उद्योगों की जरूरत और युवाओं के कौशल के बीच की दूरी कम कर रही पीएम इंटर्नशिप योजना: शीर्ष सरकारी अधिकारी
नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईएस) देश में युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने और उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक कुशल कार्यशक्ति विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बनकर उभर रही है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित सीआईआई वार्षिक बिजनेस समिट 2026 के दौरान पीएम इंटर्नशिप योजना: भारत की टैलेंट पाइपलाइन को मजबूत करना विषय पर आयोजित सत्र में सरकार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इस योजना को देश के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
सत्र को संबोधित करते हुए कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का उद्देश्य उद्योगों की जरूरतों और देश की स्किलिंग व्यवस्था के बीच मौजूद अंतर को कम करना है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि उद्योगों के नेतृत्व में चलने वाला एक परिवर्तनकारी अभियान है।
उन्होंने कहा कि इस योजना को केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह युवाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का माध्यम है। उनके अनुसार, देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी बड़ी प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें बड़ी कंपनियों से सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
दीप्ति गौर मुखर्जी ने उद्योगों से अपील करते हुए कहा कि वे केवल आंकड़ों के नजरिए से इस योजना को न देखें, बल्कि उन युवाओं के बारे में सोचें जिनका भविष्य इससे बदल सकता है। उन्होंने कहा कि पीएम इंटर्नशिप योजना युवाओं को सिर्फ रोजगार योग्य बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके व्यक्तिगत, भावनात्मक और पेशेवर विकास में भी मदद करेगी।
उन्होंने कहा कि जब उद्योग किसी युवा का जीवन बदलते हैं, तो उससे परिवार और समाज दोनों मजबूत होते हैं और देश को आत्मविश्वासी तथा भविष्य के लिए तैयार कार्यशक्ति मिलती है।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव बालमुरुगन ने कहा कि इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी लचीलापन है। कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से इंटर्नशिप की अवधि, क्षेत्र, योग्यता और प्रशिक्षण का तरीका तय कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि शायद दुनिया में ऐसा कोई दूसरा कार्यक्रम नहीं होगा जो उद्योगों को इतनी आजादी देता हो। इस योजना के तहत अंतिम वर्ष के छात्र और पोस्टग्रेजुएट सीधे कंपनियों के साथ प्रशिक्षण ले सकेंगे, जिससे नौकरी पाने की प्रक्रिया आसान होगी।
उन्होंने बताया कि इंटर्न को मिलने वाले स्टाइपेंड का 90 प्रतिशत हिस्सा सरकार देती है। इसके अलावा बीमा और एकमुश्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
सीआईआई के प्रेसिडेंट डिजिग्नेट आर. मुकुंदन ने कहा कि इंटर्नशिप युवाओं को किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया को समझने का अवसर देती है। उन्होंने कहा कि पीएम इंटर्नशिप योजना युवाओं को व्यावहारिक अनुभव देकर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करेगी।
उन्होंने उद्योग जगत से ज्यादा से ज्यादा भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि देश सेवा का इससे बेहतर अवसर शायद ही कोई हो सकता है।
वहीं, सीआईआई नेशनल एमएसएमई काउंसिल के चेयरमैन सुनील चोरड़िया ने कहा कि पीएम इंटर्नशिप योजना शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच की दूरी कम करने वाला बड़ा उद्योग-आधारित प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह योजना खासतौर पर एमएसएमई और सप्लायर नेटवर्क के लिए फायदेमंद साबित होगी, जिन्हें प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत रहती है।
कार्यक्रम में मौजूद सभी वक्ताओं ने माना कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच मजबूत कड़ी बनाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योगों के सहयोग से यह योजना देश के युवाओं को बेहतर अवसर, मार्गदर्शन और रोजगार उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
दिल्ली के उपराज्यपाल ने डीडीए को 'सिंगल विंडो ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम' शुरू को कहा
नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने ईज ऑफ लिविंग बनाने के उद्देश्य से दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को सिंगल विंडो ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम (ओबीपीएस) के तहत सिंगल विंडो मंजूरी प्रणाली शुरू करने के लिए प्रेरित किया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
डीडीए द्वारा शुरू की गई यह नई सुविधा भवन निर्माण की मंजूरी को तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाएगी और पिछली प्रक्रियाओं में उल्लेखनीय सुधार लाएगी, जो अक्सर अनावश्यक लालफीताशाही, जनता को परेशान करने और भ्रष्टाचार की शिकायतों का कारण बनती थीं।
उपराज्यपाल ने एकल खिड़की (सिंगल विंडो) ओबीपीएस शुरू करने के निर्देश जारी करते समय पहले भी इन मुद्दों को उठाया था।
बयान में कहा गया है कि नई प्रणाली नागरिकों, मकान मालिकों, वास्तुकारों और डेवलपर्स को भवन निर्माण की अनुमतियों और संबंधित स्वीकृतियों की प्रक्रिया के लिए एक सुगम, एकीकृत इंटरफेस प्रदान करेगी।
यह प्रणाली एक ही विंडो के माध्यम से भवन योजनाओं, दस्तावेजों और कई अनापत्ति प्रमाण पत्रों (एनओसी) को ऑनलाइन जमा करने में सक्षम बनाती है, जिससे प्रक्रियात्मक जटिलता कम होती है और डीडीए कार्यालयों में बार-बार जाने की आवश्यकता कम हो जाती है।
बयान में यह भी कहा गया है कि इससे आवेदक वास्तविक समय में आवेदन की स्थिति का पता लगा सकेंगे, ऑनलाइन शुल्क भुगतान कर सकेंगे और डीडीए कार्यालयों में बार-बार जाए बिना डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित स्वीकृतियां प्राप्त कर सकेंगे।
यह प्रणाली एआई-संचालित योजना जांच, स्वचालित अनुपालन जांच, भौगोलिक रूप से चिह्नित मोबाइल निरीक्षण और तत्काल एसएमएस और ईमेल सूचनाओं को एकीकृत करती है।
इस पहल से भवन निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया में मैन्युअल हस्तक्षेप, प्रक्रियात्मक देरी और परिचालन त्रुटियों में काफी कमी आने की उम्मीद है, साथ ही जवाबदेही, दक्षता और सटीकता में सुधार होगा।
यह पहल प्रौद्योगिकी-आधारित शासन सुधारों और सुव्यवस्थित सार्वजनिक सेवा वितरण तंत्रों के माध्यम से दिल्ली के शहरी नियोजन और विकास ढांचे के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
--आईएएनएस
एमएस/
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