ईरान के साथ बातचीत से 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से सुरक्षित निकले, 13 अभी भी क्षेत्र में मौजूद : एमईए
नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को बताया कि ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के चलते अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से निकल चुके हैं।
नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में आगे प्रगति हो रही है और मंत्रालय लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है।
उन्होंने कहा, “हमें प्रगति दिख रही है और इसी प्रगति, कूटनीतिक बातचीत और ईरान के साथ संवाद के चलते अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से बाहर निकल चुके हैं। अभी 13 जहाज फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। हम ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि बाकी जहाज भी सुरक्षित रूप से होर्मुज की खाड़ी पार करके भारत आ सकें, जो उनका अंतिम गंतव्य है।”
खबरों के मुताबिक, होर्मुज की खाड़ी अब फिर से खुलने की ओर बढ़ रही है। बुधवार को अमेरिका और ईरान की ओर से ऐसे संकेत मिले कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर लगी रोक हटाई जा सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार की शाम को कहा था कि वह कुछ समय के लिए रोक हटाकर देखना चाहते हैं कि ईरान के साथ कोई समझौता हो सकता है या नहीं। इसके बाद ईरान के सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को कहा कि वह अब जहाजों को इस रास्ते से गुजरने देगा।
उसने दावा किया कि अमेरिका की धमकियों को बेअसर कर दिया गया है।
ट्रंप ने बुधवार की सुबह चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर रोक नहीं हटाई तो वह फिर से और भी ज्यादा ताकत के साथ बमबारी शुरू कर सकते हैं।
ईरान ने यह रास्ता उस समय बंद कर दिया था जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने उसके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। यह वही रास्ता है जिससे दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है।
इसके बाद अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों पर अपनी ओर से भी रोक लगा दी थी, जब दोनों देशों के बीच बातचीत अचानक टूट गई थी।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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IRS प्रयति शर्मा संभालेंगी मसूरी एकेडमी की जिम्मेदारी, केंद्र सरकार ने लगाई नियुक्ति पर मुहर
केंद्र सरकार ने भारतीय राजस्व सेवा की होनहार अधिकारी प्रयति शर्मा को एक बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी किए गए नवीनतम आदेश के मुताबिक, प्रयति शर्मा को अब मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में उप निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है. यह संस्थान देश के आईएएस अधिकारियों को प्रशिक्षित करने वाला प्रमुख केंद्र है, जहां अब प्रयति अपनी सेवाएं देंगी. 2015 बैच की आईआरएस अधिकारी होने के नाते उनके पास कर प्रशासन और प्रबंधन का गहरा अनुभव है, जिसका लाभ अब अकादमी को मिलने वाला है.
चार साल का होगा कार्यकाल और कड़ी शर्तें
प्रयति शर्मा की यह नियुक्ति केंद्रीय स्टाफिंग योजना के तहत की गई है. उन्हें उप सचिव स्तर के पद पर तैनात किया गया है और उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से लेकर अगले चार वर्षों तक प्रभावी रहेगा. सरकार ने इस नियुक्ति को लेकर काफी गंभीरता दिखाई है. आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उन्हें तीन सप्ताह के भीतर अपनी नई जिम्मेदारी संभालनी होगी. यदि वे निर्धारित समय सीमा के अंदर जॉइन नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है. यह कदम प्रशासनिक दक्षता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है.
शोभेंद्र बहादुर को मिला सेवा विस्तार
प्रशासनिक गलियारों में केवल प्रयति शर्मा ही चर्चा में नहीं हैं, बल्कि वरिष्ठ आईटीएस अधिकारी शोभेंद्र बहादुर को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ है. केंद्र सरकार ने उनके उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए उनके प्रतिनियुक्ति कार्यकाल को एक साल के लिए और बढ़ाने का निर्णय लिया है. शोभेंद्र बहादुर 1994 बैच के भारतीय दूरसंचार सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय में निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं. मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने उनके कार्यकाल विस्तार को अपनी मंजूरी दे दी है.
डिजिटल इंडिया मिशन में निभा रहे अहम भूमिका
शोभेंद्र बहादुर पिछले कई वर्षों से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. वे 31 अगस्त 2020 से केंद्र सरकार के साथ काम कर रहे हैं. उनके कार्यकाल विस्तार के बाद अब वे 30 अगस्त 2027 तक अपनी वर्तमान भूमिका में बने रहेंगे. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय में निदेशक के रूप में वे देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास से जुड़ी परियोजनाओं को देख रहे हैं. सरकार का मानना है कि उनके अनुभव से मंत्रालय की चल रही योजनाओं को गति मिलेगी और निरंतरता बनी रहेगी.
प्रशासनिक मजबूती की ओर सरकार के कदम
इन नियुक्तियों और कार्यकाल विस्तार के पीछे सरकार की मंशा स्पष्ट है कि अनुभवी अधिकारियों को उनकी योग्यता के अनुसार सही जगह पर तैनात किया जाए. मसूरी अकादमी में प्रयति शर्मा की नियुक्ति से प्रशिक्षण ले रहे नए अधिकारियों को राजस्व और कर प्रणाली की बारीकियों को समझने में मदद मिलेगी. वहीं, शोभेंद्र बहादुर का कार्यकाल बढ़ना मंत्रालय के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने की गारंटी देता है. इन दोनों ही फैसलों को कार्मिक विभाग की सक्रियता और बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में कुछ और बड़े अधिकारियों के फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है.
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