की खुली सभाएं पुलिस सुरक्षा में आयोजित हुईं और कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम की भी इसमें भूमिका रही।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया था।
एमईएमआरआई की रिपोर्ट में कहा गया, “सैटेलाइट तस्वीरों में बहावलपुर में एन-5 नेशनल हाईवे के पास स्थित जामिया सुभान अल्लाह परिसर में फिर से निर्माण गतिविधियां साफ दिखाई दे रही हैं। 14 अप्रैल 2026 की तस्वीरों में भारी मशीनें और कई निर्माण वाहन साइट पर काम करते नजर आए।”
रिपोर्ट में आगे कहा गया, “अमेरिका की स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी वंटोर से मिली हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों में देखा गया कि मस्जिद के जो गुंबद हमले में क्षतिग्रस्त हुए थे, उन्हें अब दोबारा बना दिया गया है। नए गुंबदों का रंग पहले की तुलना में ज्यादा गहरा दिखाई दे रहा है, जिससे लगता है कि हाल ही में सीमेंट का काम हुआ है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ बहावलपुर ही नहीं बल्कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दूसरे ठिकानों पर भी दोबारा निर्माण का काम हो रहा है। इसमें कहा गया कि इस साल 22 अप्रैल की सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सैयदना बिलाल मस्जिद में भी ऐसी गतिविधियां देखी गईं, जिसे इस संगठन से जुड़ा माना जाता है।
पाकिस्तान अभी भी एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) ऑन मनी लॉन्ड्रिंग की निगरानी में है। यह संस्था एफएटीएफ के आतंकवाद फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के मानकों के आधार पर देशों की जांच करती है।
रिपोर्ट में कहा गया, “अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए जा रहे सोशल मीडिया अकाउंट्स ने डिजिटल वॉलेट्स के जरिए फंड जुटाने के संकेत दिए थे, ताकि सुभान अल्लाह परिसर के पुनर्निर्माण का काम किया जा सके।”
पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों को लेकर चिंता जताते हुए एफएटीएफ की अध्यक्ष एलिसा डी एंडा माद्राजो ने कहा था कि जो देश पहले ग्रे लिस्ट से बाहर आ चुके हैं, वे भी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने सरकारों से सख्त निगरानी और मजबूत कार्रवाई जारी रखने की अपील की थी।
रिपोर्ट में कहा गया, “उन टिप्पणियों के कुछ ही महीनों बाद जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ठिकानों पर खुलेआम दोबारा निर्माण का काम दिखना यह सवाल खड़ा करता है कि निगरानी व्यवस्था वास्तव में कितनी असरदार है।”
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पाकिस्तान अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर आया था। साथ ही यह दावा किया गया कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले भी एक मीडिया जांच में जेईएम के मुख्यालय में विस्तार के संकेत मिले थे, जो पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट से बाहर आने के बाद शुरू हुए थे।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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