IRS प्रयति शर्मा संभालेंगी मसूरी एकेडमी की जिम्मेदारी, केंद्र सरकार ने लगाई नियुक्ति पर मुहर
केंद्र सरकार ने भारतीय राजस्व सेवा की होनहार अधिकारी प्रयति शर्मा को एक बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी किए गए नवीनतम आदेश के मुताबिक, प्रयति शर्मा को अब मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में उप निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है. यह संस्थान देश के आईएएस अधिकारियों को प्रशिक्षित करने वाला प्रमुख केंद्र है, जहां अब प्रयति अपनी सेवाएं देंगी. 2015 बैच की आईआरएस अधिकारी होने के नाते उनके पास कर प्रशासन और प्रबंधन का गहरा अनुभव है, जिसका लाभ अब अकादमी को मिलने वाला है.
चार साल का होगा कार्यकाल और कड़ी शर्तें
प्रयति शर्मा की यह नियुक्ति केंद्रीय स्टाफिंग योजना के तहत की गई है. उन्हें उप सचिव स्तर के पद पर तैनात किया गया है और उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से लेकर अगले चार वर्षों तक प्रभावी रहेगा. सरकार ने इस नियुक्ति को लेकर काफी गंभीरता दिखाई है. आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उन्हें तीन सप्ताह के भीतर अपनी नई जिम्मेदारी संभालनी होगी. यदि वे निर्धारित समय सीमा के अंदर जॉइन नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है. यह कदम प्रशासनिक दक्षता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है.
शोभेंद्र बहादुर को मिला सेवा विस्तार
प्रशासनिक गलियारों में केवल प्रयति शर्मा ही चर्चा में नहीं हैं, बल्कि वरिष्ठ आईटीएस अधिकारी शोभेंद्र बहादुर को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ है. केंद्र सरकार ने उनके उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए उनके प्रतिनियुक्ति कार्यकाल को एक साल के लिए और बढ़ाने का निर्णय लिया है. शोभेंद्र बहादुर 1994 बैच के भारतीय दूरसंचार सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय में निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं. मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने उनके कार्यकाल विस्तार को अपनी मंजूरी दे दी है.
डिजिटल इंडिया मिशन में निभा रहे अहम भूमिका
शोभेंद्र बहादुर पिछले कई वर्षों से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. वे 31 अगस्त 2020 से केंद्र सरकार के साथ काम कर रहे हैं. उनके कार्यकाल विस्तार के बाद अब वे 30 अगस्त 2027 तक अपनी वर्तमान भूमिका में बने रहेंगे. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय में निदेशक के रूप में वे देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास से जुड़ी परियोजनाओं को देख रहे हैं. सरकार का मानना है कि उनके अनुभव से मंत्रालय की चल रही योजनाओं को गति मिलेगी और निरंतरता बनी रहेगी.
प्रशासनिक मजबूती की ओर सरकार के कदम
इन नियुक्तियों और कार्यकाल विस्तार के पीछे सरकार की मंशा स्पष्ट है कि अनुभवी अधिकारियों को उनकी योग्यता के अनुसार सही जगह पर तैनात किया जाए. मसूरी अकादमी में प्रयति शर्मा की नियुक्ति से प्रशिक्षण ले रहे नए अधिकारियों को राजस्व और कर प्रणाली की बारीकियों को समझने में मदद मिलेगी. वहीं, शोभेंद्र बहादुर का कार्यकाल बढ़ना मंत्रालय के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने की गारंटी देता है. इन दोनों ही फैसलों को कार्मिक विभाग की सक्रियता और बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में कुछ और बड़े अधिकारियों के फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है.
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क्रूज शिप पर हंटावायरस का खतरा, WHO ने दी सफाई- कोरोना जैसी महामारी को लेकर जानें क्या कहा
अटलांटिक महासागर में चल रहे एक क्रूज शिप पर फैले हंटावायरस संक्रमण ने दुनियाभर की स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, WHO (World Health Organization) ने साफ किया है कि मौजूदा स्थिति को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है. WHO का कहना है कि इस वायरस के फैलने का खतरा फिलहाल सीमित है और आम जनता के लिए जोखिम 'लो' यानी कम बना हुआ है.
क्या है पूरा मामला?
डच फ्लैग वाले क्रूज शिप MV Hondius पर हंटावायरस के कई मामले सामने आए हैं. जहाज पर मौजूद यात्रियों और क्रू में अब तक कई लोग संक्रमित या संदिग्ध पाए गए हैं, जबकि तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज ने अप्रैल की शुरुआत में अर्जेंटीना से यात्रा शुरू की थी और बाद में दक्षिण अटलांटिक क्षेत्र में संक्रमण फैलने की आशंका सामने आई.
WHO के अनुसार, जहाज पर पाए गए मामलों में “एंडीज स्ट्रेन” नाम का दुर्लभ हंटावायरस शामिल हो सकता है. यह वही स्ट्रेन है जिसमें बेहद सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने की क्षमता देखी गई है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए बहुत करीबी संपर्क जरूरी होता है.
कोरोना जैसी स्थिति क्यों नहीं?
WHO ने स्पष्ट किया है कि हंटावायरस, कोविड-19 की तरह तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है. यह सामान्यतः संक्रमित चूहों के मल, मूत्र या लार के संपर्क से फैलता है। इंसानों के बीच संक्रमण के मामले बेहद दुर्लभ माने जाते हैं.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 की तरह हंटावायरस में बड़े पैमाने पर सामुदायिक संक्रमण की संभावना नहीं दिख रही है. WHO और यूरोपियन हेल्थ एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
यात्रियों की निगरानी शुरू
संक्रमण सामने आने के बाद कई देशों ने जहाज से लौटे यात्रियों और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी शुरू कर दी है. अमेरिका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और अन्य देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां संभावित संपर्कों की ट्रैकिंग कर रही हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ मरीजों को दक्षिण अफ्रीका और नीदरलैंड में इलाज के लिए एयरलिफ्ट किया गया है. वहीं जहाज को लेकर स्पेन और कैनरी आइलैंड्स प्रशासन ने भी विशेष स्वास्थ्य प्रोटोकॉल लागू किए हैं.
कितना खतरनाक है हंटावायरस?
हंटावायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी है, जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है. इसके लक्षणों में तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया शामिल हैं. गंभीर मामलों में मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है. फिलहाल इसका कोई विशेष इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. WHO ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है और कहा है कि फिलहाल यह स्थिति नियंत्रण में है.
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