तमिलनाडु में सरकार को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। विधायकों का समर्थन लेकर राज्यपाल से मिलने की कोशिश कर रहे टीवीके प्रमुख विजय को झटका लगा है। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल उनके साथ अपनी बैठक को रद्द कर दिया है।
पिछले कुछ दिनों में भारत और नेपाल के रिश्तों में हल्का तनाव देखने को मिला। पहले लिपुलेख को लेकर विवाद जहां दोनों देशों की ओर से बयानबाजी हुई और अब खबर आ रही है कि भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री का प्रस्तावित नेपाल दौरा फिलहाल टाल दिया गया। बताया जा रहा है कि यह दौरा 11 मई से शुरू होना था। लेकिन अचानक इसे स्थगित कर दिया गया और भारत की ओर से लिए गए इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई। दरअसल विदेश सचिव विक्रम मिश्री दो दिन के दौरे पर काठमांडू जाने वाले नेपाल और भारत दोनों तरफ से इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई थी। लेकिन अब अचानक इस दौरे को टाल दिया गया। नेपाल के विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों के मुताबिक भारतीय पक्ष की तरफ से अचानक जानकारी ली गई कि यह दौरा फिलहाल टाल दिया गया है।
हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई कारण नहीं बताया गया। भारतीय विदेश सचिव के इस दौरे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नेपाल में हाल ही में नई सरकार बनी और बालन शाह नेपाल के नए प्रधानमंत्री बने हैं और वह पहली बार भारत के साथ प्रधानमंत्री बनने के बाद उच्च स्तरीय बातचीत करने वाले थे। भारत की योजना थी कि विदेश सचिव विक्रम मिश्री नेपाल जाकर प्रधानमंत्री बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दें। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ की तरफ से इस बैठक को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली और यही वजह बताई जा रही है कि भारत ने दौरा आगे बढ़ाने का फैसला लिया। सूत्रों का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री स्तर की मुलाकात ही नहीं हो पाती तो फिर इस दौरे का राजनीतिक महत्व कम हो जाता। हालांकि नेपाल सरकार ने इस मामले को ज्यादा बड़ा मुद्दा मानने से इंकार किया।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौल क्षेत्री ने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते बहुत गहरे हैं और किसी एक मुद्दे से दोनों देशों के संबंध प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि एक बात और यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब लिपुलेख को लेकर भी तनाव बढ़ा हुआ है। नेपाल की सरकार और विपक्ष दोनों ने लिपुलेख को लेकर बयानबाजी तेज कर दी है। आपको बता दें लिपुलेख वो इलाका है जो भारत का है और नेपाल इसे लेकर उल्टे सीधे दावे करता है और पिछले कुछ दिनों में नेपाल में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी काफी तेज हो गई। ऐसे में विदेश सचिव का दौरा टलना इन घटनाओं का भी प्रभाव हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि भारत तक नहीं करता। आपको बता दें भारत और नेपाल के संबंध सिर्फ पड़ोसी देशों वाले नहीं है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव है और आर्थिक सहयोग भी दोनों के बीच काफी बड़ा रोटी बेटी का रिश्ता है।
भारतीय कुश्ती महासंघ ने स्टार पहलवान विनेश फोगाट के खिलाफ बड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए उन्हें 26 जून तक घरेलू प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया है। डोप टेस्ट में अनुपस्थिति और वापसी प्रक्रिया में नियम उल्लंघन को लेकर जारी इस कार्रवाई ने भारतीय कुश्ती में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
संन्यास से वापसी और नियमों की अनदेखी का आरोप WFI की ओर से जारी नोटिस के अनुसार विनेश फोगाट ने अपने संन्यास के फैसले को पलटने और खेल में वापस लौटने की प्रक्रिया में नियमों की गंभीर अनदेखी की है। महासंघ का कहना है कि अगस्त 2024 में पेरिस ओलिंपिक से अयोग्य घोषित होने के बाद विनेश ने सार्वजनिक रूप से संन्यास की घोषणा की थी।
