पाकिस्तान के पीएम शहबाज और कतर के प्रधानमंत्री अल थानी की फोन पर बात, मिडिल ईस्ट की हालात पर चर्चा
इस्लामाबाद, 10 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कतर के पीएम और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट में सकारात्मक बातचीत का समर्थन करने के लिए साझा प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की है।
पीएम शहबाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा, आज सुबह मुझे अपने भाई, कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी का फोन आया, जिससे मुझे बहुत खुशी हुई। हमने बदलते इलाके के हालात पर अपने विचार शेयर किए और पूरे इलाके में हमेशा शांति, स्थिरता और अच्छी बातचीत को बढ़ावा देने के लिए चल रही सभी कोशिशों को समर्थन करने का अपना वादा दोहराया।
उन्होंने आगे कहा, मैंने अपने प्यारे भाई, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी को उनकी समझदारी भरे नेतृत्व, बातचीत और कूटनीति के जरिए इलाके में शांति और स्थिरता लाने की पाकिस्तान की सच्ची कोशिशों को कतर के लगातार समर्थन के लिए दिल से शुक्रिया कहा। मैं अपने प्यारे भाई, कतर के अमीर के बहुत जल्द पाकिस्तान आने का इंतजार कर रहा हूं।
इसके अलावा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ऑफिस की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने इलाके में चल रही शांति की कोशिशों की समीक्षा भी की।
पाकिस्तानी पीएम ऑफिस ने दोनों देशों के बीच भाईचारे के गहरे संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने चल रही शांति की कोशिशों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी पार्टियों के बीच कंस्ट्रक्टिव एंगेजमेंट की अहमियत पर जोर दिया।
इसमें आगे कहा गया कि कतर के अमीर के दौरे से दोनों पक्षों को पाकिस्तान-कतर की हमेशा से चली आ रही साझेदारी को मजबूत करने और बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कतर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शेख मोहम्मद ने कहा कि कतर शांतिपूर्ण तरीकों से संकट खत्म करने के लिए पाकिस्तानी मध्यस्थता की कोशिशों को पूरा समर्थन करता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत में तरक्की से जुड़े सही हालात बनाने के लिए सभी पार्टियों को इन कोशिशों पर जवाब देना होगा। इससे एक बड़ा समझौता हो सकेगा ताकि इलाके में लगातार शांति बनी रहे।
बता दें, पीएम शहबाज और शेख मोहम्मद के बीच यह इस हफ्ते में दूसरी टेलीफोनिक बातचीत है। पाकिस्तानी पीएम के साथ बातचीत से पहले कतर के प्रधानमंत्री ने अमेरिका का दौरा किया था, जहां उनकी मुलाकात अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो और मिडिल ईस्ट में अमेरिका के स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ के साथ हुई थी।
रुबियो ने कहा कि उन्होंने कतर के डिफेंस के लिए अमेरिकी समर्थन पर चर्चा की। वहीं, कतर के विदेश मंत्री ने बताया कि तनाव कम करने के मकसद से पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर भी चर्चा हुई।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कुवैती हवाई क्षेत्र में दिखे ड्रोन, रक्षा मंत्रालय का दावा- 'सबको निपटा दिया'
कुवैत, 10 मई (आईएएनएस)। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रविवार सुबह उसके आसमान में कई ड्रोन दिखाई दिए जिन्हें पूरे ऐहतियात के साथ निपटा दिया गया। मंत्रालय ने ये नहीं बताया कि दुश्मन ड्रोन किसके थे।
सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता, ब्रिगेडियर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने कहा कि सेना ने रविवार सुबह कुवैती हवाई क्षेत्र में कई दुश्मन ड्रोन देखे, और उन्हें तय नियमों के तहत निपटा दिया गया। सेना देश की सुरक्षा के साथ ही अपने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए तत्पर है।
ये खबर कतर के मालवाहक जहाज के उसके समुद्री क्षेत्र में हुए कथित ड्रोन हमले के बीच सामने आई है। पहले यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स एजेंसी ने दावा किया था कि दोहा के उत्तर पूर्व में सुबह हमला हुआ था। इसके बाद कतर ने पुष्टि की कि रविवार को उसके समुद्री क्षेत्र में एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह जहाज अबू धाबी से आ रहा था। हमले के बाद जहाज में आग लगी, लेकिन जल्द ही उसको काबू में कर लिया गया। इस घटना में किसी के घायल या हताहत होने की खबर नहीं है। मंत्रालय के अनुसार आग बुझाने के बाद जहाज की यात्रा जारी रही और वह मेसाईद बंदरगाह की ओर बढ़ गया।
इस बीच ईरानी सेना के एक प्रवक्ता की चेतावनी भी सुर्खियों में है। उन्होंने कहा कि जो देश अमेरिकी प्रतिबंध ईरान पर लागू करेंगे, उन्हें होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, ब्रिगेडियर जनरल अकरमी निया ने कहा कि युद्ध में दुश्मन अपने किसी भी मकसद में कामयाब नहीं हुआ और ईरान की राजनीतिक व्यवस्था भी कमजोर नहीं पड़ी। इसके उलट देश के लोग एक सूत्र में बंधे।
निया के मुताबिक, दुश्मन जानता है कि वह ईरान की प्रतिरोधक क्षमता को नहीं तोड़ सकता, इसलिए आखिरकार उसे सीजफायर मानना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि जारी सीजफायर के दौरान ईरान ने अपनी सैन्य ताकत और क्षमताओं को और मजबूत किया है।
--आईएएनएस
केआर/
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