How to Make Magaz: खरबूजा खाने के बाद फेंक रहे हैं बीज! घर बैठे आसानी से बनाएं 800 रुपये किलो बिकने वाले ये Seeds
How to Make Magaz: हम जब भी फल खाते हैं तो उसके बीजों और छिलकों को फेंक देते हैं. मगर कुछ फल ऐसे होते हैं, जिनके बीज हमें बचाकर रखने चाहिए. ताकि उनसे हम कुछ बना सके. गर्मियों में खरबूज खूब खाया जाता है. इसकी खासियत है कि इसके बीज तरबूज की तरह फैले नहीं होते हैं. खरबूजे के बीज सिर्फ एक जगह इक्ट्ठा होते हैं. अगर आप इन बीजों को कूड़े में डाल रहे हैं तो यह गलति दोबारा मत करना. ये सफेद बीज असल में हमारी सेहत के लिए सोना है.
जी हां, आपने मगज के बारे में सुना होगा. ये वो बीज होते हैं, जिन्हें हम मिठाइयों में सजाने के लिए और ग्रेवी को गाढ़ा बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं. मगज कुछ और नहीं बल्कि खरबूजे के सूखे बीज ही होते हैं. आप इन्हें घर पर भी आसानी से बना सकते हैं. कैसे? तो चलिए इस आर्टिकल में आपको सिखाते हैं.
खरबूजे के बीजों से मगज कैसे बनाएं?
1.बीजों को इक्ट्ठा करें- सबसे पहले तो खरबूज काटते समय एक चम्मच की मदद से सारे बीजों को निकाल दें. बीजों में लगा हुआ गूदा हटाने के लिए इसे साफ करना जरूरी है.
ये भी पढ़ें- Pan Gulkand Sharbat Recipe: गर्मी और लू से बचने के लिए घर पर बनाएं पान-गुलकंद का शरबत, नोट कर लें रेसिपी
2.छलनी से साफ करें- अब बीजों को चाय की छलनी में डालकर हल्का-हल्का चम्मच की मदद से मसलकर चलते हुए पानी के नीचे साफ कर लें. आप देखेंगे की बीज पर लगा गूदा हट जाएगा.अब ये बीज चिपचिपे भी नहीं लगेंगे.
3.धूप दिखाएं- अब धुले हुए बीजों को एक सूती कपड़े में बिछाएं या किसी बड़ी प्लेट पर फैला दें. अब इन्हें धूप में सुखाएं. धूप इन बीजों पर सीधी पड़नी चाहिए ताकि ये कुरकुरी हो जाए. वैसे तो 1 दिन की धूप काफी होती है, मगर आप चाहे तो 2 दिन लगातार बीजों को धूप में रख सकते हैं.
4.छिलका ऐसे हटाएं- अब सूखे हुए बीजों पर से छिलका हटाने के लिए एक जादुई ट्रिक फॉलो करें. आपको सबसे पहले एक साफ कपड़े को बिछाना है. उस पर सूखे हुए बीज फैला दें. अब बेलन लें और बीजों के ऊपर चलाएं. हल्का-हल्का दबाव बनाते हुए बीजों के ऊपर दो से तीन बार बेलन चलाएं. ज्यादा जोर न लगाएं वरना बीज भी पिस जाएंगे. अब आप देखेंगे कि सभी छिलके चटक कर अलग हो जाएंगे. इन्हें हटा लें और मगज साइड कर दें.
5.मगज को कैसे स्टोर करें- छिलका हटाने के बाद बीजों को थाली में निकालें और हल्का हल्का झटक लें. इससे हल्की-फुल्की धूल या सूखे छिलके भी साइड हो जाएंगे. अब आपके पास सफेद मगज मिल जाएंगे. इसे स्टोर करने के लिए आपको एक एयर टाइट कंटेनर में भर कर रखें. ज्यादा लंबे समय तक स्टोर करने के लिए आप इसे तवे पर हल्का रोस्ट कर सकते हैं. इसके बाद आप एयर टाइट डिब्बे में रख सकते हैं.
कैसे करें मगज का इस्तेमाल?
- मगज के बीजों को आप दूध के साथ पीसकर ले सकते हैं.
- आप इसे स्मूदी और शेक में मिलाकर ले सकते हैं.
- ये ग्रेवी को गाढ़ा बनाने के लिए यूज किए जाते हैं.
- मगज को पानी में भिगोकर खा सकते हैं.
- मिठाइयों में भी मगज का इस्तेमाल कर सकते हैं.
