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बिहार: मौलाना तौसीफ के परिवार मिलेंगे फरमान हसन, 5 लाख रुपये की देंगे आर्थिक मदद

जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान (फरमान मियां) 10 मई 2026 को बिहार के किशनगंज पहुंचकर मरहूम आलिम-ए-दीन मौलाना तौसीफ रजा मजहरी के परिवार से मिलेंगे. फरमान हसन खान किशनगंज में मरहूम मौलाना के घर पर उनके परिजनों का हालचाल लेंगे. वहीं उनकी पत्नी  को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद देंगे. 

फरमान मियां के अनुसार, यह सहायता केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक सम्मान का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि उलेमा समाज की रूहानी रहनुमाई करते हैं, ऐसे में उनके परिवारों की देखभाल करना समाज की जिम्मेदारी है.

भाईचारे का मजबूत संदेश भी देगा

मरकज-ए-अहले सुन्नत, बरेली शरीफ़ के अनुसार, मौलाना तौसीफ रजा मजहरी के निधन से पूरे समुदाय में गहरा शोक है. इस मुश्किल समय में फरमान हसन खान का यह कदम न सिर्फ परिवार को सहारा देगा, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का मजबूत संदेश भी देगा. जमात रजा-ए-मुस्तफा के कार्यकर्ताओं का कहना है कि फरमान मियां की मौजूदगी से पीड़ित परिवार को संबल मिलेगा और अहले सुन्नत में यकजहती और भी मजबूत होगी.

‘वर्ल्ड स्पिरिचुअल कॉनक्लेव’ में आमंत्रित किया

गौरतलब है​ कि फरमान हसन खान को 30 नवंबर 2022 को आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में आयोजित ‘वर्ल्ड स्पिरिचुअल कॉनक्लेव’ में आमंत्रित किया गया था. इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में वे दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों के बीच शामिल हुए और अपनी भागीदारी से देश का प्रतिनिधित्व किया.

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सामान्य रोशनी से अलग पतली किरण, जो चांद की दूरी भी नाप सकती है, जानें क्या है 'लेजर'?

नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। लेजर शब्द आजकल हर जगह सुनाई पड़ता है। बारकोड स्कैनर, लेजर प्रिंटर, आंखों की सर्जरी लगभग हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल हो रहा है। यही नहीं लेजर लाइट चांद की दूरी भी नाप सकती है। लेजर असल में क्या है और यह कैसे काम करता है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा लेजर के बारे में विस्तार से जानकारी देता है, जिसके अनुसार लेजर रोशनी की एक बहुत ही पतली किरण पैदा करता है जो कई तकनीकों और उपकरणों में काम आती है। लेजर शब्द ‘लाइट एंप्लीफिकेशन बाई स्टीमूलेटेड एमीशन ऑफ रेडिएशन का संक्षिप्त रूप है यानी उत्तेजित उत्सर्जन द्वारा रोशनी का प्रवर्धन।

कह सकते हैं कि लेजर रोशनी का एक अनोखा सोर्स है। यह आम बल्ब या टॉर्च से काफी अलग होता है। लेजर रोशनी की एक बहुत ही पतली किरण पैदा करता है। इस तरह की रोशनी कई तकनीकों और उपकरणों के लिए उपयोगी होती है।

अब सवाल है कि लेजर कैसे काम करता है? तो वैज्ञानिक बताते हैं कि इसकी किरणें तरंगों के रूप में चलती है, एक तरंग के शिखरों के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य कहा जाता है। सूरज की रोशनी और आम बल्ब की रोशनी कई अलग-अलग तरंगदैर्ध्य वाली रोशनियों से मिलकर बनी होती है। हालांकि, लेजर इनसे काफी अलग होता है। इसमें रोशनी की सभी तरंगों का तरंगदैर्ध्य लगभग एक जैसा होता है। लेजर की रोशनी की तरंगें एक साथ चलती हैं, जिनके शिखर एक ही लाइन में होते हैं या ‘इन-फेज’ होते हैं। यही वजह है कि लेजर किरणें पतली, चमकदार होती हैं और उन्हें एक बहुत ही छोटे बिंदु पर केंद्रित किया जा सकता है।

चूंकि लेजर की रोशनी केंद्रित रहती है और ज्यादा फैलती नहीं है, इसलिए लेजर किरणें बहुत लंबी दूरी तय कर सकती हैं। वे बहुत छोटे से क्षेत्र पर बहुत ज्यादा ऊर्जा भी केंद्रित कर सकती हैं।

लेजर के कई उपयोग किए जाते हैं। लेजर का इस्तेमाल सटीक औजारों में किया जाता है। ये हीरे या मोटी धातु को भी काट सकते हैं। इन्हें नाजुक सर्जरी में मदद करने के लिए भी डिजाइन किया जाता है। लेजर का इस्तेमाल जानकारी को रिकॉर्ड करने और उसे दोबारा पाने के लिए किया जाता है। इनका इस्तेमाल कम्यूनिकेशन, टीवी और इंटरनेट के सिग्नल ले जाने में किया जाता है। लेजर प्रिंटर, बार कोड स्कैनर और डीवीडी प्लेयर में भी देखे जा सकते हैं। ये कंप्यूटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के पुर्जे बनाने में भी मदद करते हैं।

यही नहीं लेजर का इस्तेमाल स्पेक्ट्रोमीटर में भी किया जाता है जो वैज्ञानिकों को यह पता लगाने में मदद करते हैं कि कोई चीज किन चीजों से मिलकर बनी है। नासा के ‘क्यूरियोसिटी रोवर’ ने मंगल ग्रह पर लेजर स्पेक्ट्रोमीटर का इस्तेमाल किया था। वैज्ञानिकों ने लेजर की मदद से चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी भी मापी है। लेजर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

--आईएएनएस

एमटी/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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