भारत में 14 और 15 मई को होगी ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की हाई लेवल बैठक, अमेरिका और ईरान पर होगी सबकी नजर, भारत ने जारी किया शेड्यूल
भारत की राजधानी दिल्ली में 14 और 15 मई 2026 को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर करेंगे। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के विदेश मंत्री तथा प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख भाग लेंगे। सभी प्रतिनिधि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।
इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री रूबियो होंगे तो वहीं ईरान के विदेश मंत्री आरागची भी आने वाले है। रूस के विदेश मंत्री लावरोव सहित तमाम अन्य देशों के विदेश मंत्री भी आ रहे है लेकिन चीन के विदेश मंत्री प्रेसिडेंट ट्रम्प के बीजिंग दौरे के कारण अनुपस्थित रहेंगे।
वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर होगी व्यापक चर्चा
बैठक के दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्री आपसी हितों से जुड़े वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब ईरान वॉर सीजफायर के हवाले है, कंफ्लिक्ट चरम पर है और इसका इंपैक्ट इतना ज्यादा की वैश्विक अर्थव्यवस्था डोल रही है। साथ हीं विश्व व्यवस्था, भू-राजनीतिक चुनौतियों और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार को लेकर व्यापक चर्चा जारी है।
बैठक के दूसरे दिन ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के बीच "BRICS@20: Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में संगठन के 20 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर चर्चा होगी।
इसके बाद "Reforms of Global Governance and Multilateral System" विषय पर एक और सत्र होगा, जिसमें वैश्विक शासन व्यवस्था और बहुपक्षीय संस्थानों में आवश्यक सुधारों पर विचार किया जाएगा।
सितंबर 2025 में हुई थी पिछली बैठक
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की पिछली बैठक 26 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित की गई थी। उस बैठक की अध्यक्षता भी भारत ने की थी, क्योंकि भारत वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स का अध्यक्ष देश है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
ब्रिक्स की अध्यक्षता के साथ भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मई 2026 की यह बैठक भारत की कूटनीतिक सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व क्षमता को और सुदृढ़ करेगी.
नेपाल में खाद की कमी, भारत करेगा आपूर्ति
नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। नेपाल खाद की किल्लत से जूझ रहा है। उसने भारत से आपूर्ति का अनुरोध किया, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी मंगलवार को दी।
जायसवाल ने कहा वर्तमान हालात को देखते हुए नेपाल को उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति भारत करेगा, क्योंकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति बाधित होने के बीच काठमांडू से इस संबंध में अनुरोध प्राप्त हुआ है।
विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में जायसवाल ने कहा, “हमें नेपाल से उर्वरकों की आपूर्ति के लिए अनुरोध मिला है। इसे मौजूदा सहयोग ढांचे के तहत रूप दिया जा रहा है।”
नेपाल भारत से सरकार-से-सरकार (जी2जी) समझौते के तहत 80,000 टन उर्वरक खरीद रहा है, जिसमें 60,000 टन यूरिया और 20,000 टन डीएपी शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य आगामी धान रोपाई सीजन के दौरान कमी को रोकना है। उम्मीद है कि ये खेप वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच बाजार को स्थिर करने में मदद करेगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारत पड़ोसी देशों को ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति कर रहा है।
उन्होंने कहा, “हम बांग्लादेश को हाई-स्पीड डीजल फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए डीजल की आपूर्ति कर रहे हैं। बांग्लादेश से कुछ अतिरिक्त अनुरोध भी मिले थे, जिन्हें हमने पूरा किया है और कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम मौजूदा व्यवस्था के तहत भूटान और नेपाल को भी ऊर्जा उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं। इसी तरह हमने श्रीलंका को भी ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति की है और मॉरीशस के साथ भी कुछ व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है।”
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल की कैबिनेट ने उर्वरकों की तत्काल खरीद को मंजूरी दी, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से आने वाली एक खेप होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी गतिरोध के चलते अटक गई थी।
उर्वरकों की आपूर्ति भारत की सरकारी कंपनी राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड करेगा और इनके अगस्त मध्य तक नेपाल पहुंचने की संभावना है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, यह समझौता भारत और नेपाल के बीच 2022 में हुए व्यापक उर्वरक आपूर्ति समझौता ज्ञापन (एमओयू) का हिस्सा है।
--आईएएनएस
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