ये भी पढ़ें- Mango Masala Mojito Recipe: गर्मी में लू से बचने के लिए घर पर झटपट बनाएं कच्चे आम का मोजितो, रेसिपी करें नोट
Ekadashi Kab Hai: 12 या 13 मई, कब है अपरा एकादशी व्रत? नोट करें सही तारीख, जानें इस दिन क्या करें क्या न करें
Ekadashi Kab Hai: सनातन धर्म में भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे बड़ा व्रत एकादशी का बताया गया है. हर महीने दो एकादशी व्रत होते हैं एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में रखा जाता है. इन एकादशी के नाम और इनसे मिलने वाले फल भी अलग-अलग होते हैं. ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी को अचला एकादशी भी कहा जाता है. इस एकादशी को भगवान विष्णु के त्रिविक्रम यानि वामन स्वरुप की पूजा की जाती है. विष्णु पुराण के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को अश्वमेघ यज्ञ, गंगा स्नान और तीर्थों की यात्रा का फल प्राप्त हो जाता है. इस एकादशी को अपराधों का नाश करने वाली एकादशी भी कहा गया है. इस साल अपरा एकादशी की तारीख को लेकर संशय की बना हुआ है. इस साल व्रत 12 या 13 मई कब रखा जाएगा. आइए जानते हैं किस तारीख में अपरा एकादशी व्रत रखना शुभ होगा. किस विधि से पूजा करें
कब है अपरा एकादशी व्रत? (Apara Ekadashi Vrat Kab Hai)
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आज यानी 12 मई को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर शुरु होगी. एकादशी तिथि का समापन 13 मई को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार 13 मई को अपरा एकादशी व्रत रखना शुभ होगा. स्मार्त और वैष्णव दोनों संप्रदाय के लोग 13 मई को अपरा एकादशी व्रत रखें.
अपरा एकादशी पूजा मुहूर्त
- ब्रह्ममुहूर्त - सुबह 04 बजकर 08 मिनट से सुबह 04 बजकर 50 मिनट तक.
- विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 33 मिनट से दोपहर 03 बजकर 27 मिनट तक.
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 02 मिनट से शाम 07 बजकर 23 मिनट तक.
- निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 56 मिनट से रात 12 बजकर 38 मिनट तक.
अपरा एकादशी पूजा विधि (Apara Ekadashi Vrat Puja Vidhi)
अपरा एकादशी पर सूर्योदय से पहले स्नान कर, व्रत संकल्प लें. उत्तर-पूर्व दिशा में एक चोकी बिछाकर उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं. चौकी पर श्रीलक्ष्मीनारायण जी के श्रीविग्रह की स्थापना करें. शालिग्राम शिला हो तो उसकी स्थापना चौकी पर करें. गंगाजल से श्रीलक्ष्मीनारायण और पंचामृत से शालिग्राम शिला का अभिषेक करें. चंदन और सुंगधित फूलों से श्रंगार करें. तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं. मौसम फल और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं. श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें. आरती के बाद आसन पर बैठकर ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की माला जाप करें. विष्णुसहस्त्रनाम या गोपालसहस्त्रनाम का पाठ करें. अपरा एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें. विष्णु चालीसा का पाठ करें. संभव हो तो रात्रि जागरण करें.
अपरा एकादशी पर क्या न करें (Apara Ekadashi What Not To Do)
- अपरा एकादशी पर क्रोध और गुस्सा करने से बचें
- परिवार में विवाद और कलेश करने से बचें.
- एकादशी के दिन व्रत रखें या न रखें लेकिन चावल का सेवन न करें.
- मांस-मदिरा का सेवन न करें.
- प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन न खाएं.
- अपने से बड़ों का अपमान न करें.
- बाल और नाखून न काटें.
- ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें.
अपरा एकादशी पर क्या करें (Apara Ekadashi What To Do)
- इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें.
- इसके साथ व्रत कथा सुनें.
- भगवान की आरती करें.
- संभव हो तो प्रसाद अधिक से अधिक लोगों में वितरित करें, जिससे पुण्य फल बढ़ता है.
अपरा एकादशी का महत्व (Apara Ekadashi Significance)
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी की शास्त्रों में विशेष महिमा बताई गयी है. इस एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साधक को अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है. गंगा स्नान और तीर्थ स्थलों की यात्रा फल प्राप्त होता है. अपरा एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के अपराध और पापों से छुटकारा मिल जाता है. जीवन में सुख-शांति आती है. घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. इस एकादशी पर पूजा-पाठ और दान करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है.
यह भी पढ़ें: Apara Ekadashi 2026: कब है अपरा एकादशी व्रत? भूलकर भी न करें ये गलती, वरना जीवन में बढ़ जाएंगी मुश्किलें
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation



















