देश में बढ़ रहा सोने का आयात, बीते तीन वर्षों में दोगुना हुआ
नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश के नागरिकों से अगले एक वर्ष गैर-जरूरी सोना न खरीदने की अपील की गई है। इसके पीछे की एक वजह सोने का आयात बिल लगातार बढ़ना है, जिसका भुगतान बहुमूल्य विदेशी मुद्रा किया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का सोने का आयात बीते तीन वर्षों में बढ़कर दोगुना से अधिक हो गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 71.98 अरब डॉलर के सोने का आयात किया था, वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा 35 अरब डॉलर था।
वहीं, भारत ने वित्त वर्ष 2023-24 में 58 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2023-24 में 45.54 अरब डॉलर के सोने का आयात किया था।
भारत के आयात बिल में सोना, कच्चे तेल के बाद दूसरा सबसे बड़ा कंपोनेंट था। वित्त वर्ष 26 में भारत का आयात बिल 775 अरब डॉलर का था। इसमें से देश ने सोने पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च किए थे।
सोने के बढ़ते आयात के कारण देश के चालू खाते घाटे (सीएडी) भी लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक, 2026 में इसके 84 अरब डॉलर पर रहने का अनुमान है, जो कि जीडीपी का 2 प्रतिशत होगा।
ऐसे में अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद लोग सोने की खरीद को कम करते हैं तो इससे सीएडी पर दबाव कम हो सकता है। साथ ही रुपए के अवमूल्य में कमी आ सकती है।
रविवार को सिकंदराबाद में रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके।
उन्होंने कहा, वर्तमान परिस्थितियों में, विदेशी मुद्रा बचाना देश के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
आयातित ईंधन पर भारत की निर्भरता का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने ईंधन की बचत, अनावश्यक खर्चों में कटौती और भारत में बनने वाली चीजों की खपत को प्राथमिकता देने जैसे उपायों को आवश्यक बताया। साथ ही उन्होंने गैर-जरूरी सोने की खरीद को एक साल तक टालने की अपील की।
--आईएएनएस
एबीएस/
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तमिलनाडु सरकार में ज्योतिषी की एंट्री, सीएम विजय ने जीत की भविष्यवाणी करने वाले राधन पंडित को दी बड़ी जिम्मेदारी
तमिलनाडु की राजनीति में एक नया और दिलचस्प मोड़ सामने आया है. राज्य के मुख्यमंत्री विजय ने अपने करीबी ज्योतिषी राधन पंडित वेट्रिवेल को सरकारी पद पर नियुक्त किया है. तमिलनाडु सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार राधन पंडित को मुख्यमंत्री का ओएस (राजनीतिक) नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है. इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है.
कौन हैं राधन पंडित वेट्रिवेल?
राधन पंडित वेट्रिवल ज्योतिष और अंकशास्त्र की दुनिया का जाना-माना नाम माने जाते हैं. बताया जाता है कि उन्हें इस क्षेत्र में करीब 40 वर्षों का अनुभव है. वे लंबे समय से विजय के करीबी माने जाते हैं और चुनावों के दौरान भी लगातार चर्चा में रहे थे.
राधन पंडित ने चुनाव से पहले भविष्यवाणी की थी कि अभिनेता से नेता बने विजय राजनीति में बड़ी सफलता हासिल करेंगे. उन्होंने यहां तक कहा था कि “विजय के नाम की सुनामी आने वाली है.” चुनाव परिणाम आने के बाद उनके पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे.
विजय की जीत के बाद बढ़ी चर्चा
तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में विजय की पार्टी टीवीके को बड़ी सफलता मिलने के बाद राधन पंडित फिर सुर्खियों में आ गए. जैसे ही चुनावी रुझान विजय के पक्ष में आने लगे, राधन पंडित व्यक्तिगत रूप से विजय के घर पहुंचे और उन्हें फूलों का गुलदस्ता देकर बधाई दी.
तिरुचेंदूर मंदिर यात्रा के दौरान भी विजय और राधन पंडित की एक साथ कार यात्रा काफी चर्चा में रही थी. उस दौरान सोशल मीडिया पर दोनों की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए थे.
जयललिता से भी जुड़ चुका है नाम
रिपोर्ट्स के मुताबिक राधन पंडित का नाम पहले भी तमिलनाडु की राजनीति में चर्चित रहा है. कहा जाता है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के भी ज्योतिषी रह चुके हैं. राजनीतिक हलकों में उनकी पहचान ऐसे ज्योतिषी के रूप में रही है जो नेताओं के भविष्य को लेकर खुलकर बयान देते रहे हैं.
उन्होंने चुनाव से पहले एम के स्टालिन के बारे में कहा था कि उनके ग्रह अनुकूल नहीं चल रहे हैं और उन्हें कठिन दौर का सामना करना पड़ सकता है. वहीं उदयनिधि स्टालिन को लेकर उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि उनके राजनीतिक करियर में तेजी से ग्रोथ होगी. चुनाव परिणामों के बाद उनके कई बयान फिर चर्चा में आ गए.
राजनीति और ज्योतिष पर फिर शुरू हुई बहस
राधन पंडित की सरकारी नियुक्ति के बाद राजनीति और ज्योतिष के संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है. कुछ लोग इसे मुख्यमंत्री का निजी भरोसा बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इस फैसले पर सवाल उठा रहा है.
तमिलनाडु की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है जब किसी ज्योतिषी का नाम सत्ता के केंद्र तक पहुंचा हो, लेकिन इस बार नियुक्ति को लेकर सार्वजनिक चर्चा काफी तेज दिखाई दे रही है. आने वाले दिनों में यह फैसला राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है.
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