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राष्ट्रपति चुनाव 2027: एक विधायक के वोट की वैल्यू और राज्यों की आबादी, समझें कैसे भाजपा के लिए आसान हुई राह
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर बहुमत का जादुई आंकड़ा (272) नहीं छू पाई थी, जिससे यह माना जा रहा था कि राष्ट्रपति चुनाव में उसे कड़ी चुनौती मिल सकती है। हालांकि, पिछले कुछ समय में हुए राज्यों के विधानसभा चुनाव, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में दो-तिहाई बहुमत की जीत ने पूरा पासा पलट दिया है। पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में एनडीए के बढ़ते प्रभुत्व ने 2027 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा की राह को बेहद आसान बना दिया है।
2024 के नुकसान की ऐसे हुई भरपाई
2024 के आम चुनाव में भाजपा की सीटें 303 से घटकर 240 रह गई थीं, जिससे निर्वाचक मंडल में पार्टी के वोटों को करीब 44,100 का झटका लगा था। तब विपक्ष ने दावा किया था कि राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को टीडीपी और जेडीयू जैसे सहयोगियों के आगे झुकना पड़ेगा। लेकिन बंगाल में 77 से बढ़कर 207 विधायकों का आंकड़ा और महाराष्ट्र-बिहार में बढ़ी संख्या ने उस नुकसान की पूरी भरपाई कर दी है। अब भाजपा सहयोगियों के साथ अपनी शर्तों पर चुनावी रणनीति बनाने की स्थिति में है।
विधायकों के 'वोट वैल्यू' का खेल
राष्ट्रपति चुनाव में संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य हिस्सा लेते हैं। यहाँ हर विधायक के वोट की वैल्यू उस राज्य की आबादी (1971 की जनगणना के अनुसार) पर निर्भर करती है। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों के विधायकों की वोट वैल्यू छोटे राज्यों की तुलना में बहुत अधिक होती है। उदाहरण के लिए, यूपी के एक विधायक की वोट वैल्यू 208 है। बंगाल और यूपी में भाजपा की भारी बढ़त का मतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में भाजपा के पास वोटों का एक ऐसा सुरक्षित भंडार है जिसे भेदना विपक्ष के लिए लगभग नामुमकिन है।
सहयोगियों के साथ बढ़ी मोलभाव की शक्ति
इन जीत ने न केवल भाजपा को संख्या बल दिया है, बल्कि सहयोगियों के बीच उसकी ताकत को भी बहाल किया है। विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन से पार्टी सहयोगियों के सामने कमजोर पड़ सकती थी, लेकिन अब भाजपा 'अपर हैंड' के साथ राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार तय कर सकती है। वर्तमान में एनडीए के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 237 और बिहार में 202 विधायक हैं, जो पिछले राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में कहीं अधिक हैं।
अगले साल जुलाई में होगा फैसला
अगले साल जुलाई 2027 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी किलेबंदी पूरी कर ली है। उत्तर प्रदेश, जहाँ से 83,800 से अधिक वोटों का भारी दबदबा मिलता है, वहां भी भाजपा मजबूत स्थिति में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब विपक्ष के पास साझा उम्मीदवार उतारने के अलावा कोई बड़ा विकल्प नहीं बचा है, लेकिन संख्या बल के मामले में एनडीए इतना आगे निकल चुका है कि जीत लगभग तय मानी जा रही है।
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