नियमों के मुताबिक संन्यास से वापसी के लिए किसी भी खिलाड़ी को कम से कम छह महीने पहले महासंघ को सूचित करना अनिवार्य होता है। WFI ने स्पष्ट किया कि विनेश ने इस प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया, जो कि यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। महासंघ के अनुसार, इस व्यवहार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कुश्ती की गरिमा को ठेस पहुंची है।
डोप टेस्ट में अनुपस्थिति और अनुशासन पर सवाल विनेश के खिलाफ महासंघ ने केवल वापसी की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि डोपिंग नियमों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया गया है कि 18 दिसंबर 2025 को बेंगलुरु में होने वाले एक अनिवार्य डोप टेस्ट में विनेश शामिल नहीं हुई थीं। इस चूक को लेकर अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (ITA) ने भी 4 मई को उन्हें नोटिस थमाया था।
WFI ने विनेश से चार प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा है और पूछा है कि उनकी इस निरंतर 'अनुशासनहीनता' के लिए उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। महासंघ ने अपने बयान में कहा कि किसी भी खिलाड़ी का कद खेल और नियमों से बड़ा नहीं हो सकता।
बृजभूषण पर तीखा हमला इस प्रतिबंध से ठीक एक सप्ताह पहले विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर फिर से गंभीर आरोप लगाए थे। विनेश ने खुलासा किया कि उत्तर प्रदेश के गोंडा में 10 से 12 मई के बीच होने वाले सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में उनका शामिल होना मानसिक रूप से कठिन है।
उन्होंने भावुक होकर कहा कि मैं उन छह पीड़ितों में से एक हूं जिन्होंने बृजभूषण के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है और मेरी गवाही अदालत में चल रही है। ऐसे में आरोपी के घर (गोंडा) में जाकर कुश्ती लड़ना मेरे लिए लगभग असंभव है। वहां मेरी टीम मुकाबला करेगी, लेकिन यदि किसी खिलाड़ी के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।
गोंडा टूर्नामेंट की निष्पक्षता पर उठाए सवाल विनेश ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि गोंडा में होने वाला टूर्नामेंट बृजभूषण के निजी प्रभाव वाले क्षेत्र में आयोजित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां कौन सा रेफरी किस खिलाड़ी को अंक देगा और किसे विजेता घोषित किया जाएगा, यह सब पूर्व अध्यक्ष के करीबी लोगों की ओर से नियंत्रित होगा।
विनेश के अनुसार, खेल मंत्रालय और सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर मूक दर्शक बनी हुई है, जिससे खिलाड़ियों का मनोबल गिर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वहां निष्पक्ष वजन जांच और पारदर्शी परिणाम की उम्मीद करना बेमानी है।
तीन साल पुराना संघर्ष और राजनीतिक मोड़ उल्लेखनीय है कि विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने लगभग तीन साल पहले जंतर-मंतर पर ऐतिहासिक धरना दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि तत्कालीन WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह महिला खिलाड़ियों का शोषण करते हैं। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़पें भी हुई थीं।
वर्तमान में विनेश फोगाट हरियाणा के जुलाना क्षेत्र से कांग्रेस की विधायक हैं, जबकि बृजभूषण शरण सिंह भाजपा के पूर्व सांसद हैं। उनके परिवार का राजनीतिक रसूख अब भी बरकरार है, क्योंकि उनके पुत्र वर्तमान में सांसद और विधायक के रूप में सक्रिय हैं। दूसरी ओर, बृजभूषण ने हमेशा इन आरोपों को निराधार बताया है और इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया है।
मैट पर वापसी का संकल्प नहीं छोड़ा इतने विवादों और प्रतिबंधों के बीच भी विनेश फोगाट ने मैट पर वापसी का संकल्प नहीं छोड़ा है। उन्होंने अपने प्रशंसकों से कहा कि वह पिछले डेढ़ साल से कुश्ती से दूर थीं, लेकिन अब पूरी ईमानदारी से प्रशिक्षण ले रही हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ईश्वरीय आशीर्वाद और जनता के सहयोग से वह फिर से देश के लिए पदक जीतेंगी और तिरंगे का मान बढ़ाएंगी। फिलहाल 26 जून तक का यह प्रतिबंध विनेश के करियर के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो सकता है और अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि वह महासंघ के नोटिस का क्या जवाब देती हैं।