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बुर्ज खलीफा का मालिक कौन? कौन वसूलता है इसका किराया, जानें इंस्‍ट्रेस्टिंग फैक्‍ट

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा सिर्फ अपनी ऊंचाई ही नहीं, बल्कि लग्जरी और शानदार इंजीनियरिंग के लिए भी मशहूर है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुबई की इस भव्य इमारत का असली मालिक कौन है और इसका किराया आखिर किसके पास जाता है? आइए जानते हैं.

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यूपी में लापरवाह डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई, पांच चिकित्साधिकारी बर्खास्त

लखनऊ, 8 मई (आईएएनएस)। यूपी के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ते हुए शुक्रवार को कई चिकित्साधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की। ड्यूटी से लंबे समय तक गायब रहने, प्रशासनिक लापरवाही, निजी अस्पतालों के पंजीकरण में अनियमितता और मरीजों के इलाज में कोताही बरतने के आरोपों में पांच चिकित्साधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है जबकि एक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) समेत 16 चिकित्साधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

उपमुख्यमंत्री ने चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ और सरकारी जिम्मेदारियों में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेवा से बर्खास्त किए गए चिकित्साधिकारियों में जिला चिकित्सालय गोरखपुर की डॉ. अलकनंदा, कुशीनगर में तैनात डॉ. रामजी भरद्वाज, बलरामपुर के डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी के सीएचसी जगदीशपुर में तैनात डॉ. विकलेश कुमार शर्मा तथा औरैया के सीएचसी दिबियापुर की डॉ. मोनिका वर्मा शामिल हैं। इन सभी पर लंबे समय से बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और चिकित्सकीय कार्यों से विरत रहने का आरोप था।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का सबसे बड़ा असर अंबेडकरनगर में देखने को मिला, जहां मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा पर निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण में अनियमितता बरतने, शासनादेशों की अनदेखी करने और पद के दुरुपयोग के आरोप सिद्ध पाए गए। शिकायतों की जांच एडीएम स्तर की तीन सदस्यीय समिति ने की, जिसके बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए।

हरदोई के संडीला में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह पर अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई न करने और अपने दायित्वों में लापरवाही बरतने का आरोप लगा। इस मामले में विभागीय जांच बैठाई गई है। साथ ही हरदोई के सीएमओ से यह भी जवाब तलब किया गया है कि वरिष्ठ डॉक्टरों की मौजूदगी के बावजूद कनिष्ठ चिकित्साधिकारी को वरिष्ठ पद का कार्यभार क्यों सौंपा गया। प्रयागराज के मेजा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और अधीनस्थों पर नियंत्रण न रख पाने के आरोप में विभागीय कार्रवाई के साथ स्थानांतरण के आदेश दिए गए हैं।

वहीं, सुल्तानपुर के लंभुआ सीएचसी में महिला मरीज के इलाज में लापरवाही के मामले में तत्कालीन अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह, चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मराज और फार्मासिस्ट अवधनारायण के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मथुरा जिला चिकित्सालय में मेडिकल परीक्षण में कथित अनियमितता के मामले में इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. देवेंद्र कुमार और सर्जन डॉ. विकास मिश्रा पर भी विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। इसके अलावा बलरामपुर, वाराणसी, बदायूं, खीरी और संभल समेत कई जिलों में तैनात चिकित्साधिकारियों के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप में जांच और अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं के अस्थिरोग विभाग में तैनात सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल पर महिला चिकित्साधिकारी और अन्य डॉक्टर के साथ अभद्रता एवं गाली-गलौज करने के आरोप में भी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने दो चिकित्साधिकारियों बहराइच की डॉ. प्रतिभा यादव और मथुरा के डॉ. राकेश सिंह को परिनिंदा दंड दिया है। वहीं, स्टेट हेल्थ एजेंसी की कैशलेस चिकित्सा योजना में प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉ. आदित्य पांडेय की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें मूल तैनाती स्थल रायबरेली वापस भेजने के आदेश दिए गए हैं।

इसके साथ ही कई चिकित्साधिकारियों की वेतनवृद्धि भी रोकी गई है। हमीरपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि पर प्रसूताओं से वसूली और अभद्रता के आरोप में तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोक दी गई हैं। बलरामपुर के डॉ. संतोष सिंह की चार और झांसी की डॉ. निशा बुंदेला की दो वेतनवृद्धियां रोकी गई हैं।

झांसी के ट्रॉमा सेंटर मोठ में तैनात आर्थो सर्जन डॉ. पवन साहू पर निजी प्रैक्टिस के आरोप सिद्ध होने पर दो वेतनवृद्धियां रोकने और परिनिंदा दंड देने के निर्देश जारी किए गए हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने साफ कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और मरीजों के हितों से समझौता करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

--आईएएनएस

विकेटी/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

लगातार 2 हार से संकट में RCB, क्या Virat Kohli की टीम IPL 2026 Playoff की रेस से हो जाएगी बाहर?

मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) खिताब की अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी और कुछ सुधार करने होंगे। कई कारणों से टीम को सीजन के मध्य में एक संक्षिप्त लेकिन चिंताजनक गिरावट का सामना करना पड़ा है। रायपुर में पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस (एमआई) के खिलाफ होने वाला मुकाबला रेड एंड गोल्ड टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि उन्हें गुजरात टाइटन्स और लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) से लगातार दो हार का सामना करना पड़ा है। छह जीत और चार हार के साथ चौथे स्थान पर काबिज आरसीबी के बचे हुए चार मैच बेहद अहम हैं और मौजूदा हालात को देखते हुए आरसीबी के लिए आगे का रास्ता काफी चुनौतीपूर्ण है।
 

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रेड एंड गोल्ड ब्रिगेड के पास अपने प्रमुख खिलाड़ियों और पदों के लिए कई बैकअप विकल्प मौजूद हैं। फिल साल्ट, विराट कोहली और देवदत्त पडिक्कल की लगातार शीर्ष तीन बल्लेबाजों के बाद, उनके पास कप्तान रजत पाटीदार, जितेश शर्मा, वेंकटेश अय्यर, क्रुणाल पंड्या, रोमारियो शेफर्ड और टिम डेविड जैसे भारतीय/विदेशी खिलाड़ियों का एक मजबूत समूह है। अपने पहले पांच मैचों में, आरसीबी के चौथे से आठवें नंबर तक के बल्लेबाजों का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजी औसत 39.30 रहा, जबकि स्ट्राइक रेट 190.77 था, जो सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइक रेट भी है। कुल मिलाकर दो अर्धशतक आए, जबकि 23 चौके और 33 छक्के लगे।

हालांकि, अगले पांच मैचों में, रेड एंड गोल्ड ने लगातार विकेट गंवाए और रन चेज़ को मुश्किल बना दिया, जिससे उनके मध्य क्रम का प्रदर्शन तेज़ी से बिगड़ गया। इन पांच मैचों में उनका औसत 21 रहा (सभी टीमों में सबसे खराब), स्ट्राइक रेट 148.58 (चौथा सर्वश्रेष्ठ), यानी लगभग 42 रनों की गिरावट। उन्होंने सिर्फ एक अर्धशतक लगाया, जिसमें 23 चौके और 23 छक्के शामिल हैं। साल्ट ने छह मैचों में हिस्सा लिया और 33.66 के औसत और 168.33 के स्ट्राइक रेट से 202 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल थे। उंगली में चोट लगने के कारण उन्हें ब्रिटेन वापस लौटना पड़ा, जिससे उनका अभियान छोटा हो गया।

आरसीबी ने साल्ट की चोट पर चुप्पी साध रखी है, जबकि सोशल मीडिया पर जेक फ्रेजर मैकगर्क, रहमानुल्लाह गुरबाज या जॉनी बेयरस्टो जैसे खिलाड़ियों को उनकी जगह लेने की अफवाहें और खबरें फैल रही हैं। हाल ही में ऑनलाइन सामने आई खबरों और तस्वीरों के अनुसार, साल्ट भारत लौट आए हैं। लेकिन उनकी अनुपस्थिति में, जैकब बेथेल, जिन्हें अक्सर अंग्रेजी क्रिकेट का 'स्टारबॉय' कहा जाता है, को शीर्ष क्रम में खेलने का मौका मिला। वानखेड़े स्टेडियम में भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में शतक लगाने के बाद, इस युवा अंग्रेज खिलाड़ी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किए जाने की काफी चर्चा थी, लेकिन चार पारियों में सिर्फ 43 रन (जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 20 रन है) बनाकर उन्होंने इस उम्मीद को सही साबित नहीं किया है। शायद सलामी बल्लेबाजी उनकी खासियत नहीं है, क्योंकि इंग्लैंड टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में उन्हें तीसरे से छठे स्थान तक बल्लेबाजी के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
 

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आईपीएल 2024 के बाद से विराट के स्ट्राइक रेट और छक्के लगाने की क्षमता में आया उल्लेखनीय सुधार निःसंदेह प्रेरणादायक है। यह इस बात का प्रमाण है कि एक दिग्गज खिलाड़ी में सुधार और विकास करने की प्रबल इच्छाशक्ति है, भले ही उन्हें भारतीय टीम में टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में वापसी के रूप में कोई प्रोत्साहन न मिल रहा हो। इस सीजन में उन्होंने 10 मैचों में 164.06 के स्ट्राइक रेट से 379 रन बनाए हैं, जिसमें तीन अर्धशतक शामिल हैं। उनका स्ट्राइक रेट एक सीजन में अब तक का सबसे उच्च स्तर है। लेकिन कई बार इसका खामियाजा उनकी टीम की जीत को भुगतना पड़ा है। ईएसपीएनक्रिकइंफो के अनुसार, 2024 सीजन की शुरुआत से अब तक खेली गई 40 पारियों में से विराट ने 30 या उससे अधिक गेंदें खेली हैं। ऐसे मौकों पर आरसीबी ने 18 मैच जीते हैं और सिर्फ दो हारे हैं। हालांकि, अन्य 20 मौकों पर जब उन्होंने 30 या उससे कम गेंदों में अपना विकेट गंवाया है, तो आरसीबी 14 मैच हार चुकी है और सिर्फ छह जीत पाई है। इस सीजन में हुई चारों हार में विराट ने 30 से कम गेंदें खेली हैं।
Sun, 10 May 2026 16:47:41 +0530

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