पीएम मोदी की अपील के बाद ज्वेलरी शेयरों में भारी गिरावट, 9 प्रतिशत तक फिसले
मुंबई, 11 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सोमवार को ज्वेलरी शेयरों में भारी गिरावट देखी गई और शेयर 12 प्रतिशत तक फिसल गए, जिसमें टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स, स्काई गोल्ड और ब्लूस्टोन ज्वेलरी एंड लाइफस्टाइल जैसी कंपनियों का नाम शामिल था।
दोपहर एक बजे टाइटन का शेयर 6.11 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,233 रुपए पर था। वहीं, कल्याण ज्वेलर्स का शेयर 8.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 387 रुपए पर था।
स्काई गोल्ड का शेयर 7.84 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 498.80 रुपए और ब्लूस्टोन ज्वेलरी एंड लाइफस्टाइल का शेयर 5.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 475 रुपए पर था।
रविवार को सिकंदराबाद में रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके।
उन्होंने कहा, “वर्तमान परिस्थितियों में, विदेशी मुद्रा बचाना देश के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।”
आयातित ईंधन पर भारत की निर्भरता का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने ईंधन की बचत, अनावश्यक खर्चों में कटौती और भारत में बनने वाली चीजों की खपत को प्राथमिकता देने जैसे उपायों को आवश्यक बताया।
उन्होंने अनावश्यक यात्रा और ईंधन की खपत को कम करने के लिए कोविड-19 के समय के उपायों जैसे वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन बैठकें और वर्चुअल कॉन्फ्रेंस को दोबारा से शुरू करने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से विदेश यात्रा और डेस्टिनेशन वेडिंग से बचने और घरेलू पर्यटन और स्थानीय खर्च को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया।
दूसरी तरफ, भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट जारी है। दोपहर एक बजे सेंसेक्स 860 अंक या 1.11 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,468 और निफ्टी 227 अंक या 0.94 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,948 पर था। बाजार में चौतरफा गिरावट है और करीब सभी सूचकांक लाल निशान में थे।
--आईएएनएस
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केंद्रीय कर्मचारियों की मौज! 8वें वेतन आयोग में इस नए नियम से बेसिक पे में होगा बंपर इजाफा
8th Pay Commission latest update: 8वें वेतन आयोग के गठन की सुगबुगाहट ने देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है. अक्सर लोग यह सोचते हैं कि उनकी सैलरी केवल महंगाई भत्ते या फिटमेंट फैक्टर के आधार पर ही बढ़ती है, लेकिन हकीकत में इसके पीछे एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बारीक गणित काम करता है. इस गणित का सबसे अहम हिस्सा है 'फैमिली यूनिट' फॉर्मूला. इसी फॉर्मूले के जरिए यह तय होता है कि एक सरकारी कर्मचारी को कम से कम कितनी बेसिक सैलरी मिलनी चाहिए. कर्मचारी यूनियनें लगातार सरकार पर इस फॉर्मूले को आधुनिक बनाने का दबाव बना रही हैं, क्योंकि उनका मानना है कि पुराने ढर्रे पर वेतन तय करने से आज के महंगाई के दौर में गुजारा करना मुश्किल है.
क्या है फैमिली यूनिट फॉर्मूला?
आसान भाषा में समझा जाए तो वेतन आयोग सबसे पहले यह हिसाब लगाता है कि एक औसत सरकारी कर्मचारी के परिवार को एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए हर महीने कम से कम कितने पैसों की जरूरत होती है. इस कल्पित आदर्श परिवार को ही 'फैमिली यूनिट' का नाम दिया गया है. यह पूरी व्यवस्था 'एकरायड फॉर्मूला' पर टिकी हुई है. यह फॉर्मूला एक इंसान की बुनियादी जरूरतों जैसे भोजन के लिए जरूरी कैलोरी, कपड़े की जरूरत और रहने के लिए मकान के किराए का विश्लेषण करता है. इन सभी खर्चों को जोड़कर जो राशि निकलती है, उसे ही न्यूनतम वेतन का आधार बनाया जाता है.
सैलरी बढ़ाने में परिवार के आकार की भूमिका
सैलरी के कैलकुलेशन में फैमिली यूनिट एक तरह के गुणांक का काम करती है. जब वेतन आयोग अपनी गणना शुरू करता है, तो वह यह देखता है कि एक परिवार में कितने सदस्य हैं. अगर वेतन आयोग यह मान लेता है कि अब एक परिवार को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पौष्टिक खाने पर पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है, तो न्यूनतम खर्च का अनुमान अपने आप बढ़ जाता है. जैसे ही यह आधार बढ़ता है, इसका सीधा असर पूरी पे-मैट्रिक्स पर पड़ता है. यानी अगर बेस सैलरी बढ़ेगी, तो फिटमेंट फैक्टर में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे कर्मचारी की कुल सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिलता है.
पुराने फॉर्मूले को बदलने की पुरजोर मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान में जिस फॉर्मूले का उपयोग किया जा रहा है, वह दशकों पुराना हो चुका है और आज की आर्थिक स्थितियों के अनुकूल नहीं है. पुराने समय में केवल रोटी, कपड़ा और मकान को ही मुख्य जरूरत माना जाता था. लेकिन आज के दौर में शहरों में रहने की लागत बहुत बढ़ गई है. बच्चों की प्राइवेट स्कूल की फीस, अस्पतालों का महंगा इलाज और आने-जाने का खर्च अब विलासिता नहीं बल्कि मजबूरी बन गया है. यूनियनों की सबसे बड़ी मांग यह है कि फैमिली यूनिट में अब केवल पति, पत्नी और बच्चों को ही न रखा जाए, बल्कि इसमें आश्रित बुजुर्ग माता-पिता को भी शामिल किया जाए.
भविष्य की जरूरतें और कर्मचारियों की उम्मीदें
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, ऐसे में कर्मचारियों का वेतन केवल 'जीवित रहने' के स्तर का नहीं होना चाहिए. वेतन ऐसा हो जिससे कर्मचारी एक बेहतर जीवन स्तर जी सके और भविष्य के लिए बचत भी कर सके. अगर 8वां वेतन आयोग फैमिली यूनिट के इस फॉर्मूले को रिवाइज करता है, तो इसका व्यापक असर होगा. इससे न केवल बेसिक पे बढ़ेगी, बल्कि महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. यही वह चाबी है जो भविष्य में केंद्रीय कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगी.
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