बंगाल में 'मोदी-शाह' का नया मिशन: आज फाइनल होगी भाजपा मंत्रियों की लिस्ट, जानें किन दिग्गजों को मिलेगी कैबिनेट में जगह!
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 207 सीटें जीतकर सत्ता के शिखर पर पहुँची भारतीय जनता पार्टी अब राज्य में अपने पहले ऐतिहासिक मंत्रिमंडल के गठन की तैयारी में जुट गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में आज होने वाली विधायक दल की बैठक में न केवल मुख्यमंत्री का नाम तय होगा, बल्कि उन चेहरों की सूची भी लगभग फाइनल कर ली जाएगी जो 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेंगे। पार्टी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, बंगाल का पहला भाजपा मंत्रिमंडल 'सोशल इंजीनियरिंग' और 'क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व' का एक अनूठा संगम होगा, जिसमें उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल तक के विधायकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
मंत्रिमंडल के गठन में अमित शाह का 'गुजरात मॉडल' और सोशल इंजीनियरिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की रणनीति बंगाल में एक ऐसा मंत्रिमंडल बनाने की है जो समावेशी होने के साथ-साथ प्रशासनिक रूप से भी बेहद सक्षम हो। माना जा रहा है कि पार्टी अपने मंत्रिमंडल में मतुआ समुदाय, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और ओबीसी (OBC) वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देगी। अमित शाह ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पुराने और अनुभवी नेताओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में युवा और नए चेहरों को भी मंत्री बनाया जाएगा ताकि राज्य में भविष्य का नेतृत्व तैयार किया जा सके। इसके अलावा, उन सांसदों को भी बड़ी भूमिका मिल सकती है जिन्होंने विधानसभा चुनाव लड़कर जीत हासिल की है।
सुवेंदु अधिकारी की टीम और संभावित बड़े चेहरे
मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे सुवेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल में कई प्रमुख नामों की चर्चा तेज है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के करीबियों के अलावा अग्निमित्रा पॉल, मनोज तिग्गा, मिहिर गोस्वामी और अशोक लाहिरी जैसे नामों को कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है। सुवेंदु अधिकारी खुद अपने पुराने साथियों को भी टीम में शामिल करवा सकते हैं जिन्होंने टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। पार्टी के भीतर इस बात पर भी विचार चल रहा है कि क्या राज्य में 'उप-मुख्यमंत्री' का पद भी सृजित किया जाए ताकि अलग-अलग क्षेत्रों को बेहतर तरीके से संतुष्ट किया जा सके।
उत्तर बंगाल और जंगलमहल को मिलेगा विशेष प्रतिनिधित्व
भाजपा की प्रचंड जीत में उत्तर बंगाल और जंगलमहल के जिलों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि अलीपुरद्वार, कूचबिहार और दार्जिलिंग जैसे जिलों से कम से कम 4 से 5 विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। उत्तर बंगाल की विकास योजनाओं को गति देने के लिए एक विशेष विभाग का प्रभार किसी कद्दावर नेता को दिया जा सकता है। वहीं, जंगलमहल के आदिवासी बहुल इलाकों से आने वाले विधायकों को सामाजिक कल्याण और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है ताकि उन क्षेत्रों में पार्टी के जनाधार को और अधिक मजबूत किया जा सके।
प्रशासनिक अनुभव और विशेषज्ञता को तरजीह
भाजपा आलाकमान बंगाल में शासन के पहले दिन से ही अपनी छाप छोड़ना चाहता है। इसके लिए वित्त, गृह और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों के लिए ऐसे नेताओं को चुना जा रहा है जिनके पास या तो पुराना प्रशासनिक अनुभव है या फिर वे अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, जाने-माने अर्थशास्त्री डॉ. अशोक लाहिरी को वित्त मंत्रालय का जिम्मा सौंपा जा सकता है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य राज्य की चरमराई कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना और केंद्र की योजनाओं को बिना किसी बाधा के बंगाल के गांव-गांव तक पहुँचाना है।
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