₹3000 में किया 26 जानों का सौदा, अमरनाथ यात्रा से सेना की तैनाती के दिए राज, पहलगाम हमले का यह भी है एक काला सच
Operation Mahadev: 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला सिर्फ गोलियों और खून-खराबे की कहानी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सीमापार से रची गई एक बेहद गहरी साजिश थी. हमले के बाद जांच एजेंसियों ने जब सबूत जुटाने शुरू किए, तो कहानी में कई चौंकाने वाले मोड़ सामने आए. पता चला कि पाकिस्तान से आए तीन आतंकियों को स्थानीय स्तर पर भी मदद मिली थी. जंगलों में मुलाकात हुई, झोपड़ी में शरण दी गई, खाने का इंतजाम और फिर इलाके की रेकी में भी मदद की गई. जांच के दौरान परत दर परत जो खुलासे हुए, वे बेहद चौंकाने वाले थे. डीएनए रिपोर्ट, मोबाइल डेटा और बलिस्टिक जांच ने भी आतंकियों और लोकल नेटवर्क के बीच कड़ी जोड़ दी थी. यही पूरी कहानी अब निशांत, पारुल को समझा रहा है, जहां हर सवाल के साथ इस आतंकी हमले का एक नया और खौफनाक सच सामने आता जाता है.
मुगल काल का वो दौर, जब आगरा किले से चलती थी बंगाल पर हुकूमत, दीवान-ए-खास से जारी होते थे फरमान, कांपती थी पूर्व की सत्ता!
Agra News: आगरा का ऐतिहासिक किला कभी बंगाल की सत्ता का केंद्र हुआ करता था. सन् 1576 से 1707 तक, अकबर से औरंगजेब जैसे मुगल बादशाहों ने आगरा के 'दीवान-ए-खास' से ही बंगाल के सूबेदारों की नियुक्ति और शाही फरमान जारी किए. बंगाल की उपजाऊ भूमि और व्यापारिक मार्ग मुगलों के लिए सामरिक व आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थे. जानिए किस तरह आगरा किले से बंगाल का शासन संचालित होता था और कैसे यहां से जारी एक आदेश पूर्वी भारत की तकदीर बदल देता था.
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