असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार से जन कल्याण को प्राथमिकता देने और राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। सोमवार को बोलते हुए, गोगोई ने इस बात पर जोर दिया कि असम पुलिस को भाजपा के एजेंट के रूप में काम करने के बजाय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। एएनआई को संबोधित करते हुए गोगोई ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोकतंत्र में जनता के हित सर्वोपरि होते हैं। इस सरकार को असम की जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना होगा। असम की महिलाओं ने भाजपा को वोट दिया है। लेकिन असम में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बनी हुई है। मुझे उम्मीद है कि असम पुलिस, भाजपा के एजेंट के रूप में काम करने के बजाय, भविष्य में महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के लिए बाध्य होगी।
उनकी ये टिप्पणियां हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली नई असम सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले आईं, जो 12 मई को गुवाहाटी में होने वाला है। रविवार को मुख्यमंत्री पद के लिए नामित हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह के बाद नई सरकार का प्राथमिक लक्ष्य भाजपा के चुनाव घोषणापत्र को लागू करना होगा। असम सरकार के संसदीय कार्य विभाग की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सरमा को भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है। शपथ ग्रहण समारोह 12 मई को सुबह 11:40 बजे गुवाहाटी के खानापारा स्थित पशु चिकित्सा महाविद्यालय मैदान में होगा।
पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा कि शपथ ग्रहण करने के बाद हम पहली मंत्रिमंडल बैठक करेंगे। हमारा लक्ष्य अपने घोषणापत्र को लागू करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को गुवाहाटी पहुंचेंगे और इस कार्यक्रम में शामिल होंगे, जिसमें कई गणमान्य व्यक्ति और पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे। सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री आज रात गुवाहाटी पहुंचेंगे। कल सुबह 11 बजे असम की नई सरकार शपथ लेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री इस समारोह में शामिल होंगे। हमारी पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं सहित कई लोग इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
गठबंधन सहयोगी दलों, जिनमें भाजपा, असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के वरिष्ठ नेता शामिल थे, की बैठक में सरमा को भाजपा और एनडीए विधानसभा दलों का सर्वसम्मति से नेता चुना गया।
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच जम्मू-कश्मीर से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच हुई बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार के पास जम्मू-कश्मीर सरकार की कई महत्वपूर्ण फाइलें अंतिम मंजूरी के लिए लंबित हैं। नेशनल कांफ्रेंस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून 2019 के तहत अब तक कार्य संचालन नियम तय नहीं होने से वर्ष 2024 में निर्वाचित सरकार बनने के बाद से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। नेता ने कहा कि कई विभागों में मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल की भूमिकाएं स्पष्ट रूप से तय नहीं हैं, जिससे शासन व्यवस्था में दिक्कतें आ रही हैं और मुख्यमंत्री के लिए अपने अधिकारों का प्रभावी इस्तेमाल करना मुश्किल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर सरकार आरक्षण नीति से जुड़ी उस तीन सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर भी केंद्र की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है, जिसे पिछले वर्ष अप्रैल में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को भेजा गया था। इस रिपोर्ट का उद्देश्य मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करना था, जिसके कारण सरकारी शिक्षण संस्थानों और विभागों में ओपन मेरिट वर्ग की हिस्सेदारी घटकर 30 प्रतिशत रह गई थी। उमर अब्दुल्ला सरकार ने अक्टूबर 2024 में सत्ता संभालने के बाद ओपन कैटेगरी की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के सुझाव देने के लिए एक उपसमिति का गठन किया था। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर सरकार ने नए महाधिवक्ता की नियुक्ति से जुड़ी फाइल भी केंद्र को भेज रखी है, लेकिन मंजूरी नहीं मिलने के कारण वर्ष 2024 से यह पद खाली है।
हम आपको यह भी बता दें कि मुख्यमंत्री ने दिल्ली रवाना होने से पहले श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि वह केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित सभी प्रमुख विषयों को गृह मंत्री के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
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