Ekadashi Kab Hai: 12 या 13 मई, कब है अपरा एकादशी व्रत? नोट करें सही तारीख, जानें इस दिन क्या करें क्या न करें
Ekadashi Kab Hai: सनातन धर्म में भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे बड़ा व्रत एकादशी का बताया गया है. हर महीने दो एकादशी व्रत होते हैं एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में रखा जाता है. इन एकादशी के नाम और इनसे मिलने वाले फल भी अलग-अलग होते हैं. ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी को अचला एकादशी भी कहा जाता है. इस एकादशी को भगवान विष्णु के त्रिविक्रम यानि वामन स्वरुप की पूजा की जाती है. विष्णु पुराण के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को अश्वमेघ यज्ञ, गंगा स्नान और तीर्थों की यात्रा का फल प्राप्त हो जाता है. इस एकादशी को अपराधों का नाश करने वाली एकादशी भी कहा गया है. इस साल अपरा एकादशी की तारीख को लेकर संशय की बना हुआ है. इस साल व्रत 12 या 13 मई कब रखा जाएगा. आइए जानते हैं किस तारीख में अपरा एकादशी व्रत रखना शुभ होगा. किस विधि से पूजा करें
कब है अपरा एकादशी व्रत? (Apara Ekadashi Vrat Kab Hai)
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आज यानी 12 मई को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर शुरु होगी. एकादशी तिथि का समापन 13 मई को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार 13 मई को अपरा एकादशी व्रत रखना शुभ होगा. स्मार्त और वैष्णव दोनों संप्रदाय के लोग 13 मई को अपरा एकादशी व्रत रखें.
अपरा एकादशी पूजा मुहूर्त
- ब्रह्ममुहूर्त - सुबह 04 बजकर 08 मिनट से सुबह 04 बजकर 50 मिनट तक.
- विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 33 मिनट से दोपहर 03 बजकर 27 मिनट तक.
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 02 मिनट से शाम 07 बजकर 23 मिनट तक.
- निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 56 मिनट से रात 12 बजकर 38 मिनट तक.
अपरा एकादशी पूजा विधि (Apara Ekadashi Vrat Puja Vidhi)
अपरा एकादशी पर सूर्योदय से पहले स्नान कर, व्रत संकल्प लें. उत्तर-पूर्व दिशा में एक चोकी बिछाकर उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं. चौकी पर श्रीलक्ष्मीनारायण जी के श्रीविग्रह की स्थापना करें. शालिग्राम शिला हो तो उसकी स्थापना चौकी पर करें. गंगाजल से श्रीलक्ष्मीनारायण और पंचामृत से शालिग्राम शिला का अभिषेक करें. चंदन और सुंगधित फूलों से श्रंगार करें. तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं. मौसम फल और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं. श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें. आरती के बाद आसन पर बैठकर ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की माला जाप करें. विष्णुसहस्त्रनाम या गोपालसहस्त्रनाम का पाठ करें. अपरा एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें. विष्णु चालीसा का पाठ करें. संभव हो तो रात्रि जागरण करें.
अपरा एकादशी पर क्या न करें (Apara Ekadashi What Not To Do)
- अपरा एकादशी पर क्रोध और गुस्सा करने से बचें
- परिवार में विवाद और कलेश करने से बचें.
- एकादशी के दिन व्रत रखें या न रखें लेकिन चावल का सेवन न करें.
- मांस-मदिरा का सेवन न करें.
- प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन न खाएं.
- अपने से बड़ों का अपमान न करें.
- बाल और नाखून न काटें.
- ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें.
अपरा एकादशी पर क्या करें (Apara Ekadashi What To Do)
- इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें.
- इसके साथ व्रत कथा सुनें.
- भगवान की आरती करें.
- संभव हो तो प्रसाद अधिक से अधिक लोगों में वितरित करें, जिससे पुण्य फल बढ़ता है.
अपरा एकादशी का महत्व (Apara Ekadashi Significance)
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी की शास्त्रों में विशेष महिमा बताई गयी है. इस एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साधक को अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है. गंगा स्नान और तीर्थ स्थलों की यात्रा फल प्राप्त होता है. अपरा एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के अपराध और पापों से छुटकारा मिल जाता है. जीवन में सुख-शांति आती है. घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. इस एकादशी पर पूजा-पाठ और दान करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें जारी रहीं तो ओएमसी के वित्त वर्ष 2026 के पूरे मुनाफे के खत्म होने की संभावना: हरदीप पुरी
मुंबई, 12 मई (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के वित्त वर्ष 2026 के पूरे मुनाफे के खत्म होने की संभावना है।
सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट 2026 में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट ने भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव डाला है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। अगर यही स्थिति जारी रही, तो एक तिमाही में इन कंपनियों का कुल नुकसान करीब 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव और आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे तेल कंपनियों पर दबाव और बढ़ गया है।
हरदीप सिंह पुरी ने आगे कहा कि मौजूदा कीमतों पर अगर एक तिमाही तक नुकसान जारी रहता है, तो सरकारी तेल कंपनियों का वित्त वर्ष 2026 का पूरा टैक्स के बाद का मुनाफा खत्म हो सकता है।
चर्चा के दौरान दिए गए इंडस्ट्री अनुमान के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां — इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम — वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मिलाकर करीब 1.2 लाख करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज कर सकती हैं।
यह अनुमान पहले के बाजार अनुमान से काफी ज्यादा है। पहले माना जा रहा था कि अगर कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहेगा, तो कंपनियों को हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपए यानी एक तिमाही में लगभग 81,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।
हालांकि अभी तक कच्चे तेल की कीमतें ज्यादातर समय 115 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रही हैं, लेकिन वास्तविक नुकसान का अनुमान पहले के आंकड़ों से ज्यादा निकल रहा है।
ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण देश में ईंधन सुरक्षा और सप्लाई को लेकर चिंता भी बढ़ी है।
इन चिंताओं पर जवाब देते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि भारत के पास फिलहाल करीब 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का पर्याप्त भंडार मौजूद है। वहीं एलपीजी का स्टॉक करीब 45 दिनों के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सप्लाई में किसी भी संभावित रुकावट से निपटने के लिए एलपीजी उत्पादन बढ़ा दिया है।
मंत्री ने आगे कहा कि देश में रोजाना एलपीजी उत्पादन को पहले के 35,000-36,000 टन से बढ़ाकर करीब 54,000 टन कर दिया गया है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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